
Passenger Safety Just Got a Boost : नागदा-गोधरा खंड पर ‘कवच’ प्रणाली लागू!
मंडल रेल प्रबंधक अश्विन कुमार ने हरी झंडी दिखाकर कवच युक्त लोकोमोटिव को किया रवाना!
भारतीय रेल के ‘शून्य दुर्घटना’ लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: अश्विन कुमार
Ratlam : यात्री सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय रेल ने अपने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ को दिल्ली-मुंबई उच्च घनत्व नेटवर्क के नागदा-गोधरा खंड पर सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। 30 मार्च 2026 का दिन पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के लिए ऐतिहासिक बन गया। इस दिन मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने ‘कवच’ प्रणाली से सुसज्जित लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लोकोमोटिव के प्रस्थान के साथ ही नागदा-गोधरा रेलखंड पर ‘कवच’ प्रणाली लागू हो गई और इसके साथ ही नागदा- गोधरा रेल खंड रतलाम मंडल का पहला रेलखंड बन गया, जहां यह कवच जैसी उन्नत सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह कार्यरत है।
इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रास्ट्रक्चर) अक्षय कुमार, अपर मंडल रेल प्रबंधक (ऑपरेशन) कुंजीलाल मीना सहित मंडल के सभी शाखाधिकारी अन्य अधिकारी तथा संबंधित विभागों के बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहें। इस उपलब्धि का श्रेय पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार के कुशल नेतृत्व, संकेत एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों वरिष्ठ मंडल संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर (समन्वयक) आर एस मीना तथा उप मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर/कार्य अभिषेक मिश्रा के मार्गदर्शन और सभी अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास को जाता है। विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने भी इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित ‘कवच’ एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली है, जिसे ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने और संचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह प्रणाली सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 जैसे उच्चतम सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रमाणित है। यह नया कवच-सुसज्जित रेल खंड कुल 224 रूट किलोमीटर लंबा है, जिसमें 154 किलोमीटर रतलाम मंडल और 70 किलोमीटर वडोदरा मंडल के अंतर्गत आते हैं।
रतलाम मंडल में इसका कार्यान्वयन गोधरा-मंगल महुड़ी तथा पंच पिपलिया- नागदा खंडों में किया गया हैं जबकि वडोदरा मंडल में यह वडोदरा-गोधरा खंड को कवर करता है। ‘कवच’ प्रणाली के लिए व्यापक अधोसंरचना विकसित की गई है। जिसमें 40 मीटर ऊंचाई के 41 लैटिस टॉवर, 39 स्टेशन कवच यूनिट्स, 606 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 6000 आरएफआईडी टैग्स और 90 लोकोमोटिव में स्थापित कवच यूनिट्स शामिल हैं। इनमें से रतलाम मंडल में 28 टॉवर, 27 स्टेशन यूनिट्स, 310 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर और 4000 आरएफआईडी टैग्स स्थापित किए गए हैं।

जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि कमीशनिंग से पहले इस प्रणाली का विभिन्न स्तरों पर कठोर परीक्षण और सत्यापन किया गया। पूरे खंड में व्यापक फील्ड ट्रायल्स के साथ ट्रेन संख्या 19819/19820 और 19309/19310 पर 9000 किलोमीटर से अधिक यात्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इसके बाद स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रणाली को प्रमाणित किया गया। इस उपलब्धि के साथ पश्चिम रेलवे में ‘कवच’ का कुल विस्तार 659 रूट किलोमीटर तक पहुंच गया है, जो उन्नत सुरक्षा तकनीकों के उपयोग में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।गोधरा–नागदा खंड के शेष 78 किलोमीटर पर कवच प्रणाली लागू करने का कार्य जारी है, जिसे आगामी तीन महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरे कार्य के पूर्ण होने के बाद, दिल्ली-मुंबई उच्चतर घनत्व नेटवर्क मार्ग पर रतलाम मंडल का गोधरा-नागदा खंड पूरी तरह स्वचालित सिग्नलिंग और कवच प्रणाली से सुसज्जित हो जाएगा, जिससे सुरक्षा और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
कवच’ प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं में सिग्नल पासिंग एट डेंजर की रोकथाम, ओवरस्पीडिंग को नियंत्रित करने हेतु स्वचालित ब्रेकिंग, लोको केबिन में रियल-टाइम सिग्नल जानकारी, आमने-सामने एवं पीछे से होने वाली टक्करों की रोकथाम, गति प्रतिबंधों का पालन, लेवल क्रॉसिंग पर चेतावनी प्रणाली तथा आपात स्थिति में एसओएस संदेश प्रेषण शामिल हैं। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार ने कहा कि ‘कवच’ भारतीय रेल के ‘शून्य दुर्घटना’ लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जो मानवीय त्रुटियों को कम कर रियल-टाइम सुरक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सफल परीक्षण और स्वतंत्र प्रमाणन इस प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रमाणित करते हैं और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं!





