Mythological Female Characters: इंदौर लेखिका संघ द्वारा ‘भारतीय पौराणिक कथाओं में महिलाएं ‘विषय पर परिसंवाद ,आज गांधारी

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Mythological Female Characters: इंदौर लेखिका संघ द्वारा ‘भारतीय पौराणिक कथाओं में महिलाएं ‘विषय पर परिसंवाद ,आज गांधारी

2.संसार की पतिव्रता और महान् नारियों में गांधारी का विशेष स्थान है

परिसंवाद : इंदौर लेखिका संघ द्वारा ‘भारतीय पौराणिक कथाओं में महिलाएं ‘विषय पर परिसंवाद  आयोजित किया गया .इस रौचक विषय पर सदस्यों ने उत्साह पूर्वक भाग लेकर भारतीय पौराणिक कथाओं में उल्लेखित विभीन्न  महिलाएं पात्रीं पर अपनी कलम चलाते हुए उनके व्यक्तित्व और उनके कार्यों पर प्रकाश डाला .हम इस परिसंवाद के शृंखला के रूप में यहाँ प्रकाशित करने जा रहे हैं ,प्रतिदिन एक  पात्र यहाँ प्रकाशित किये जायंगे –

सभी हिंदू धर्मग्रंथ स्त्री को ईश्वर की सृजनात्मक शक्ति का अवतार बताते हैं  स्त्री ईश्वर के उस स्त्रीत्व स्वरूप को प्रतिबिंबित करती है जिससे उन्होंने इस संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की है, और ईश्वर ने ही स्त्री में प्रेम, सद्गुण, सामर्थ्य, सौंदर्य और त्याग जैसे दिव्य गुण समाहित किए हैं।हिंदू धर्मग्रंथों, पौराणिक कथाओं या मिथकों के अनुसार, वैदिक काल महिलाओं के लिए समृद्ध युग था। गार्गी और मैत्रेयी जैसी महान महिलाएँ थीं। महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता था और परिवार ‘मातृ-सतत्त्व वाले’ (महिला प्रधान परिवार) होते थे। महिलाओं को सुंदर, बलवान, रचनात्मक और कामुक प्राणी के रूप में सम्मानित किया जाता था।

भारतीय पौराणिक कथाओं में महिलाएं केवल पात्र नहीं, बल्कि ज्ञान, शक्ति और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं. गार्गी और मैत्रेयी जैसे विदुषी शास्त्रार्थ में ऋषियों को हराती थीं, तो सीता और द्रौपदी ने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस और दृढ़ता का परिचय दिया। सावित्री ने मृत्यु से अपने पति को वापस लौटाया, जो अटूट प्रेम और संकल्प का प्रतीक है।

आज से हम इस परिसंवाद में रेखांकित एक और पात्र पर चर्चा करेंगे-

संसार की पतिव्रता और महान् नारियों में गांधारी का विशेष स्थान है। गांधार के राजा सुबल इनके पिता और शकुनि भाई थे। जब गांधारी का विवाह नेत्रहीन धृतराष्ट्र से हुआ, तभी से गांधारी ने भी अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली। इन्होंने सोचा कि जब मेरे पति ही नेत्रहीन हैं, तब मुझे संसार को देखने का अधिकार नहीं है। पति के लिये इन्द्रियसुख के त्याग का ऐसा उदाहरण अन्यत्र नहीं मिलता। किंतु गांधारी का भाई शकुनि इस विवाह से प्रसन्न नहीं था, क्योंकि नेत्रहीन धृतराष्ट्र के साथ गांधारी के विवाह का प्रस्ताव लेकर जब गंगापुत्र भीष्म सुबल के पास पहुँचे, तब शकुनि ने इसे अपने पिता तथा स्वयं का बहुत बड़ा अपमान माना। शकुनि इस बात से बड़ा क्रोधित था कि उसकी बहन के लिए भीष्म एक नेत्रहीन व्यक्ति का प्रस्ताव लेकर आये हैं। शकुनि ने इसी दिन यह प्रण कर लिया था कि वह हस्तिनापुर में कभी सुख-शांति नहीं रहने देगा। महाभारत युद्ध के लिए जो परिस्थितियाँ ज़िम्मेदार थीं, उनके लिए गांधारी का भाई शकुनि भी एक बड़ा कारण था।

         2.  गांधारी

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गांधारी तुम बहुत प्रेरक हो,
कितना बड़ा बलिदान तुम्हारा!
तुमने एक नेत्रहीन से विवाह किया!क्या कमी थी तुममें!???
सुबल पत्री थी! शकुनी की बहन थी!!
और उससे भी बड़ी महानता,
तुम्हारा पत्नीधर्म निभाने का तरीका,
वाह क्या निराला रहा!!
यदि पति नयन सुख नहीं ले सकता तो मैं कैसे!!??
शायद तुम थोड़ी भूल कर गई यह समझने में,
कि पति पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं!!
जो वो नहीं कर सकता वो कमी तुम पूरी कर सकती थी…
पर हाय रे! अंधभक्त पति धर्मिता..
कदाचित तुम्हारा दृष्टिकोण सही होता!!पर अफसोस,….
और उस पर!!?
तुमने अपनी दृष्टि को भी निष्क्रिय कर दिया!!
अब सौ पुत्रों के सुकृत्य, दुष्कृत्य, क्रियाकलाप, कैसे देखोगी!?
कभी सोचा.????
नहीं, तुमने बस एक ही धर्म निभाया; पतिव्रता का..
क्या प्राप्त हुआ अंततः उससे…
पुत्रों का विनाश, और युद्ध….
कदाचित देख सकती तुम अपने ही भ्रात को अपनी गृहस्थी पर घात करते हुए!
तो रोक सकती थी अनर्थ होते हुए!
कुंती की अनकही पीड़ा और अव्यक्त क्रोध…
हक छिन जाने का असहायपन…
उन पाँचों भाइयों की एकता! और बाद में निर्बलता…..
जब एक सबला को अबला सी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया गया!!
किसने!???
तुम्हारे अंधे, पुत्र प्रेम ने, और पतिव्रत धर्म ने…
वाह ऐसी मिसाल कायम की पत्नीधर्म की,
कि कोई स्त्री पतिव्रता बनने की इच्छा नहीं रखेगी कभी….
क्या ‘दुशाला’, तुम्हारी बिटिया ने भी यही सीखा..???

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डॉ निशी मंजवानी

Mythological Female Characters: इंदौर लेखिका संघ द्वारा ‘भारतीय पौराणिक कथाओं में महिलाएं ‘विषय पर परिसंवाद ,आज कैकयी पर चर्चा 

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