Significance of Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्र और जवारे का महत्त्व: आइये जानते हैं बाड़ी क्यों बोई जाती है ?

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Significance of Chaitra Navratri:चैत्र नवरात्र और जवारे का महत्त्व: आइये जानते हैं बाड़ी क्यों बोई जाती है ?

विकास शर्मा 
चैत्र माह के आते ही गाँव के भीतर एक खास तरह की उर्जा का आभास होने लगता है। गांव में जवारे के साथ साथ परिवार के नन्हे मुन्ने बच्चों के मुंडन संस्कार की तैयारियाँ और भाग दौड़ भी देखी जा सकती है। बेशक हम शहर में रहने लगे हैं, लेकिन गांव के संस्कार आज भी हमारे ह्रदय में विद्यमान हैं। नवरात्र के अवसर पर हम सभी आदि शक्ति माँ भवानी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि का आशीर्वाद बनाये रखें और हम सभी परिवार जनो को एकसूत्र में बांधे रखे।
काळमुखी गांव की मातामांय की वाड़ी
काळमुखी गांव की मातामांय की वाड़ी
नवरात्रि का त्यौहार कुल की एकता और अखंडता के निमित्त मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह त्यौहार है जोड़ने का, रूठों को मनाने का और साथ एक दुसरे का सुख दुःख बांटकर साथ साथ जीवन जीने की भावना विकसित करने का । इस समय खासकर अष्टमी के दिन कुल और कुनबे के सभी सदस्य मातारानी के सामने एकत्रित होकर विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और अपनी शक्ति को संगठित कर नव चेतना ग्रहण करते हैं। इस तरह अदि शक्ति माँ भवानी हमें संगठन और शक्ति का वरदान देती है।
लेकिन इसके साथ साथ जवारे या घट स्थापना इन शारदीय नवरात्र को विशेष बना देते हैं। बहुत से हिन्दू परिवारों में जवारे के साथ ही घर के नन्हे मुन्ने बच्चो का मुंडन संस्कार किया जाता है जिसे झालर उतारना भी कहते हैं। वे बच्चे जिनका मुंडन संकार शेष है उनका मुंडन होना जवारे में निर्धारित रहता है । बड़े बुजुर्ग कहते है कि शक्ति की उपासना बहुत ही विधि-विधान से करनी चाहिए। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में जो भी देवी मां की पूजा सच्चे मन से करता है उसे मां दोनों हाथों से आशीष प्रदान करती हैं। नवरात्रि पर शक्ति के 9 स्वरूपों की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि चैत्र प्रतिपदा के दिन ही आदि शक्ति माँ भवानी का भी अवतरण हुआ था अतः इस तिथि को सनातनियों का प्रथम त्यौहार होता है।