निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को बताई सरकार की प्राथमिकता, विभाग में क्या और कैसे करें बताया

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निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को बताई सरकार की प्राथमिकता, विभाग में क्या और कैसे करें बताया

निगम-मंडल, बोर्ड प्राधिकरण अध्यक्षों का उन्मुखीकरण, प्रशिक्षण शुरु

भोपाल. सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में प्रदेश के विभिन्न निगम, मंडल बोर्ड प्राधिकरणों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यों का उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण शुरु हो गया। 18 विभागों के 63 नवनियुक्त पदाधिकारियों का उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने किया। उन्होेंने निगम-मंडल, बोर्ड प्राधिकरण अध्यक्षों से कहा कि सभी संस्थाओं में सरकार की जो प्राथमिकताएं है उनके आधार पर काम करें। प्रशासनिक अधिकारियों से बेहतर तालमेल बनाकर काम करें और सरकार की योजनाओं नीतियों को धरातल पर उतारने में जुट जाएं।

मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्घाटन सत्र के बाद सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से प्रस्तुतिकरण किया गया। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि निगम, मंडल, बोर्ड प्राधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के क्या अधिकार और दायित्व है। किस तरह उन्हें नियम प्रक्रियाओं के भीतर रहते हुए काम करना है यह बताया गया। वित्त विभाग के अधिकारियों ने भी अपना प्रस्तुतिकरण किया। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के वित्तीय अधिकारियों की जानकारी उन्हें दी गई। सभी से संयमित रहकर खर्च करने को कहा गया। अनावश्यक खर्च न हो और निगम, मंडल प्राधिकरणों बोर्ड की आय कैसे बढ़ सकती है यह भी उन्हें बताया गया। सभी से आय बढ़ाने के लिए नवाचार करने को कहा गया। सभी के सुझाव भी लिए गए।

अटल बिहारी बाजपेयी संस्थान ने भी प्रस्तुतिकरण दिया। इसके बाद विभगवार अलग-अलग उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान सहरिया विकास प्राधिकरण और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को बताया गया कि समाज के भाई-बहनों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए जुटकर कार्य करें। सहरिया बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सकल्प बद्ध होकर नीतियों का संचालन करें और निगमों में इससे जुड़े सभी निर्णय लिए आएं।

इस जाति वर्ग में कुपोषण निवारण करने के लिए कदम उठाए जाएं और इस समाज के लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान दें। विरासत से विकास को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक कला, संस्कृति और भाषा संरक्षण के लिए कार्यक्रमों का क्षेत्रों में आयोजन किया जाए। राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही लोक कल्याण कारी योजनाओं का लाभ आम आदमी को मिले। उनके आर्थिक और सामाजिक स्तर में सुधार आए इस दिशा में काम करें। जनजातीय अत्याचार और अधिकारों के हनन की शिकायतों के आने पर ऐसे मामलों की आगे बढ़कर जांच कराएं और आम नागरिक को न्याय मिल सके यह सुनिश्चित कराना उनका दायित्व है।