
मोहन को अलग पंक्ति में खड़ा करेगा यूसीसी वाला मध्यप्रदेश…
कौशल किशोर चतुर्वेदी।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर तैयारियाँ शुरू हो गयी हैं। वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 अप्रैल 2026 को कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों के साथ औपचारिक चर्चा में यूसीसी को लेकर उत्तराखंड और गुजरात के मॉडल का अध्ययन करने की बात कही है। इसके बाद राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इससे एक बात साफ हो गई है कि मध्यप्रदेश जल्दी ही उन गिने-चुने राज्यों में शुमार हो जायेगा, जहाँ केन्द्र की मंशा के अनुरूप यूसीसी अस्तित्व में होगा। और इसके साथ ही एक बात और साफ हो रही है कि यूसीसी वाला मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक अलग पंक्ति में खड़ा करने वाला साबित होगा।
प्रदेश में यूसीसी लागू करने से पहले उत्तराखंड और गुजरात के कानूनों का अध्ययन किया जाएगा। उत्तराखंड में जहां विवाह‑तलाक पंजीयन और लिव‑इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, वहीं गुजरात में सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए अलग‑अलग प्रावधान लागू किए गए हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि इन राज्यों के यूसीसी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद मोहन सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यूसीसी बिल को ला सकती है। और उसके बाद मध्यप्रदेश में मोहन यादव की तरफ वह सब निगाहें रहेंगी जो यूसीसी को पसंद करेंगी अथवा जो यूसीसी का विरोध करती नजर आएंगी। और इसके साथ ही मोहन और उनकी सरकार की लोकप्रियता में खास इजाफा भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभ चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में यूसीसी लागू करने की बात कही थी। पर चुनाव परिणाम के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान की जगह डॉ. मोहन यादव को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। और 2023 चुनाव के बाद अब करीब ढाई वर्ष का समय बीत चला है। ऐसे में अगर मोहन सरकार यूसीसी पर गंभीरता से विचार कर रही है तो इसे केन्द्रीय नेतृत्व की मंशा के मुताबिक ही आगे बढ़ाया गया कदम माना जा सकता है। हाल ही में असम में भी भाजपा की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एलान किया है कि चुनाव में जीत हासिल होते ही पहली कैबिनेट बैठक में यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया जाएगा। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने एलान किया था कि अगले पांच साल में देश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। और यह भी तय है कि इन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अगले लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र में भी यह बिल पारित कर मोदी सरकार अपना वादा पूरा करने से पीछे नहीं हटेगी। चाहे इसे भाजपा का एजेंडा माना जाए या फिर राष्ट्र को समान नागरिक संहिता में पिरोने की खास कवायद लेकिन मोदी सरकार को
आगामी चुनाव में इसका खास फायदा मिलने से भी कोई रोक नहीं सकता।
हालांकि मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फैसला सभी वर्गों को विश्वास में लेकर ही होना चाहिए। यूसीसी में किसी भी समाज, खासकर आदिवासी समुदाय का अपमान नहीं होना चाहिए। निश्चित तौर से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मध्य प्रदेश में आदिवासी कोड लागू करने की बात कर रहे हैं उस स्थिति में,आदिवासी समुदाय की भावनाओं के सम्मान के लिए, वह यूसीसी का विरोध करेंगे। वैसे भी विपक्ष की भूमिका और कांग्रेस का एजेंडा भी सिंघार को यूसीसी का विरोध करने के लिए प्रेरित करेगा। लेकिन यूसीसी में भी आदिवासी समुदाय न छेड़ने जैसा भाव पहले से शामिल है, इसलिए सिंघार के सामने विरोध करने जैसी नौबत शायद ही आए।
पर यह बात तय है कि राजनीतिक तौर पर भाजपा इसे अलग एंगल से हिन्दुत्व के एजेंडे के रूप में सामने रखने से भी नहीं चूकेगी। हिन्दुत्ववादी विधायक रामेश्वर शर्मा की बातों में यह देखा भी जा सकता है। उनका बयान है कि देश में लगातार जनसंख्या वृद्धि हो रही है और एक कौम 5 बीवी और 25 बच्चे पैदा करके आबादी का नया संकट खड़ा करना चाहते हैं। यूसीसी कानून लागू होने से इस संकट से भी निपटा जा सकता है। देश में सभी को समान शिक्षा चाहिए, समान रोजगार चाहिए, समान रूप से योजनाओं का लाभ चाहिए तो देश में सबके लिए समान कानून भी होना चाहिए।
खैर समान नागरिक संहिता पूरे देश के लिए एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण कानूनों में भी एकरूपता प्रदान करने का प्रावधान करती है। वर्तमान में मुस्लिम और हिन्दू लॉ में तलाक और विवाह संबंधी कानून अलग-अलग हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 में भारत के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता का प्रावधान है। और समान नागरिक संहिता भाजपा के चुनावी एजेंडे में भी शामिल है। ऐसे में मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक खास तोहफा देकर अलग पंक्ति में शामिल होने वाले हैं… और मोदी-शाह के पसंदीदा मुख्यमंत्री के रूप में भी उनका कद और ज्यादा बढ़ेगा।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।




