सांस्कृतिक गौरव फल फूल रहा है, मध्यप्रदेश को सुशासन और निवेश की जरूरत…

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सांस्कृतिक गौरव फल फूल रहा है, मध्यप्रदेश को सुशासन और निवेश की जरूरत…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव का यह तीसरा जन्मदिन 25 मार्च को कुछ खास बना रहा है। राजधानी भोपाल में जन्मदिन की शुभकामनाएं देते होर्डिंग्स यह अहसास करा रहे हैं कि मोहन यादव की लोकप्रियता और उनके प्रशंसक लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पार्टी में भी उनका कद लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा मोहन यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देना एक नजरिए से औपचारिक नजर आ सकता है लेकिन दूसरा नजरिया यही साबित करता है कि मोहन की सोच और विकसित मध्यप्रदेश बनाने का उनका नजरिया अब उन्हें सत्ता और संगठन के शीर्ष चेहरों को रास आने लगा है। एक साधक के रूप में अपनी साधना में लीन मोहन शायद उन्हीं संकल्पों को पूरा करने में जुटे हैं, जिनसे सुशासन और निवेश मध्यप्रदेश की ताकत बनकर एक नया इतिहास रच सकें। सम्राट विक्रमादित्य के त्वरित न्याय के सिद्धांत को शासन प्रणाली में लागू किया जा रहा है जिसका एक उदाहरण हाल ही में गुना एसपी और सीधी कलेक्टर को हटाने के फैसले में देखा जा सकता है। मोहन के मुख्यमंत्री बनने के बाद मध्य प्रदेश का नक्सल मुक्त होना भी यह साबित कर रहा है कि प्रदेश की उपलब्धियों का एक नया खाता अब आकार ले रहा है।

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार फिलहाल करीब ढाई साल की होने जा रही है। और लोगों की उम्मीद है कि प्रदेश कर्ज के अभिशाप से मुक्त हो। लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना मोहन की इच्छा और संकल्प है। लेकिन मंजिल के रास्ते को फिलहाल चुनौती भरा ही माना जा सकता है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य आज सुशासन, विकास, निवेश, सांस्कृतिक विरासत और जन कल्याण के एकीकृत मॉडल के रूप में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिली है। राज्य को “चीता राज्य” के रूप में भी जाना जाता है और वर्तमान में चीतों की संख्या 53 से अधिक हो गई है। क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने में सफलता मिली है, जो शांति और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सिंहस्थ-2028 का आयोजन न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है, जिसमें 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर नए घाटों का निर्माण किया जा रहा है। उज्जैन में महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में कई नए और स्थायी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य की न्याय प्रणाली और सुशासन का जिक्र करते हुए कहा कि बेताल छस्सी और 32 पुतलियों जैसी सम्राट विक्रमादित्य की वीरता, न्याय और उदारता की कहानियां आज भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं। राज्य सरकार सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन के सिद्धांतों से प्रेरित होकर कार्य कर रही है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा सुशासन के लिए पुरस्कार भी दिए जाएंगे। राज्य में त्वरित न्याय के उनके सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “न्याय में देरी न्याय के साथ अन्याय है” और सुशासन के लिए कड़े फैसले लेना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जा रही है और अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 को “उद्योग और रोजगार वर्ष” के रूप में मनाया गया। राज्य सरकार ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लागू की हैं। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योगपतियों को डीबीटी (डेटाबेस टैक्स) सब्सिडी हस्तांतरित की जा रही है। मध्य प्रदेश को निवेश केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उद्योग और रोजगार में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत से अधिक को लागू किया जा चुका है।

निश्चित तौर से मोहन यादव के मुख्यमंत्री के रूप में करीब ढाई साल का यह कार्यकाल अलग-अलग नजरिए से देखा और समझा जा सकता है, लेकिन एक नई सोच का मध्यप्रदेश फिलहाल आकार लेने की तरफ आगे बढ़ रहा है। यही माना जा सकता है कि मुख्यमंत्री की सोच में यदि सांस्कृतिक गौरव, सुशासन और निवेश की गहरी छाप है। प्रदेश में सांस्कृतिक गौरव फल फूल रहा है और जरूरत सुशासन और निवेश की है… नए मध्य प्रदेश का निर्माण करने में इनकी ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।