राज-काज: नरोत्तम की लाटरी या राम निवास जैसे होंगे निराश….

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राज-काज: नरोत्तम की लाटरी या राम निवास जैसे होंगे निराश….

* दिनेश निगम ‘त्यागी’

  नरोत्तम की लाटरी या राम निवास जैसे होंगे निराश….

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– प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के खिलाफ कोर्ट का फैसला कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा झटका है। राजेंद्र पर लगे इस ग्रहण से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की लाटरी खुल सकती है। विधानसभा सचिवालय ने फुर्ती दिखाते हुए भारती की सदस्यता समाप्त कर दी है। इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के राम निवास रावत काे विधायक घोषित कर दिया था। फैसले से राम निवास के समर्थकों ने मिठाईयां बांट कर जश्न मनाया था। बाद में राम निवास की खुशी सिर्फ मुंह मीठा करने तक रह सकी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मल्होत्रा की विधायकी बहाल कर दी। इधर राजेंद्र भारती के खिलाफ फैसले और कार्रवाई से नरोत्तम मिश्रा के खेमे में जश्न का माहौल है। राजेंद्र ने नरोत्तम को ही दतिया में हराया था। दिल्ली की कोर्ट ने एक घोटाले के आरोप में भारती को तीन साल की सजा सुनाते हुए उन्हें जमानत देकर हाईकोर्ट में अपील के लिए 60 दिन का समय दे दिया है। यदि हाईकोर्ट ने दिल्ली की अदालत के फैसले पर रोक लगा दी तो फिलहाल राजेंद्र की विधायकी बच सकती है और नरोत्तम के हाथ राम निवास जैसी निराशा। पर यदि राहत न मिली तो नरोत्तम के लिए यह संजीवनी का काम कर सकता है। हालांकि उन्हें उप चुनाव लड़ कर जीतना होगा।

 फिर भी भाजपा के लिए तीसरी सीट आसान नहीं….

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– कांग्रेस के लिए संकट के मौजूदा दौर में दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से पार्टी की चिंता बढ़ गई है। वजह मई में संभावित राज्यसभा के चुनाव भी हैं। वर्तमान मे कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं। इनमें से विजयपुर के मुकेश मल्होत्रा के पास वोट डालने का अधिकार नहीं है। अब राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है। यदि इन्हें हाईकोर्ट से राहत न मिली तो कांग्रेस के 63 विधायक बचेंगे। बीना की निर्मला सप्रे पहले से भाजपा के पाले में हैं। उनके कम होने पर कांग्रेस के पास बचे कुल 62 विधायक। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। इस लिहाज से कांग्रेस के पास अब भी एक सीट के लिए पर्याप्त संख्या है लेकिन भाजपा नेतृत्व आपरेशन लोटस चला कर यदि कांग्रेस के कुछ विधायकों को अनुपस्थित कराने या क्रास वोटिंग कराने में कामयाब हो गया तो कांग्रेस की राज्यसभा सीट खतरे में पड़ सकती है। इसके लिए भाजपा की नजर कांग्रेस के कई असंतुष्ट विधायकों पर है। कांग्रेस में लंबे समय तक रहे सुरेश पचौरी को तीसरा राज्यसभा प्रत्याशी बना कर भी भाजपा दांव खेल सकती है। यह भी संभव है कि नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतार कर ब्राह्मण कार्ड खेला जाए। बहरहाल, कांग्रेस की यह सीट खतरे में तो है लेकिन भाजपा के लिए इतनी आसान भी नहीं।

  इस मसले पर भाजपा ने दे दी कांग्रेस को भी मात….!

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– अब तक कांग्रेस ही संगठन की जंबो टीम बनाने को लेकर चर्चित रहती थी। इसके विपरीत भाजपा की टीम संतुलित और सीमित होती थी। पहली बार प्रदेश भाजपा मीडिया विभाग की घोषित टीम को देख कर लगता है कि उसने कांग्रेस को भी मात दे दी है। भाजपा मीडिया विभाग की टीम में 89 नेताओं को शामिल किया गया है। इसमें 33 प्रदेश प्रवक्ता, 41 मीडिया पैनलिस्ट और 9 प्रदेश सह मीडिया प्रभारियों के साथ 6 मीडिया विभाग के सदस्य नियुक्त किए गए हैं। भाजपा नेतृत्व मीडिया विभाग में इतने पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सकता है, ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसीलिए यह जंबो टीम राजनीतिक हलकों में चर्चा के केंद्र मेंं है। हालांकि बड़ी टीम बना कर पार्टी नेतृत्व ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पहला यह कि नियुक्तियों के इंतजार में बैठे ज्यादा नेताओं को संतुष्ट करने की कोिशश की गई है। दूसरा, इनमें कई ऐसे नेता हैं जो निगम-मंडलों, आयोगों के साथ मंत्रिमंडल में शामिल होने के दावेदार थे। मीडिया विभाग में पद मिलने के साथ उनकी दावेदारी स्वत: समाप्त हो गई। प्रदेश के 10 विधायकों को भी प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया है। तीसरा, पार्टी ने नियुक्तियों में प्रदेश के हर क्षेत्र, वर्ग का ध्यान रख कर संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि ऐसा पहली बार हुआ जब भाजपा ने सभी को साधने के लिए संगठन के पद रेवड़ियों की तरह बांटे हैं।

  लीजिए, फिर नाथ के भाजपा में जाने की अटकलें….

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– जब मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण देश में एलपीजी संकट के हालात हैं। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रखा है। ‘नरेंदर भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के एक बयान ने पार्टी के अभियान की हवा निकाल दी है। इस बयान के निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं। कमलनाथ और उनके बेटे में से किसी के भाजपा में जाने की अटकलें लगने लगी हैं। कमलनाथ ने पार्टी लाइन से अलग हट कर कह दिया कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है। वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी है और एलपीजी की कमी का माहौल बना दिया गया। अर्थात कमलनाथ ने वह कह दिया जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर नीचे तक भाजपा का हर नेता बोल रहा है। माहौल खराब करने का आरोप कांग्रेस पर लगाया जा रहा है। कमलनाथ के बयान से भाजपा खुश है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कमलनाथ ने एलपीजी को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नेतृत्व से संपर्क को लेकर कमलनाथ की निष्ठा पहले से ही संदिग्ध है। इसीलिए मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने कमलनाथ को कोई जवाबदारी भी नहीं सौंपी। इस बयान ने फिर उनकी निष्ठा संदिग्ध हो गई है।

  हर पल रंग बदलने वाली सप्रे ने फिर चौंकाया….

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– लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायक राम निवास रावत और कमलेश शाह भले इस्तीफा देकर उप चुनाव का मुकाबला कर चुके हों लेकिन राजनीति में रह कर कितने रंग बदले जा सकते हैं, इसका जीता जागता उदाहरण हैं बीना विधायक निर्मला सप्रे। इन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री और अन्य भाजपा नेताओं के साथ उनकी अनेक तस्वीरें अखबारों में छपीं, न्यूज चैनलों में दिखाई पड़ी और डॉ यादव के अधिकारिक साेशल मीडिया के एकाउंट में भी। वे भाजपा कार्यालय जाकर पार्टी की बैठकों में भी शामिल हुईं लेकिन उन्होंने कांग्रेस भी नहीं छोड़ी। हर कोई जानता है कि वे अब भाजपा में हैं, कांग्रेस में नहीं। लिहाजा, निर्मला की सदस्यता दलबदल कानून के तहत समाप्त करने को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहले विधानसभा अध्यक्ष और इसके बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मजेदार यह है कि 31 मार्च को हाईकोर्ट में हुई पेशी में सप्रे ने कह दिया कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ी ही नहीं, इसलिए सदस्यता समाप्ति का सवाल ही पैदा नहीं होता। हाईकोर्ट ने सिंघार से कहा कि 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत होकर सबूत पेश करिए। इसके साथ हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 20 अप्रैल निर्धारित कर दी। निर्मला का राजनीतिक चरित्र कैसा है, आप ही तय करिए।