श्रद्धांजलि: ‘यह बस्ता है’
बंशीलाल परमार

यह बस्ता है
स्कूली छात्रा का
जो किसी भी
देश की
धर्म की
जाति की
नस्ल की
हो सकती है !
उसमें रखी किताबों की भाषा
चाहे अलग हो हमसे
पर इसमें छुपे सपने एक है
इसी में एक बेटी है
भविष्य की युवती और मां है
निकली शिक्षा की यात्रा पर
पर शैतानों की कहानियां
शास्त्रों में होती है
ऐसी करतूत करने वाले पर लिखी है
जिसने विध्वंस की सृष्टि को
जैसे हम बेटी कहते हैं
….. श्रद्धांजली
बंशीलाल परमार





