
नारी वंदन पर मोदी की लकीर पर चली टीम मोहन… टीम उमंग के हिस्से में आया बहिर्गमन…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में 27 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण को लेकर लाए गए शासकीय संकल्प पर वही हुआ जो अपेक्षित था। टीम मोहन ने शासकीय संकल्प पर अपनी बात जोरदार तरीके से सामने रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में खींची गई लकीर पर चलते हुए विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया। तो विपक्ष ने शासकीय संकल्प से पहले अशासकीय संकल्प लाने की बात कर विषय सत्र की शुरुआत में बहिर्गमन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। इसके बाद कांग्रेस ने दिनभर सार्थक बहस में सक्रिय भागीदारी की। लेकिन अंत में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्य किए गए
शासकीय संकल्प पर विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव पर मतदान को लेकर बात बिगड़ गई। सत्ता पक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष को इस गलत परंपरा की शुरुआत न करने का आग्रह किया। बहुत सोच विचार के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित टीम मोहन की बात पर विचार करते हुए विपक्ष की मतदान की मांग को खारिज कर दिया। और सत्र के अंत में निराश विपक्ष ने एक बार फिर बहिर्गमन कर अपना आक्रोश जताया। एक समय ऐसा लगा कि सत्तापक्ष को शासकीय संकल्प में भी विपक्ष ने पटखनी दे दी है। लेकिन मतदान को लेकर आश्वस्त हो चुके विपक्ष की खुशियाँ ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। विधानसभा अध्यक्ष
को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना ही पड़ा। अंततः सत्ता पक्ष की हां और विपक्ष की न के बाद जब विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष की शासकीय संकल्प और इसमें लाए गए संशोधन पर मतदान की मांग पूरी तरह से खारिज कर दी गई तब विपक्ष बहिर्गमन के साथ विधानसभा से गमन कर गया।
हालांकि, बहुत कुछ नए तथ्य सामने आने की न तो गुंजाइश थी और न ही उम्मीद। यह बात तय थी कि कांग्रेस और भाजपा को एक दूसरे की नीति और नियत पर सवालिया निशान लगाने थे, सो लगाए गए। और यह भी तय नहीं हो पाना था कि नारी वंदन विधेयक पारित न होने का पाप किसने किया है। और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने यह अवश्य साफ कर दिया कि शासकीय संकल्प लाने का उद्देश्य यही था कि लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को पारित न होने देने के कांग्रेस के अपराध को जन जन तक पहुंचाया जा सके और इसमें भाजपा को शासकीय संकल्प लाकर सफलता मिल गई। नारी शक्ति आधी आबादी के रूप में इसकी सजा विपक्ष को अवश्य देगी, यह मंशा भी सत्ता पक्ष ने जाहिर कर दी। तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी भाजपा को कठघरे में खड़ा करते हुए सोनिया, राहुल की बिना परसीमन के 543 लोकसभा सीटों पर एक तिहाई महिला आरक्षण के प्रावधान को तत्काल लागू करने की मांग बार-बार की। और टीम सिंघार की सफलता भी इसमें मानी जा सकती है कि वह शासकीय संकल्प पर भी अपनी उम्मीद के मुताबिक संशोधन प्रावधान मान्य करवाने में सफल रहे। पर अंततः, हाँ की जीत और न की हार के साथ टीम मोहन विजयी रही और टीम उमंग के हिस्से में बहिर्गमन ही शेष रहा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में नारी शक्ति वंदन से जुड़ा संकल्प प्रस्तुत करते हुए इसे ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कांग्रेस द्वारा लाए गए अशासकीय संकल्प पर चर्चा कराने की मांग की। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष को संतुष्ट करते हुए व्यवस्था दी कि शासकीय संकल्प में विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है और अशासकीय संकल्प को अस्वीकार किया जाता है। पर यही संशोधन अंत में
विधानसभा अध्यक्ष को परेशानी में डालने वाला साबित हुआ।
विशेष सत्र को लेकर महिलाओं में भी खास उत्साह दिखाई दिया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा पहुंचीं और दर्शक दीर्घा में बैठकर सदन की कार्यवाही देखी। भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी और अन्य महिला प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहीं। अब इन 1000 महिलाओं से नारी वन्दन अधिनियम पर शासकीय संकल्प की कार्रवाई को जन-जन तक पहुंचाने
की उम्मीद लगाई जा सकती है।
कुल मिलाकर, इस बात से सभी सहमत हैं कि लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। और इसके समर्थन में शासकीय संकल्प लाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। पक्ष और विपक्ष ने लोकसभा की तरह ही राज्य विधानसभा में एक दूसरे को यह अधिनियम पारित न होने के लिए दोषी ठहराया। पर उम्मीद यही है कि दोनों दल मिलकर कभी न कभी महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में एक मत होकर नारी शक्ति का वंदन अवश्य करेंगे। अगर टीम मोदी अकेले इस उद्देश्य को पूरा करने में सफल रही तो टीम राहुल पूरी तरह से बैकफुट पर जा सकती है। टीम मोदी का इरादा भी यही है। टीम मोदी के इसी इरादे में टीम मोहन ने एक सफल आहुति दी है। अब यह देखने वाली बात है कि भविष्य किस ओर ले जाता है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





