खाकी पर मेहरबान सिस्टम, देश भर में बरी होने वाले 80 फीसदी पुलिसकर्मी अकेले MP में

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खाकी पर मेहरबान सिस्टम, देश भर में बरी होने वाले 80 फीसदी पुलिसकर्मी अकेले MP में

भोपाल. हमारे प्रदेश में जिन पुलिसकर्मियों और अफसरों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होते हैं, उन पर उनका सिस्टम खासा मेहरबान रहता है। यह हकीकत नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। हमारे प्रदेश की पुलिस और यहां की अभियोजन प्रणाली की कार्यक्षमता को लेकर एक ऐसी तस्वीर पेश की है जो न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि व्यवस्था की विफलता को भी उजागर करती है।

रिपोर्ट बताती हैं कि आपराधिक मामलों में घिरे पुलिसकर्मियों और अफसरों को दोषमुक्त करने के मामले में हमारा प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है। यह स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे भारत में जितने भी पुलिसकर्मी अदालत से बरी या दोषमुक्त हुए हैं, उनमें से अकेले 80 प्रतिशत मध्य प्रदेश में हैं। यह आंकड़ा सीधे तौर पर आशंका पैदा करता है कि या तो प्रदेश में पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है, या फिर अदालतों में ठोस साक्ष्य पेश करने में अभियोजन पक्ष पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

42 प्रकरण हुए थे दर्ज

हाल ही में आई एनसीआरबी की रिपोर्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो वर्ष 2024 के दौरान प्रदेश पुलिस के विरुद्ध 42 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। इन मामलों की शुरूआती विधिक प्रक्रिया में ही 4 प्रकरणों को या तो कोर्ट से स्टे मिल गया या उन्हें निरस्त कर दिया गया। शेष बचे मामलों की तफ्तीश के बाद 27 मामलों में आरोप-पत्र यानी चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 39 प्रकरणों में जांच एजेंसियों ने फाइनल रिपोर्ट पेश कर दी। पूरे वर्ष में प्रदेश के 18 पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई और 29 के खिलाफ आरोप-पत्र पेश किए गए। लेकिन असली चौंकाने वाला खुलासा ट्रायल के नतीजों में छिपा है।

महज तीन को ही दिला पाए सजा

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान कुल 515 पुलिसकर्मियों का ट्रायल पूरा हुआ। एक आदर्श न्याय व्यवस्था में जहां गंभीर आरोपों में कड़ी सजा की उम्मीद की जाती है, वहीं मध्य प्रदेश में नतीजे इसके बिल्कुल उलट रहे। इन 515 पुलिसकर्मियों में से महज 3 को ही सजा सुनाई गई, जबकि शेष 512 पुलिसकर्मी या तो दोषमुक्त कर दिए गए या उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। महज 0.5 प्रतिशत की यह दोषसिद्धि दर यह आशंका पैदा करती है कि पुलिस अपने ही साथियों के खिलाफ जांच करते समय नरमी बरत रही है, या इनका अभियोजना लचर रहता है।

देश भर में बरी हुए 130, हमारे यहां 512

इस पूरे परिदृश्य को यदि राष्ट्रीय स्तर पर रखकर देखा जाए तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। देश भर के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों (यूनियन टेरिटरीज) को मिलाकर कुल 642 पुलिसकर्मी और अफसर ऐसे हैं जिन्हें दोषी नहीं पाया गया। हैरानी की बात यह है कि इन 642 में से अकेले 512 पुलिसकर्मी केवल मध्य प्रदेश के हैं। यानी शेष पूरे देश में दोषमुक्त होने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या महज 130 ही रह जाती है। देश भर में गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों की कुल संख्या 833 रही है, जबकि हमारे यहां पर संख्या सिर्फ 18 ही रही।