यह राजधर्म है… इधर अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा से सरोकार, उधर भोजशाला फैसले के लिए न्यायालय का आभार…

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यह राजधर्म है… इधर अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा से सरोकार, उधर भोजशाला फैसले के लिए न्यायालय का आभार…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

सोमवार 25 मई 2026 का दिन, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मध्यप्रदेश में दो महत्वपूर्ण आयोजनों में सहभागिता की। पहला आयोजन राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक बच्चों को छात्रवृत्ति वितरण का था। इसमें वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल के आग्रह पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भरोसा दिलाते हैं कि अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा में सहयोग के लिए मोहन सरकार कोई कमी नहीं रहने देगी। तो दूसरे आयोजन में धार में भोजशाला में सरस्वती पूजन कर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुशी जताते हैं कि न्यायालय के फैसले के बाद धार स्थित भोजशाला में सरस्वती पूजन की 750 साल बाद मिली है। मध्यप्रदेश सरकार यहां सरस्वती लोक का निर्माण करेगी और धार अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। यह गजब संयोग ही है कि धार में

भोजशाला को लेकर मुख्यमंत्री का भाव न्यायालय के फैसले के साथ जुड़कर कानून का पालन कराने और इस फैसले के लिए न्यायालय का आभार जताने का है तो दूसरी तरफ, वह प्रदेश का मुखिया होने के नाते मुस्लिम बच्चों की शिक्षा के मामले में भी वह पूरी उदारता से भरे नजर आए। शायद यही राजधर्म है कि हर परिस्थिति में सही का साथ निभाया जाए। हो सकता है कि भोजशाला के मामले में न्यायालय का फैसला एक पक्ष को रास न आया हो, लेकिन मुखिया होने के नाते न्याय के साथ खड़े रहना ही राजधर्म है। तो राजधर्म के नाते मुस्लिम बच्चों की शिक्षा से सरोकार और वक्फ बोर्ड की जमीन से अतिक्रमण हटाने के साथ खड़ा होना भी राजधर्म है। और मुखिया होने के नाते एक ही दिन में लगातार ऐसे दो कार्यक्रमों में सहभागिता कर न्याय करना ही सबसे बड़ा राजधर्म है। अब यह संयोग भी अजब ही माना जा सकता है। और अगर यह सुनियोजित भी है, तब भी बेहतर ही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार में कहा कि भोजशाला परिसर में राज्य सरकार भव्य सरस्वती लोक बनायेगी, यहाँ राजा भोज संस्थान की स्थापना भी की जायेगी। ऐतिहासिक भोजशाला पर माननीय उच्च न्यायालय ने जो निर्णय दिया है, राज्य सरकार इस न्यायिक आदेश का अक्षरश: पालन कराएगी। राज्य सरकार भोजशाला के गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए सभी जरूरी प्रयास करेगी। राजा भोज की इस पुण्य धरा में अब चहुंमुखी विकास की नई धारा बहेगी। धार के आसपास पुरात्व विभाग से समन्वय कर सभी प्रकार के विकास कार्य किए जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला के लिए हुए आंदोलन में शहादत देने वाले तीन शहीदों स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह एवं स्व. लक्ष्मण सिंह के निकटतम परिजन को राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन कर विधि विधान से पूजन-अर्चन किया। और कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय से 750 वर्ष का संषर्घ सफल हुआ है। धार में नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने इसके लिए न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश की जनता को बधाई दी।

तो इससे पहले भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड विभिन्न नवाचारों से देश में सबसे आगे है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन की गई, इसके लिए भारत सरकार से स्कॉच अवार्ड मिला। यह पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बनी है। म.प्र वक्फ बोर्ड देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड है। वह मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। डॉ. यादव ने कहा कि हमारा देश रहीम और रसखान की मेलजोल की संस्कृति में विश्वास रखता है। भारत की जनता कानून में भरोसा रखती है, चाहे किसी भी समुदाय की हो। इसलिए भारत पूरे विश्व में आदर्श है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक वक्फ सुधार में इतना बड़ा कार्य नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अभिनंदन का पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। मध्यप्रदेश में अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। बोर्ड को आय वृद्धि का अवसर भी मिल रहा है। तो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बेटे-बेटियां शिक्षा के माध्यम से प्रोत्साहित हों और भविष्य के सपनों को साकार करें। मध्यप्रदेश सरकार इनका पूरा सहयोग करेगी।

तो बात चाहे अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति की हो, वक्फ बोर्ड की हो या फिर 750 सालों बाद भोजशाला में सरस्वती पूजकों को मिली सरस्वती पूजा की खुली आजादी की हो…परिस्थितियों की हर कसौटी पर खरा उतरना ही सबसे बड़ा राजधर्म है। और उम्मीद यही है कि मध्य प्रदेश राजधर्म का पालन करने में भी देश में हमेशा पहले स्थान पर खड़ा रहेगा…। यह राजधर्म ही है… कि इधर अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा से सरोकार, उधर भोजशाला विवाद सुलझाने के लिए न्यायालय का आभार…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।