पुस्तक चर्चा: इंदौर लेखिका संघ का अनूठा आयोजन- मेरा प्रिय लेखक और मेरी प्रिय किताब पर चर्चा

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पुस्तक चर्चा: इंदौर लेखिका संघ का अनूठा आयोजन- मेरा प्रिय लेखक और मेरी प्रिय किताब पर चर्चा

इंदौर लेखिका संघ ,इंदौर ने आज फिर एक  साहित्हिंयिक विषय पर चर्चा कटे हुए बड़ी संख्या में कालजयी साहित्यकारों और उनकी पुस्तकों पर बात की .हिंदी  साहित्य अनेक श्रेष्ठ लेखकों का साहित्य  है। हर व्यक्ति का कोई न कोई प्रिय लेखक होता है, जिसकी रचनाएँ उसे बहुत पसंद आती हैं.उनकी कहानियों और उपन्यास को पढ़कर भरपूर रस और प्रेरणा मिलती है.लेखन की दुनिया में कई महान लेखक हुए हैं, जिन्होंने अपने शब्दों से समाज को प्रभावित किया है.जिनकी रचनाएँ आप बार बार याद करते हैं और पढना चाहते हैं ,कई बार हम एक ही पुस्तक को बार बार पढ़ते हैं और हर बार वह हमें कुछ नया समझाती है ,इसी बात पर आज की चर्चा हुई . विषय अनुरूप बात की शुरुवार और विषय में प्रवेश करते हुए डॉ.स्वाति तिवारी ने कहा कि ‘आधुनिक युग की मीरा’ कही जाने वाली महादेवी वर्मा मेरी प्रिय रचनाकार है.  महादेवी जी ने ने कविताओं के साथ ही रेखाचित्र, संस्मरण, निबंध, डायरी आदि गद्य विधाओं में भी योगदान किया है। ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्य गीत’, ‘यामा’, ‘दीपशिखा’, ‘साधिनी’, ‘प्रथम आयाम’, ‘सप्तपर्णा’, ‘अग्निरेखा’ उनके काव्य-संग्रह हैं।जिनके काव्य में परंपरा और मौलिकता का अद्वितीय समन्वय नज़र आता है। शब्द-निरूपण, वर्ण-विन्यास, नाद-सौंदर्य और उक्ति-सौंदर्य-सभी दृष्टियों से वह भाषा पर सहज अधिकार रखती हैं.महादेवी जी का मेरा परिवार जीव के प्रति एक अलग ही प्रेम को जन्म देता है .

लेखिका अरुणा सराफ ने कहा हिंदी साहित्य में शरद जोशी को आधुनिक व्यंग्यकारों में अग्रणी माना जाता है। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों, राजनीति और मानवीय स्वभाव पर बड़ी ही पैनी और मारक चोट की है।एक उनका व्यंग्य संग्रह ‘जीप पर सवार इल्लियाँ’ है।​यह रचना व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और दिखावे की संस्कृति पर करारा प्रहार करती है। इसमें लेखक ने बताया है कि कैसे सरकारी तंत्र में एक समस्या को सुलझाने के नाम पर कई नई ‘इल्लियाँ’ (परजीवी) पैदा हो जाती हैं जो संसाधनों का शोषण करती हैं।

डॉ. प्रतीक्षा शर्मा ने अपनी पसंदीदा कथाकार – मालती जोशी को बताते हए कहा नए लेखकों में मेरी विशेष पसंद मालती जोशी जी हैं। वे हिंदी साहित्य की अत्यंत लोकप्रिय और संवेदनशील कथाकार रही हैं, जिन्होंने पारिवारिक जीवन, मानवीय रिश्तों और विशेष रूप से नारी-मन की भावनाओं को बड़ी सहजता और गहराई से अभिव्यक्त किया है।
उनकी रचनाओं में मेरी प्रिय कहानी किरदार है। इस कहानी में जीवन के विभिन्न संबंधों और व्यक्ति के आंतरिक द्वंद्व को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।यह रचना मुझे इसलिए विशेष रूप से पसंद है क्योंकि इसमें यह दिखाया गया है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में कई “किरदार” निभाता है, परंतु इन भूमिकाओं के बीच उसका वास्तविक स्वरूप कहीं खो-सा जाता है। कहानी हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है कि हम दूसरों की अपेक्षाओं में जीते-जीते कहीं स्वयं को तो नहीं भूल रहे।मालती जोशी जी की लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सहज भाषा और गहरी संवेदना है। वे साधारण घटनाओं के माध्यम से जीवन के बड़े सत्य को उजागर करती हैं, जिससे पाठक स्वयं को कहानी से जुड़ा हुआ महसूस करता है।

कवियों में मेरे प्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन हैं। वे हिंदी साहित्य के महान कवि रहे हैं, जिन्होंने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और दार्शनिक काव्यधारा से पाठकों के हृदय को गहराई से स्पर्श किया है।उनकी रचनाओं में मेरी सबसे प्रिय कृति मधुशाला है। यह केवल एक काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विविध आयामों आनंद, पीड़ा, संघर्ष और दर्शन—का अद्भुत प्रतीकात्मक चित्रण है।

सपना उपाध्याय में कहा  प्रिय लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं.प्रेमचंजी की सुप्रसिद्ध कहानी बूढ़ी काकी से कोन परिचित नहीं है । जब जब ये कहानी मैं पढ़ती हूँ तो अपने अश्रु नहीं रोक पाती हूँ । यह बहुत ही मार्मिक कहानी है जो वृद्धावस्था की उपेक्षा और भूख के दर्द को चित्रित करती है ।यह एक असहाय वृद्ध महिला की कहानी है ।

लेखिका प्रभा तिवारी ने कहा सुभद्रा कुमारी चौहान मे अद्भुत राष्ट्रप्रेम था. कुमारी चौहान के विषय में कहा जा सकता है कि उनका रचना संसार देशभक्ति की भावना से रंगा हुआ है और उनकी रचनाओं में देश की मिट्टी की महक को अनुभव किया जा सकता है कवित्री की कविता में राष्ट्रीय चेतना का विस्तृत रूप देखने को मिलता है.इनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति में आस्था और प्राचीन इतिहास के गौरव परिलक्षित होता है.सुभद्रा कुमारी चौहान की राष्ट्रीय चेतना आध्यात्मिक रंग में रंग गई है देश प्रेम की भावना को उन्होंने आध्यात्मिक स्तर पर प्रतिष्ठित किया है।

पापों के गढ़ टूट पड़ेंगे
, रहना तुम तैयार सखी
वि जय हम तुम मिल कर लेंगी
अपनी मां का प्यार सखी💐

इनकी कविता में विद्रोह का स्वर भी देखने को मिलता है अगर विद्रोह इनकी कविताओं का मूल स्वर है तो बलिदान और समर्पण उनकी प्राण ध्वनि है।

वरिष्ठ लेखिका सीमा शाहजी के अनुसार जातीय स्मृतियों को पुनर्जीवित करने वाले मेरे पसंदीदा कवि डॉ धर्मवीर भारती

नई काव्य सर्जना के संवेदना पक्ष को प्रभावी शिल्प में ढालने वाले कवियों में धर्मवीर भारती का नाम अनुप्रेक्षणीय है ।भारती जी प्रतिभा संपन्न कवि ,विचारक कथाकार व गद्यकार के रूप में विख्यात है । उनकी लेखनी अनेक विधाओं पर चली है ,किंतु वह मूलतः कवि हैं , उनकी काव्य यात्रा का प्रारंभ प्रमुख रूप से दूसरे सप्तक से ही हुआ है ।प्रकृति से ही विद्रोही ओर प्रगतिशील भारती का कवि एकांतिक होकर भी अंध परंपराओं के प्रति अस्वीकार करके चला है ।उनकी प्रारंभिक कविताए छायावादी रंग लिए हैं , किंतु उनकी अभिव्यंजना प्रणाली नवीन है ।
धर्मवीर भारती ने नई कविता में प्रगतिवादी स्वर दिया है ,उनकी कृतियों में छायावादोत्तर कविता के संघर्ष को अधिक तीव्र करने , और परंपरा की सार्थक पहचान को मूर्त रूप देने का कार्य किया है । उनकी काव्य कृतियों में ठंडा लोहा ,सात गीत वर्ष ,अंधा युग प्रमुख है ,ठंडा लोहा व सात गीत वर्ष कविताओं का संकलन है । अंधा युग और कनुप्रिया प्रबंध काव्य है.

वरिष्ठ लेखिका कुसुम सौगानी ने कहा  .. शिवानी जी का नथ के साथ मुझे गौरा पंत जी शिवानी की समस्त कहानी रटी हुई थीं.अगर कोई कहे कि आपको उपन्यास या हिंदी कहानीकारों की श्रंखला देकर उनकी कहानियाँ या उपन्यास का पुनर्पाठन करने का अवसर दिया जाये तो आप किसे प्राथमिकता देंगी तो मैं निश्चित ही प्रसिद्धउपन्यास कार शिवानी की सारीकिताबों को पढूंगी । मैं शिवानी जी की कहानियाँ और उपन्यासों के साथ ही बड़ी हुई या कुछ चरित्रों को अपनी जिंदगी में कहीं न कहीं फिट किया करती थी।बहुत बचपन से मैंने उन्हें पढ़ना शुरु किया – जब उपन्यास पढ़ने की भी उम्र की सीमा होती थी।वातावरण भाषा सौन्दर्य या कथानक पसंद था …। सात साल की उम्र से ११/१२ साल तक की उम्र में समीक्षात्मक दृष्टि नहीं रहती थी बस पढ़ना और पढ़ना
ऐसे ही हिंदी प्रेम बढ़ा ।एक एक करके कई उपन्यासकारकहानीकार मेरी नज़र चढ़ने लगे।तब सारे नायक नायिका मेरे हीरो हो जाते ।शिवानी जी की जिंदगी अपनी सी लगती.. ऐसा ही बंगला पिताजी का अंग्रेज़ी दबदबा नर्स, सहायक रसोइया मिसरानी जी ड्राइवर सेवकसब परिवार बन जाते पढ़ने में याने किताब और मॉं नहीं थी तो शिवानी जी की कहानियाँ मॉं का सुख देती ।
उनके साहित्य की समीक्षा मेरी कल्पना से परे हैं बस इतना मालूम है कि मुझे उनकी कहानियों से बहुत प्यार हो गया था.

सुप्रसिद्ध चित्रकार – लेखिका वन्दिता श्रीवास्तव ने अपनी बात कविता में कहते हुए अनेक पात्र पत्रिकाओं का  जिक्र करते हुए कहा

धर्मयुग
साप्ताहिक हिन्दुस्तान
दिनमान
नवनीत
कादम्बिनी
पराग
चम्पक
चन्दामामा
कल्याण
स्पान
सरिता
सारिका
इन्द्र जाल कॉमिक्स
रीडर्स डाइजेस्ट
इन्डिया टुडे,मासिक पत्रिकाओ का अकूत खजाना ददिहाल
ननिहाल मे हर माह खुलता था
ननिहाल मे घर मे पुस्तकालय
ददिहाल मे ल ब पु
लाल बहादुर पुस्तकालय

प्रो. डॉ निहार गीते ने अपने घर आनेवाली पत्रिका सोवियत नारी को याद किया और बताया कि ‘सोवियत नारी ‘भी हमारे घर आती थी ।चिकनी,आकर्षक एकदम फिरंगन ।हिन्दी में प्रकाशित इस पत्रिका में सभी के लिए कुछ ना कुछ होता था.अब पत्रिकाओं का स्तर पहले जैसा नहीं रहा .

डॉ आशा शर्मा ने  कहा कि आज आदरणीया स्वाति जी ने मुझे जैसे जगा दिया।अपना पसंदीदा लेखक या लेखिका के विषय में बात करेंगे वैसे तो ७ वर्ष की उम्र से ही लेखन किया है, फिर लायब्रेरी ज्वाइन की महिला लेखिकाओं को पढ़ना शौक था। छायावादी त्रिवेणी कवियों में जब महादेवी वर्मा जी का नाम जोड़ा गया तो बड़ी प्रसन्नता हुई, क्योंकि वे मेरी पसंदीदा लेखिका रही हैं।
बचपन से ही उन्हें पढ़ती थी। उनके साथ मंच पर बोलने का प्रयास किया उन्होंने पूछा क्या आगे लिखोगी? मैंने सहज भाव से हां कह दिया था।वे आज भी मेरी प्रेरणा स्रोत हैं।उनका जीव मात्र से अनन्य प्रेम मुझे बहुत ही प्रभावशाली ढंग से उसे प्रस्तुत करना और पाठक के हृदय तक पहुंचा देना बड़ा अच्छा लगता है।
जीवन के चक्र में उलझकर बहुत समय बाद जब शिक्षिका के रूप में हायरसैकैंडरी स्कूल में पढ़ाते समय उनका रेखाचित्र “गौरां”पढ़ाया तो स्मृति पटल पर उनकी गौरैया नामक रचना उभरकर आई कि वे पशु पक्षियों से भी कितना प्रेम करती हैं।

नवोदित लेखिका डॉ.प्राची पांडे  ने कहा कहानीकार डॉ स्वाति तिवारी  की कहानियों में जीवन्तता और सामाजिक सरोकार है , परंतु उनकी कथा पठन की शैली उससे भी आगे है,   मैं  उनकी फैन हो गई हूँ । उनकी कथा पाठ शैली कथोपकथन कला  उनकी लिखित कथा को जीवंतता प्रदान करती है। श्रोता स्वयं को कहानी के पात्रों के इर्द गिर्द पाता है। अब मेरी पसंदीदा रचनाकारों में एक कहानीकार स्वाति तिवारी

लेखिका -सम्पादक सुनीता श्रीवास्तव के अनुसार मेरे पसंदीदा साहित्यकार मैथिलीशरण गुप्त है हुआ यूं कि कक्षा 6में थे उस समय सभी सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों के लिए आकाशवाणी से कार्यकम प्रसारित होता था जिसे सभी विद्यार्थियों को सुनना होता था एक कार्यकम में प्रश्न उत्तर प्रतियोगिता थी जिसमें ओंकारेश्वर जी जो उस समय इंदौर आकाशवाणी के उद्घोषक थे उन्होंने प्रतियोगिता रखी उसमें उन्होंने राष्ट्रकवि की रचनाओं को लेकर प्रश्न किए उस समय मिडिल स्कूल के हिंदी विषय में मैथिलीशरण गुप्त जी की कविता पाठ्यक्रम में थी सो फटाफट जबाव दे दिए और प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ सोचकर आश्चर्य हुआ क्योंकि उनकी कविता कोर्स में तो थी पर वह राष्ट्रकवि है यह नहीं मालुम था जब हिंदी की टीचर से कहा तो उन्होंने सभी की क्लास ले डाली उस समय मेरी बड़ी दीदी रक्षा हिंदी में एम. ए.कर रही थी मेम ने बोला उनकी किताबें पढ़ा करो सो छुप छुपकर मैथिली शरण गुप्त महादेवी वर्मा , जायसी, पद्मावत को पढ़ना शुरू कर दिया मन में डर था कि घर के लोग डांटेंगे यह बड़ों की पुस्तके पढ़ती हैं इसलिए लैटिन में कभी पलंग पर चादर ओढ़ कर , कभी दूसरी किताब में किताब रख कर पढ़ते थे बचपन में बी बी सी लंदन के कार्यकम सुनने का शोक था जब प्रति सप्ताह रत्नाकर भारती हिंदी रचनाकारों को लेकर कार्यकम करते थे एक बार चुपके से उस समय पोस्टकार्ड चलते थे और वह वह पोस्टकार्ड पर ही जवाब मांगते थे सो दीदी की अलमारी से एक पोस्टकार्ड निकाल चिट्ठी लिख दी जब कुछ दिनों बाद कार्यकम आया तो रत्नाकर भारती ने बोला राजगढ़ से एक बालिका सुनीता श्रीवास्तव ने…घर के लोग आश्चर्य से देखने लगे अरे यह गुड्डी तुमने लिखा…उस समय पत्र लिखना अच्छा नहीं मानते थे तो डर लगा पिताजी जिन्हें हम साहित्य के एक महान कवि थे, जिन्हें हम बाबूजी कहते थे डांटेंगे और दीदी भी इसलिए डर कर घर के ओटले पर जा कर पेड़ों में छुप गए किन्तु देख आश्चर्य हुआ कि घर के लोग नाराज होने के बदले खुश हो रहे थे तब लगा छुपकर पत्र लिखना कोई डर की बात नहीं है इसलिए बरबस ही मैथिलीशरण गुप्त हमारे प्रिय कवि बन गए उनको राष्ट्रकवि के रूप में सम्मानित किया गया।

लेखिका सुषमा व्यास  ने कहा मेरे पसंदीदा लेखक अनेक रहे–शिवाजी, मालती जोशी, माखनलाल चतुर्वेदी, शिवाजी सावंत, आचार्य चतुरसेन इत्यादि।
परन्तु मुझे निर्मल वर्मा की कहानियों ने भी बहुत प्रभावित किया।पश्चिम और पूर्व का अद्भुत सामंजस्य हिंदी साहित्य की कहानियों में स्थापित करने वाले इस कालजयी अग्रणी साहित्यकार की कहानियों में चरित्र या उद्देश्य नहीं वरन आधुनिक माहौल, व्यक्ति के अंतर्मन का संघर्ष ,उसकी संवेदनाओं का तूफान , एकाकीपन और बहुमुखी जीवन की परिस्थितियों का विपरीत चित्रण है। निर्मल वर्मा की कहानी संपूर्ण विश्व की पीड़ा को अपने में समाहित कर लेती है।

माधुरी सोनी बताती है कि पुस्तकों के प्रति रुझान बढ़ने से पहले में नईदुनिया में modesty O blege “कार्टून आता था ब्लॉडि नाम से। फिर पुस्तकों मेंमेंड्रेक की रहस्यों से भरपूर,इंद्रजाल कॉमिक्स,चाचा चौधरी प्राण की ,सुमन सौरभ,चंपक,नंदन, सोवियत नारी में क्रोशिया वर्क,ड्रेस डिज़ाइन भी अच्छी लगती थी।छोटी काकियां सरिता,गृहशोभा, कादम्बिनी की शौकीन होती थी तब महिला पत्रिकाओं को छुपा छुपाकर पड़ती थी,जिसमें हाय में शर्म से लाल हुई के किस्से लुभाते थे।पिता लेखन क्षेत्र में थे,मंचीय प्रस्तुति हेतु बचपन से ही तैयार कर दिया था।संयुक्त परिवार में घर में दादी सा ने मानस ग्रंथ की आदत डाल दी थी जिसे आज भी नित्य पठन करती हूं।