जनगणना 2027: स्वगणना में रायसेन प्रदेश में अव्वल, भोपाल-इंदौर पीछे छूटे

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जनगणना 2027: स्वगणना में रायसेन प्रदेश में अव्वल, भोपाल-इंदौर पीछे छूटे

भोपाल: मकानों की स्वगणना के मामले में इंदौर, भोपाल ग्वालियर और जबलपुर जैसे महानगर पीछे छूट गए है। इस काम में भोपाल से सटा हुआ जिला रायसेन एक लाख 25 हजार 143 परिवारों की जानकारी के साथ प्रदेश में सबसे टॉप पर है उसके बाद दूसरे नंबर पर मंदसौर जिला है जहां पर 1 लाख 5 हजार 207 परिवारों ने स्वगणना के जरिए जानकारी भरी है।

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के तहत पहले चरण मेंं तीस अप्रैल को स्वगणना का विकल्प समाप्त हो गया। इसके बाद जनगणना निदेशालय ने जो अंतिम आंकड़े जारी किए है उनमें रायसेन जिले में 1 लाख 25 हजार 143 परिवारों ने स्वगणना की जानकारी देकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है वहीं इंदौरं, भोपाल और जबलपुर, ग्वालियर जैसे महानगर काफी पीछे रह गए है।

जनगणना निदेशालय ने जनगणना के पहले चरण में मकानों की गणना का काम शुरु किया है। एक अप्रैल से तीस अप्रैल के बीच प्रदेश के नागरिकों को स्वगणना का विकल्प दिया गया था। इसे आॅनलाईन पोर्टल के जरिए भरना था। तीस अप्रैल को रात बारह बजे स्वगणना का विकल्प समाप्त हो गया इसके साथ ही स्वगणना के अंतिम आंकड़े फाइनल हो गए है। एक मई से प्रगणकों ने स्वगणना में जानकारी भरने वाले नागरिकों के घर-घर जाकर नागरिकों द्वारा भरी गई जानकारी का वेरीफिकेशन करने का काम शुरु कर दिया। पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग के प्रायमरी और माध्यमिक तथा कुछ हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल से जुड़े शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है। राज्य में एक लाख 41 हजार प्रगणक और 24 हलार तीन सौ पर्यवेक्षकों सहित कुल एक लाख 70 हजार अधिकारी-कर्मचारी जनगणना के काम में लगे है। एक मई से प्रगणकों ने मकान सूचीकरण के लिए परिवारों से उनके मोबाइल नंबर के अलावा 33 तरह की जानकारी लेकर उन्हें भरना शुरु कर दिया है।अभी मकान सूचीकरण का काम किया जा रहा है।

स्वगणना के जो अंतिम आंकड़े जनगणना निदेशालय ने जारी किए है उनमें भोपाल में मात्र 19 हजार 411, जबलपुर में 16 हजार 813, इंदौर में 13 हजार 778 और ग्वालियर में 9 हजार 976 परिवारों ने अपनी मकानों की स्वगणना करते हुए जानकारी उपलब्ध कराई है।

निवाड़ी सबसे पीछे- निवाड़ी जिले में केवल 658 परिवारों ने स्वगणना की जानकारी दर्ज की है। प्रदेश के 55 में से 34 जिलों में स्वगणना में जानकारी भरने वालों की संख्या दस हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए है। जबकि नगर निगम वाले सोलह जिलों में आबादी काफी अधिक है और कई अधिक आबादी वाली बड़ी नगर पालिकाओं वाले जिले भी इस मामले में पीछे रह गए है। जो जिले स्वगणना में पीछे है उनमें पांच हजार से कम जानकारी भरने वाले जिलों में बीस जिले शामिल है। इनमें दमोह, कटनी, अलीराजपुर, बुरहानपुर, सतना, देवास, शहडोल, पन्ना, मैहर, सीहोर, पांढुर्ना, बड़वानी, मुरैना, सीधी, भिंड, शाजापुर, मऊंगंज, श्योपुर, टीकमगढ़, आगरमालवा और निवाड़ी जिले शामिल है।

घर खुद का या किराए का, कार-जीप, लेपटॉप है, ऐसी 33 जानकारी ले रहे-

आप जिस मकान में रह रहे है वह खुद का है या किराये का, कमरे कितने है। कार-जीप, वैन, स्कूटर, मोटरसायकल, मोपेड, लेपटॉप, कम्प्यूटर, टेलीफोन, मोबाइल और स्मार्ट फोन आपके पास है या नहीं इस तरह की 33 जानकारियां परिवारों से पूछकर प्रगणक अपने मोबाइल फोन में दर्ज कर रहे है। खाना पकाने के लिए एलपीजी या पीएनजी सहित कौन सा साधन इस्तेमाल कर रहे है। गैस कनेक्शन है या नहीं, शौचालय, पेयजल, परिवार में वैवाहिक दंपत्ति, परिवार द्वारा उपयोग किया जा रहा मुख्य अनाज, इंटरनेट सुविधा, रेडियो टेलीविजन, ट्रांजिस्टर की जानकारी भी ली जा रही है।

टोल फ्री नंबर शुरु-

जनगणना संबंधी जानकारी जनसामान्य को देने के लिए एक टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है जो सुबह नौ से शाम पांच बजे तक काम करेगा।