ट्व‍िशा के परिवार का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा…

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ट्व‍िशा के परिवार का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

शादी के पाँच माह बाद ही संदिग्ध मौत और फिर अंतिम संस्कार के लिए 12 दिन का लम्बा इंतज़ार… शायद ट्विशा ने यह कल्पना भी नहीं की होगी। और ट्विशा के परिजनों ने भी विदा हुई बेटी के ऐसे अंत के बारे में सोचा नहीं होगा। शायद ट्विशा के परिजन संघर्ष नहीं करते तो न तो उसकी देह का दूसरी बार पोस्टमार्टम हो पाता और ना ही मामले की सीबीआई जांच की बात हो पाती और ना ही सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर 25 मई 2026 से केस की सुनवाई तय करता। पहले दिन एफआईआर के लिए संघर्ष करने वाला ट्विशा के परिवार के जज्बे को सैल्यूट किया जा सकता है कि कम से कम, उन्होंने हार न मानते हुए संघर्ष जारी रखा वरना ट्विशा की आत्मा को कभी शांति नहीं मिल पाती। मौत संदिग्ध है, इस बात में कहीं कोई शक नहीं है। यह आत्महत्या है या हत्या है, इसको लेकर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। लेकिन परिवार अगर संघर्ष नहीं करता तो शायद न्याय की उम्मीद कतई नहीं की जा सकती थी। और ऐसी कई संदिग्ध मौतें शायद बिना न्याय पाए ही

पंचतत्व में हो जाती हैं। पर अब इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि ट्विशा की मौत के मामले में न्याय होकर रहेगा और परिवार का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा।

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में दिल्ली एम्स की टीम ने 24 मई 2026 को दूसरा पोस्टमार्टम पूरा किया। इसके बाद भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई ने मुखाग्नि दी। वहीं इसके पहले परिजनों ने बेटी की विदाई में शामिल होने की भावुक अपील की थी। ट्विशा के शव पर लाल साड़ी डाली गई तो परिजन फूट-फूट कर रो पड़े। मौत के 12 दिन बाद ट्विशा की देह पंचतत्व में विलीन हुई। इन 12 दिनों ट्विशा का शव मोर्चरी में पड़ा रहा। सिस्टम से बेटी को न्याय दिलाने के लिए लड़ता परिवार भोपाल थाने की दहलीज से लेकर कोर्ट से जबलपुर हाईकोर्ट तक गया। सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। यह लड़ाई बहुत आसान नहीं थी, लेकिन जब किसी पिता के कलेजे का टुकड़ा क्रूर काल का शिकार बन जाता है, तो इसी तरह का संघर्ष परिजनों के हिस्से में आता है। और अधिकतर परिजन शक्तिशाली आरोपियों के सामने घुटने टेककर अन्याय सहन करने को मजबूर हो जाते हैं। पर ट्व‍िशा के परिवार ने हार नहीं मानी इसलिए ट्व‍िशा की मौत से पर्दा उठकर रहेगा, यह उम्मीद की जा सकती है।

ट्विशा शर्मा का 12 दिन बाद अंतिम संस्कार किया गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर एम्स दिल्ली की चार सदस्यीय टीम ने दूसरा पोस्टमार्टम पूरा किया, जिसके बाद पार्थिव शरीर को भदभदा विश्राम घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मोर्चरी के बाहर परिजन भावुक रहे। एम्स टीम और पुलिस ने सास गिरिबाला सिंह के घर जाकर स्पॉट वेरिफिकेशन भी किया। एम्स डॉक्टर्स की टीम भी साथ में मौजूद थी। पुलिस ने आत्महत्या वाली जगह का निरिक्षण किया।

वहीं ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 मई 2026 को सुनवाई की तारीख तय की है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल रहेंगे।

ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी ने सपनों के साथ जीवन की नई शुरुआत की थी, लेकिन उसे समय से पहले खो दिया गया। उन्होंने इसे सिर्फ अपने परिवार का नहीं, बल्कि समाज के लिए भी गहरा आघात बताया। गौरतलब है कि 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। परिवार ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष ने नशे की लत का दावा किया है। मामले में पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें पति को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल की चर्चित मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले को “एक युवा महिला की ससुराल में अप्राकृतिक मौत में कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक विसंगतियां” के तहत सूचीबद्ध किया गया है।

यही उम्मीद की जा सकती है कि एफआईआर दर्ज न होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने तक ट्विशा के मामले में न्याय की तरफ जो कदम आगे बढ़े हैं वह जल्दी ही अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे। और ट्विशा के परिजनों को न्याय मिलेगा तो मामले की सही स्थिति भी सबके सामने आएगी। और उम्मीद यही है कि अपने मन में सपनों को संजोए, किसी भी बेटी के साथ ऐसा कभी भी न हो कि शादी के पांच माह बाद ही उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर से उसके परिजनों को इस तरह का संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़े। यह तय है कि अब ट्व‍िशा के परिवार का संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा… और अगर कोई गुनहगार है, तो उसे सजा मिलकर ही रहेगी।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।