Kailash Vijayvargiya-Prahlad Patel: मन मिले या अब तक दूरी-मजबूरी बरकरार ! निगाहें आज शाम की कैबिनेट बैठक पर…

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Kailash Vijayvargiya-Prahlad Patel: मन मिले या अब तक दूरी-मजबूरी बरकरार ! निगाहें आज शाम की कैबिनेट बैठक पर…

Bhopal: भोपाल मंत्रालय में आज मंगलवार की शाम मोहन-मंत्रिपरिषद कुछ प्रशासकीय फैसलों के लिए बैठ रही है। मगर इस बार निगाहें बैठक के एजेंडे से ज्यादा उन मंत्रियों के ऐजेंडे पर है,जो काफी समय से कैबिनेट समेत कई शासकीय आयोजनों से भी दूरी बनाकर चल रहे हैं। सभी की निगाहें इस बात को लेकर है कि क्या आज शाम कैबिनेट बैठक में प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता- कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल बैठक में मौजूद रहेंगे या नदारद ?

ये नजरें सिर्फ सरकार के बाहर से निगाह रखने वालों की ही नहीं,बल्कि सरकार के भीतर बैठे लोगों की भी हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों मंत्री पिछली 2 कैबिनेट बैठक में गायब रहे थे ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे तीसरी लगातार बैठक में शामिल होते हैं या नहीं? बता दे कि इन दोनों वरिष्ठ मंत्रियों ने मोहन यादव की महत्वाकांक्षी डेस्टिनेशन बड़वानी कैबिनेट बैठक से दूरी बनाकर राजनीतिक सनसनी पैदा कर दी थी। यह सब भी तब हुआ था,जब इसके कुछ ही दिन पहले इन दोनों मंत्रियों ने दिल्ली में भाजपा के सूत्रधार व केंद्रीय मंत्री अमित शाह से अलग अलग भेट की थी। दोनों के शाह से मिलने के पहले सीएम मोहन यादव ने भी शाह से बात की थी। इस बातचीत के क्रम से यही अंदाजा लगा कि मप्र विधानसभा के बजट सत्र में उभरी तल्खियों व साफ नजर आने लगी दरारों के पाटने के लिए दिल्ली में शाह ने तीनों पक्षों को अलग-अलग सुना था।

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बहरहाल, अंदाजा लगा था कि अब तीनों के बीच सबकुछ ठीक हो जाएगा,लेकिन इसके बाद हुई बड़वानी व भोपाल मंत्रालय की कैबिनेट बैठक में दोनों मंत्री नहीं आए। अलबत्ता एक नये घटनाक्रम के तहत बीते सप्ताह जब सीएम यादव दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिहं चौहान से मिलने पहुंचे तो उनके साथ प्रहलाद पटेल भी थे।

खास बात यह कि मोहन व शिवराज की भी यह मुद्दत बाद की मुलाकात थी। इसके कई आफिशियल एजेंडे भी थे और अनआफिशियल भी। हालांकि अहम बात यह है कि दोनों के बीच भी कई प्रशासकीय व सियासी मसलों पर दूरी बढ रही थी (या है)! खैर इस दिल्ली बैठक के एक दिन पहले ही दिल्ली में ही कैलाश विजयवर्गीय की भी मोहन यादव से एकांत में गुफ्तगु हुई थी। दोनों एक समारोह मे मिले थे। माना जाता है कि इन ‘तीनों पक्षों’ की अपने स्तर पर मोहन-सरकार के साथ कुछ शिकायतें व असहजता है।

यही वजह है कि आज शाम की कैबिनेट बैठक में कैलाश-प्रहलाद की मौजूदगी एक घटना की तरह बनती जा रही है। राजनीतिक दृष्टि से खास बात यह है कि दोनों मौजूद रहते हैं तो भी यह नई घटना होगी और नहीं रहते हैं तो भी घटना ही होगी !