
Earth Day Specia- 22 अप्रैल 2026: हमारी शक्ति-हमारी पृथ्वी
डॉ. तेज प्रकाश व्यास
धरती माँ केवल भौतिक गोला नहीं, बल्कि जीवित चेतना है। वह हमारे साथ साँस लेती है, हमारे रक्त में प्रवाहित ऑक्सीजन बनती है, और हमारे जीवन को अमृत देती है। Anti-aging विज्ञान उद्घोष करता है कि पृथ्वी की शुद्धता और मानव की दीर्घायु का गहरा सम्बन्ध है।
“धरती की शुद्धता ही जीवन की दीर्घता है।”
ऋग्वेद (पृथ्वी सूक्त):
माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः
(धरती मेरी माता है, मैं उसका पुत्र हूँ।)
पृथ्वी दिवस की जन्मगाथा
1970 में अमेरिका से प्रारम्भ हुआ यह आंदोलन आज विश्वव्यापी महायज्ञ बन चुका है। 193 देशों में यह दिवस मनाया जाता है। भारत में इसकी जड़ें वैदिक परम्परा में हैं।
ऋग्वेद (पृथ्वी सूक्त):
भूमिः सर्वभूतानि धारयति, सा नः शान्तिम् ददातु।
(जो पृथ्वी सभी प्राणियों को धारण करती है, वह हमें शांति प्रदान करे।)
पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 2026 की थीम* ‘हमारी शक्ति, हमारी पृथ्वी’
यह थीम केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है।
ऊर्जा — सौर और पवन से जीवन का नवोदय।
इच्छाशक्ति — व्यक्तिगत संकल्प से सामूहिक परिवर्तन।
सामुदायिक सशक्तीकरण — गाँव, नगर और राष्ट्र की एकजुटता।
“जब मनुष्य अपनी शक्ति को पृथ्वी की शक्ति से जोड़ता है, तब चमत्कार घटित होते हैं।”
मिट्टी पानी और बयार, जीवन के हैं ये आधार
वायु-जल-मृदा प्रदूषण संग्राम — प्रदूषण से मुक्ति ही जीवन की रक्षा।
सौर-पवन ऊर्जा क्रान्ति — अक्षय ऊर्जा ही भविष्य का मार्ग।
समुदाय की अपराजेय शक्ति — जब लोग साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव होता है।
ऋग्वेद (पृथ्वी सूक्त):
भूमिः वायुम्, आपः, ओषधयः धारयति, सा नः पोषणं ददातु।
(जो पृथ्वी वायु, जल और औषधियों को धारण करती है, वह हमें पोषण दे।)
“प्रकृति के आलिंगन में ही अमरत्व का रहस्य छिपा है।”
विश्व और भारत में आयोजन
इस वर्ष पृथ्वी दिवस पर छह प्रमुख गतिविधियाँ होंगी:
वृक्षारोपण महोत्सव
जल-संरक्षण अभियान
अक्षय ऊर्जा प्रदर्शनी
विद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा
सामुदायिक स्वच्छता अभियान
वैश्विक वेबिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम
“धरती के उत्सव में ही मानवता का भविष्य सुरक्षित है।”
*व्यावहारिक मार्गदर्शन
प्लास्टिक का त्याग, जल-बचत, वृक्षारोपण।
सामुदायिक स्तर पर — स्वच्छता अभियान, अक्षय ऊर्जा परियोजनाएँ।
राष्ट्रीय स्तर पर — नीति, विज्ञान और संस्कृति का समन्वय।
“हर व्यक्ति का छोटा संकल्प ही राष्ट्र का महान संकल्प बनता है।”
प्रतिदिन का संकल्प –धारणीय जीवन ही दीर्घायु का आधार है। आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम उन्हें एक शुद्ध, सुरक्षित और जीवन्त पृथ्वी दें।
ऋग्वेद (पृथ्वी सूक्त):
भूमिः दीर्घायुः ददाति, सा नः आयुष्यम् ददातु।
(जो पृथ्वी दीर्घायु प्रदान करती है, वह हमें आयुष्य दे।)
संदेश
धरती माँ की पुकार सुनें। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि जीवन्त प्रतिज्ञा है।प्रतिदिन प्रतिपल धरती की रक्षा करें।
“हमारी शक्ति — हमारी पृथ्वी” — यही मानवता का अमर गीत है।
“पृथ्वीः जीवनस्य गानम्: मानव का अनन्त प्रणाम।”
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