केन्द्र का जल प्रदूषण निवारण संशोधन अधिनियम प्रदेश में हुआ लागू

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केन्द्र का जल प्रदूषण निवारण संशोधन अधिनियम प्रदेश में हुआ लागू

भोपाल:  भारत सरकार द्वारा पारित जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण संशोधन अधिनियम 2024 अब मध्यप्रदेश में भी अंगीकृत करते हुए लागू कर दिया गया है।

मध्यप्रदेश सरकार ने जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण संशोधन अधिनियम मध्यप्रदेश राज्य में अंगीकृत किये जाने का संकल्प पारित किया है। राज्य ने भी इस संशोधन को मध्यप्रदेश में लागू कर दिया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।

इस अधिनियम के अंतर्गत दंड निर्धारण हेतु केन्द्र सरकार निर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है।

अधिकारी का स्तर केन्द्र सरकार के संयुक्त सचिव या राज्य सरकार के सचिव स्तर का रहेगा। निर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में अपील की जा सकती है। इसके लिए लगाए गए दंड का दस प्रतिशत जमा करना होगा। निर्णायक अधिकारी द्वारा लगाए गए दंड की राशि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत स्थापित पर्यावरण संरक्षण कोष में जमा होगी।यदि सरकारी विभागों द्वारा अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है तो विभाग प्रमुख को अपने मूल वेतन के बराबर जुर्माना अदा करना होगा।

किसी भी प्रकार के उद्योग या उपचार संयंत्र की स्थापना के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बार्ड की पूर्व सहमति अब जरुरी होगी। जिससे जल निकास , सीवर या भूमि में सीवेज का निर्वहन होंने की संभावना हो। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के परमर्श से कुछ श्रेणियों के औद्योगिक संयंत्रों को ऐसी सहमति प्राप्त करने से छूट दी जाएगी। उद्योग या उपचार संयंत्र की स्थापना की अनुमति निर्धारित करने में उपयोग किये जाने वाले निगरानी उपकरणों से छेड़छाड़ करने पर दस हजार से पंद्रह लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्मान न भरने पर तीन वर्ष की कैद या जुर्माने की राशि के दुगने तक जुर्माना हो सकता है।