भोपाल रेलवे पर नई आधुनिक लांड्री बनकर तैयार, ट्रेनों में चादर तकिए गंदे मिलने की शिकायतें होगी दूर

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भोपाल रेलवे पर नई आधुनिक लांड्री बनकर तैयार, ट्रेनों में चादर तकिए गंदे मिलने की शिकायतें होगी दूर

भोपाल। रेल यात्रियों को जल्द ही गंदे चादरों और तकियों की शिकायतों से निजात मिलने वाली है। रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास बनी पुरानी लान्ड्री को हटाकर लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से 31,161 वर्ग फुट क्षेत्र में नई और अत्याधुनिक लान्ड्री लगभग बनकर तैयार है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस लान्ड्री का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसे मई माह से शुरू करने की बात कही जा रही है। भोपाल स्टेशन पर बनाई जा रही नई मेकेनाइज्ड लान्ड्री अब पूरी तरह आधुनिक और व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत काम करेगी। यहां लिनन (चादर, तकिया कवर, तौलिए और कंबल) की धुलाई और पैकिंग पूरी तरह मशीनों के जरिए होगी, जिससे यात्रियों को साफ-सुथरा लिनन उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही मशीनों की संख्या भी बढ़ेगी। इससे ट्रेनों में गंदे चादर व तकिए की शिकायतों का समाधान होगा।

0 पुरानी लान्ड्री की तुलना में अधिक क्षमता

पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि साल 2017 में बनी पुरानी लान्ड्री में रोजाना करीब 8 हजार चादरों की धुलाई होती थी। नई लान्ड्री के शुरू होने के बाद क्षमता बढ़कर 12 हजार चादरों की धुलाई प्रतिदिन हो जाएगी। यहां आधुनिक मशीनों की मदद से केवल बेडशीट ही नहीं, बल्कि कंबल, तकिए के कवर की भी सफाई की जाएगी। नई लान्ड्री में प्रतिनिदिन लगभग छह हजार पैकेट तैयार किए जाएंगे। पुरानी लान्ड्री में प्रतिदिन लगभग चार हजार पैकेट तैयार किए जा रहे है, जिनमें एक पैकेट में दो बेडशीट और एक नैपकिन शामिल है। इसके संचालन में रोजाना लगभग 9,78,530 लीटर पानी की खपत हो रही है। वहीं, लान्ड्री में हर महीने करीब 4,190 यूनिट बिजली खर्च होने का अनुमान है।