पर्व विशेष: अक्षय तृतीया – भौतिक समृद्धि दिन ही नहीं – कर्म शुद्धि और शाश्वत मूल्यों का महापर्व

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पर्व विशेष: अक्षय तृतीया – भौतिक समृद्धि दिन ही नहीं – कर्म शुद्धि और शाश्वत मूल्यों का महापर्व

*(डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर)*

जिसे लोकप्रिय रूप से ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, सनातन धर्म की परंपरा में एक अत्यंत पावन, शक्तिशाली और शुभ त्योहार है। सर्वस्वीकार्य माना जाता हैऔर शुभ मंगल कार्य के लिए अबूझ शुभ मुहूर्त भी ।

‘अक्षय’ शब्द का गहरा अर्थ है — “जिसका कभी क्षय या नाश न हो”, अर्थात् जो शाश्वत, अनंत और अमर हो। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, रविवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि इस दिन सुबह लगभग 10:49 बजे शुरू होकर अगले दिन 20 अप्रैल की सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। पूरे दिन को स्वयंसिद्ध या अबूझ मुहूर्त माना जाता है, अर्थात् किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। पूजा हवन के लिए विशेष मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक का बताया गया है।

 

सनातन शास्त्रों में इस दिन कई ऐतिहासिक और दिव्य घटनाएं जुड़ी हुई हैं, जो इसके महत्व को और गहरा बनाती हैं।

मान्यता है कि इसी दिन सत्ययुग का समापन हुआ और त्रेतायुग का आरंभ हुआ — इसे युगादि तिथि भी कहते हैं। भगवान विष्णु के तीन प्रमुख अवतार — भगवान परशुराम जी, नर-नारायण और हयग्रीव — इसी पावन तिथि पर प्रकट हुए थे।

राजा भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे पितरों को मुक्ति मिली। महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश की सहायता से इसी दिन महाभारत की रचना प्रारंभ की थी। वनवास काल में भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिसमें भोजन कभी समाप्त नहीं होता था — यह प्रचुरता और अक्षयता का जीवंत प्रतीक है।

चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम के कपाट भी इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलते हैं।

इन सभी पौराणिक कथाओं से स्पष्ट है कि अक्षय तृतीया दिव्य ऊर्जा और शुभ आरंभ का दिन है।

 

आध्यात्मिक दृष्टि से यह त्योहार आंतरिक प्रचुरता और कर्मों की अमरता का प्रतीक है। शास्त्रों में वर्णन है कि इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्वाध्याय, दान या सेवा अक्षय फल प्रदान करता है — अर्थात् वह पुण्य जन्म-जन्मांतर तक साथ रहता है और अंततः मोक्ष की ओर ले जाता है।

यह दिन हमें सिखाता है कि बाहरी धन-समृद्धि क्षणभंगुर है, जबकि सच्ची संपदा भक्ति, ज्ञान, करुणा और सेवा भाव से उत्पन्न होती है। गंगा स्नान या पवित्र जल से स्नान के माध्यम से व्यक्ति अपने आंतरिक विकारों — लोभ, क्रोध, अहंकार — को त्यागकर आत्मिक शुद्धि प्राप्त कर सकता है। दान का विशेष महत्व है; जलपूर्ण कलश, अन्न, छाता, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान इस दिन अक्षय पुण्य देता है।

 

इस प्रकार अक्षय तृतीया केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन, शुद्धि और दिव्य मूल्यों से जुड़ने का गहन आध्यात्मिक अवसर है।

 

*वैज्ञानिक और ज्योतिषीय पक्ष*

 

अक्षय तृतीया का आधार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि खगोलीय संरेखण (Celestial Alignments) पर भी टिका है, जिसे ज्योतिष शास्त्र और आधुनिक विज्ञान दोनों दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है।

ज्योतिष के अनुसार, वर्ष में केवल यही एक दिन होता है जब सूर्य मेष राशि (अपनी उच्च राशि) में और चंद्रमा वृषभ राशि (अपनी उच्च राशि) में स्थित होते हैं। सूर्य आत्मबल, तेज और चेतना का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और प्रचुरता का। इन दोनों की मजबूत स्थिति से पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा का अधिकतम प्रवाह होता है, जो मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और नई शुरुआत के लिए आदर्श वातावरण तैयार करता है। इस बार अक्षय योग भी बन रहा है । विभिन्न जातकों के साथ मेष, तुला और धनु राशि धारकों के लिए श्रेष्ठ बताया है सकारात्मक ऊर्जा के साथ शुभ फलों में अभिवृद्धि होगी ।

 

वैज्ञानिक रूप से देखें तो यह समय वसंत ऋतु से ग्रीष्म ऋतु की ओर संक्रमण का काल है। प्रकृति में तापमान, जैविक चक्र और ऊर्जा स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। इस दिन किए गए अनुष्ठान और सकारात्मक कर्म शरीर-मन को इस ऋतु परिवर्तन के अनुकूल ढालने में सहायता करते हैं। कुछ व्याख्याओं में इसे ‘cosmic reset’ का दिन भी माना जाता है, जब ब्रह्मांड की ऊर्जाएं संतुलित होकर नई संभावनाओं का द्वार खोलती हैं।

 

इसलिए अक्षय तृतीया केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति, ब्रह्मांड और मानव चेतना के सामंजस्य का भी दिन है।

 

अक्षय तृतीया सोना-चांदी खरीदने या भौतिक समृद्धि का मात्र दिन नहीं है। यह कर्म शुद्धि, आध्यात्मिक जागरण, दान-पुण्य और शाश्वत मूल्यों — सत्य, अहिंसा, सेवा और करुणा — से जुड़ने का महापर्व है। इस दिन मन से की गई कोई भी शुभ क्रिया जीवन में स्थायी सुख, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति लाती है।

शुभ अक्षय तृतीया! 🙏

इस पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार को अक्षय सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त हो।