
जब भी जरूरत हो हमें समाज के साथ खड़े होना चाहिए-बावीसा ब्राह्मण समाज की साहित्यिक गोष्ठी में डॉ स्वाति तिवारी
आदि गौड़ बावीसा ब्राह्मण समाज प्रतिभा मंच की साहित्यिक गोष्ठी सम्म्पन्न
इंदौर .आदि गौड़ बावीसा ब्राह्मण समाज प्रतिभा मंच की प्रथम मासिक साहित्यिक गोष्ठी समाज के प्रतिष्ठित साहित्यकार रमेश शर्मा के निवास पर समाज की वरिष्ठ सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ स्वाति तिवारी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित की गई .कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रमेश शर्मा ने की एवं चर्चित भजन गायिका, लेखिका श्रीमती प्रभा तिवारी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रही .इस आयोजन में साहित्य की सभी विधाओं में एवं हिंदी के साथ संस्कृत ,मालवी और निमाड़ी में भी रचनाएं प्रस्तुत की गई .सारस्वत अतिथि श्री अशोक द्विवेदी ने सस्वर अपनी रचना ‘चाँद की पालकी’ एवं माता सीता की व्यथा सुनाई .


इस अवसर पर प्रतिभा मंच की सचिव पीयूषा शुक्ला द्वारा कौन सा गीत सुनाऊं मैं रचना प्रस्तुत की गई । डॉ.आरती दुबे के मधुर स्वर में स्त्री के संघर्ष पर गंभीर भाव रचना और निमाड़ी भाषा में ‘कोई ख केजो मत’ गीत की सुंदर प्रस्तुति दी .रंजना शर्मा सुमन ने हिंदी और किताबों की महता पर कविता का पाठ किया.।

काव्यगोष्ठी में मन के गंभीर भावों को झगझोर देने वाली ग़ज़ल आदरणीय ओम प्रकाश जोशी अपनी लोकप्रिय कविता’मैं होटल में कप धोता हूँ’ के माध्यम से बाल श्रमिकों की पीड़ा का मनोभाव प्रस्तुत किया एवं विकास जोशी ने सस्वर प्रस्तुत की .वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र जोशी ने हिंदी और संस्कृत में प्रभावी रचनापाठ किया.

सुषमा व्यास के स्वर में रोटी बेलती स्त्रियों के मन के भावों को बहुत सुंदर भाव से प्रस्तुत किया प्रणव श्रोत्रिय द्वारा लघु कथा वाचन के माध्यम से बचपन की खट्टी मीठी यादों को याद किया गया साथ ही कार्यक्रम का व्यवस्थित संचालन भी डॉ.श्रोत्रिय ने किया.

प्रतिभा मंच के मार्गदर्शक आदरणीय श्रीधर मुंशी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की.कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार योगेंद्र जोशी ने आगामी गोष्ठियों के लिए चर्चा की . इस अवसर पर कार्यक्रम की विशेष अतिथि श्रीमती प्रभा तिवारी ने सभी रचनाओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए अंत में अपनी कविता और गीत प्रस्तुत किया .

मुख्य अतिथि डॉ.स्वाति तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा ,जन्म के बाद प्रत्येक व्यक्ति पर तीन ऋण होते हैं .माता -पिता का ऋण ,गुरुजनों का ऋण और अपने समाज का ऋण .मनुष्य ताउम्र इन ऋणों से मुक्त नहीं हो सकता लेकिन उसे हमें कर्मों से इन्हें लौटना चाहिए .समाज जब भी हमें याद करें ,समाज के हित में हमारी जरूरत हो हमें समाज के साथ खड़े होना चाहिए .समाज हमें एक स्पेस देता है ,एक पहचान देता हैं .और समाज की यह पहचान हमारे साथ होती हैं ,इसलिए समाज की भावी पीढ़ी के लिए भी हमें मार्ग प्रशस्त करना चाहिए ,इसके साथ ही उन्होंने अपनी चर्चित कहानी बंद मुठ्ठी का पाठ किया .इस अवसर पर तिथियों का स्वागत श्रीमती शर्मा एवं स्वाति शर्मा ने किया .
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