
कैलाश, प्रह्लाद के बिना नागलवाड़ी में मोहन कैबिनेट के क्या संकेत हैं…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लंबे समय से कयासों का दौर जारी है। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में बाकी सब तो ठीक रहा लेकिन विधानसभा सचिवालय की तारीफ़ करते हुए नगरीय प्रशासन और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री सचिवालय को लेकर जो टिप्पणी की थी, वह उनका अपनी ही सरकार पर तीखा कटाक्ष था। और विधानसभा सत्र के ठीक बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई थी। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के दो वरिष्ठ मंत्रियों कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल की मुलाकात भी अमित शाह से हुई थी। यहां तक भी सब ठीक माना जा सकता है। मुलाकातों के इस दौर को भी सामान्य मेल के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन नागलवाड़ी में हुई मध्यप्रदेश सरकार की कृषि कैबिनेट में कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल
की अनुपस्थिति बहुत कुछ सोचने को मजबूर करती है। और सामान्य तौर पर देखा जाए तो यह साफ संकेत नजर आ रहे हैं कि निकट भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार और निगम मंडलों में नियुक्ति को लेकर सरकार फैसला लेने को तैयार है। और यदि मंत्रिमंडल विस्तार में कैलाश और प्रह्लाद जैसे चेहरे उपेक्षा का शिकार होते हैं, तब बजट सत्र के बाद की यह मुलाकातों का दौर असरकारी साबित होता नजर आएगा।
कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं है, इसके संकेत सरकार बनने के बाद लगातार मिल रहे हैं। इंदौर में प्रभारी मंत्री की जगह खाली छोड़ना और मुख्यमंत्री द्वारा इंदौर को अपनी देखरेख में रखना शायद मोहन और कैलाश के बीच पहला सीधा सामना था। उसके बाद लगातार स्थितियां सामने आती रही, जब दोनों के बीच संबंधों को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। सरकार के दो साल पूरे होने पर जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह साफ कहा कि वह इंदौर के प्रभारी मंत्री नहीं हैं बल्कि इंदौर में किसी को प्रभारी मंत्री नहीं बनाया गया है तब स्थिति साफ हो गई थी कि मोहन की अपनी कार्यशैली शुरू से ही प्रभावी रही है। यहां पर उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि मुख्य सचिव का काम दफ्तर में बैठकर अपने कर्तव्यों की पूर्ति करना है। मैदान में खुद मुख्यमंत्री यानी उन्होंने मोर्चा संभाल रखा है। इसके बाद इंदौर में भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के मामले ने मोहन-कैलाश के बीच मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया था। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय का लगातार कैबिनेट बैठकों में अनुपस्थित रहना यही संकेत देता रहा कि कैलाश का मन भागीरथपुरा आपदा से ज्यादा सरकार यानि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से खिन्न है। और इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय भी लगातार मानसिक रूप से परेशान नजर आते रहे। इंदौर में एक पत्रकार वार्ता के बाद। उनके मुंह से निकला अलोकतांत्रिक शब्द ‘घंटा’ ने उन्हें पूरे देश में चर्चा में ला दिया था। इसके बाद मध्य प्रदेश विधान सभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को लेकर एक विवादित टिप्पणी ने भी कैलाश को बैकफुट पर धकेला तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनकी तरफ से माफी मांग कर शायद यही संदेश दिया था कि उन्हें भी ऐसे विवादित शब्दों का प्रयोग पसंद नहीं है। और उसके ठीक बाद, सत्र की समाप्ति पर संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर सीएम सचिवालय की कार्यशैली पर सवाल उठाना शायद कैलाश विजयवर्गीय द्वारा सरकार से उनकी खिन्नता का खुला प्रदर्शन ही माना गया था।
यह संकेत साफ है कि केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में नये चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़वानी जिले मैं नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट में जहां सर्वाधिक विवादित चेहरा बनकर सामने आए विजय शाह अग्रिम पंक्ति में नजर आए, वहीं कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल की अनुपस्थिति ने हर व्यक्ति को यह सोचने पर मजबूर किया कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्या इस संकेत का असर देखने को मिलने वाला है। या फिर यह माना जाए कि मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। किसी को केंद्र में भेजा जा सकता है या फिर मध्य प्रदेश में ही भूमिका में बड़ा बदलाव नजर आ सकता है।
होली के ठीक पहले बड़वानी में कृषि कैबिनेट का आयोजन कर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बड़वानी और आसपास के सात जिलों के किसानों को बड़े-बड़े तोहफे दिए हैं। इसके जरिए किसानों के चेहरे पर खुशियाँ बिखेरने की पूरी कोशिश की गई है। और देखने वाली बात यह भी है कि होली के दौरान चंद्रग्रहण पड़ रहा है जो अपना असर दिखा सकता है। इसका मध्य प्रदेश में राजनैतिक परिदृश्य में क्या असर दिखाता है,यह आने वाला समय बताएगा। किसके हिस्से में खुशी आती है और किसकी खुशियों पर ग्रहण लगता है, यह
समय के साथ सामने आने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट से पहले नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भीलटदेव मंदिर में पूरी कैबिनेट के साथ पूजा-अर्चना कर सभी की समृद्धि की कामना की गई है। पर सवाल यही है कि इस कैबिनेट बैठक में कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल का न होना क्या संकेत दे रहा है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




