
MP News: एक साल में घट गए 3 हजार 881 शासकीय कर्मचारी
भोपाल: पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रदेश की जनता के जीवन में आनंद बढ़ाने सरकार ने आनंद विभाग का गठन तो कर दिया लेकिन इस विभाग में पूरे प्रदेश में मात्र एक कर्मचारी है जिसके जिम्मे पूरे प्रदेश की जनता के जीवन में आनंद लाने की जिम्मेदारी है। यही हाल पर्यावरण और पर्यटन विभाग के है। पर्यावरण में केवल सात और पर्यटन में केवल आठ नियमित शासकीय कर्मचारी पूरे प्रदेश में है। जिस औद्योगिक नीति निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग पर प्रदेश में निवेश लाने और उद्योगों की स्थापना कर रोजगार बढ़ाने की जिम्मेदारी है उसमें मात्र बीस नियमित शासकीय कर्मचारी है।
पूरे मध्यप्रदेश में पिछले एक साल में 3 हजार 881शासकीय कर्मचारी कम हो गए है।
मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में कुल 6 लाख 6 हजार 876 नियमित शासकीय कर्मचारी थे। उनकी संख्या अब बढ़कर 6 लाख 7 हजार 158 हो गई है। राज्य के सार्वजनिक उपक्रम एवं अर्द्ध शासकीय संस्थानों में वर्ष 24 में 33 हजार 942 कर्मचारी थे जिनकी संख्या वर्ष 2025 में घटकर 30 हजार 495 रह गई है। नगरीय निकायों में जहां पहले 29 हजार 966 कर्मचारी थे उनकी संख्या अब घटकर 29 हजार 516 रह गई है। ग्रामीण स्थानीय निकायों में कर्मचारियों की संख्या 5 हजार 422 से घटकर 5 हजार 384 रह गई है। विकास प्राधिकरण एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में कर्मचारियों की संख्या 582 से घटकर 484 रह गई है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में पहले जहां 4 हजार 490 कर्मचारी थे वहीं अब इनकी संख्या घटकर 4 हजार 360 रह गई है। इस तरह प्रदेश में कुल कर्मचारी वर्ष 2024 में 6 लाख 81 हजार 278 थे जो अब 6 लाख 77 हजार 397 रह गए है।
*तीस फीसदी ही है महिला कर्मचारी-*
पूरे प्रदेश में प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक नियमित रुप से कार्यरत कुल 4 लाख 24 हजार 617 याने 69.94 फीसदी पुरुष कर्मचारी है वहीं महिला कर्मचारियों की संख्या मात्र एक लाख 82 हजार 541 याने 30.06 प्रतिशत ही है। कुल नियमित कर्मचारियों की संख्या 6 लाख 7 हजार 158 है वहीं नियमित कर्मचारियों के अलावा कार्यभारित कर्मचारी 14 हजार 318, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले देनिक वेतन भोगी कर्मचारी 62 हजार 596 तथा कोटवार और संविदा कर्मचारियों की संख्या क्रमश: 32 हजार 706 और 1 लाख 28 हजार 19 है।
कई विभागों में कई श्रेणियों में एक भी कर्मचारी नहीं-
कई प्रमुख विभागों में कर्मचारियों की संख्या शून्य है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग,पर्यावरण विभाग, पर्यटन विभाग, पर्यावण विभाग, नवीन एवं नवकणीय उर्जा, औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग, लोक सेवा प्रबंधन विभागों में प्रथम श्रेणी का एक भी कर्मचारी नहीं है। वहीं आनंद विभाग और पर्यटन विभाग में द्वितीय श्रेणी का एक भी कर्मचारी नहीं है। आनंद विभाग में तृतीय श्रेणी का एक भी कर्मचारी नहीं है। विमुक्त घुमक्कड़, अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातिय कल्याण विभाग और आनंद विभाग में चतुर्थ श्रेणी का एक भी कर्मचारी नहीं है।
उद्योग विभाग में पूरे प्रदेश में बीस कर्मचारी-औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पर प्रदेश में निवेश लाने, उद्योगों की स्थापना और रोजगार बढ़ाने की जिम्मेदारी है पर वहां पूरे प्रदेश में मात्र बीस कर्मचारी है। प्रदेश की करोड़ों जनता के जीवन में आनंद लाने के लिए सरकार ने पूरे प्रदेश में मात्र एक कर्मचारी को जिम्मेदारी दे रखी है। पर्यावरण की चिंता करने के लिए केवल सात कर्मचारी पूरे प्रदेश में है। पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख विभाग में जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी जुड़ी है वहां केवल आठ कर्मचारी है।विमुक्त घुमक्कड़ और अर्द्ध घुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग में केवल पांच कर्मचारी काम कर रहे है





