
राहतों से भरी कैबिनेट… औपचारिक पर भारी अनौपचारिक चर्चा…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
सरकार में कैबिनेट बैठक तो हर सप्ताह होती है, लेकिन कर्मचारियों-अधिकारियों को राहत देने के लिए साल में एक बार तबादला नीति को मंजूरी देने वाली कैबिनेट सबसे महत्वपूर्ण होती है। 20 मई 2026 को मध्य प्रदेश की कैबिनेट बैठक में जहां एक तरफ कर्मचारियों-अधिकारियों को राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ समाज के वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों, किसानों और श्रमिकों के लिए बड़ी राशि की मंजूरी देकर मोहन सरकार ने इन सभी वर्गों को बड़ी राहत दी है। राहतों से भरी ऐसी कैबिनेट बैठक साल में एक बार ही हो लेकिन सालभर इनके फैसले फील गुड कराने के लिए काफी होते हैं। राहत भरी इस कैबिनेट का महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि औपचारिक के साथ-साथ मुख्यमंत्री द्वारा की गई अनौपचारिक चर्चा भी राहत का बूस्टर डोज मानी जा सकती है।
राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है। प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों के 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया था। जिसे सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद तबादला नीति 2026 पर मुहर लगा दी गई। कैबिनेट ने तय किया है कि पति-पत्नी की पदस्थापना एक स्थान पर रखने के मामलों में कार्यवाही की जाएगी। गंभीर बीमारी से ग्रस्त कर्मचारियों को भी स्थानांतरण में रियायत दी जाएगी। नोटशीट में ए-प्लस कैटेगरी वाले मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सीएम की ए-प्लस नोटशीट वाले तबादले 31 मई तक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सभी लंबित आवेदन निपटाए जाएंगे। इन्हें तबादला नीति में शामिल नहीं किया जाएगा।स्वयं के व्यय वाले तबादलों में दो स्थितियां शामिल नहीं होंगी। इन्हें तबादला नीति से बाहर रखा गया है। इसमें पहला, पति-पत्नी को एक स्थान पर किए जाने वाले तबादले और दूसरा, पति-पत्नी की बीमारी के मामलों में होने वाले तबादले को तबादला नीति से बाहर रखा गया है। नई नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों की सीमा अलग-अलग तय करने का प्रस्ताव है। अब तक दोनों को एक ही कोटे में शामिल किया जाता था, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार तबादलों में बाधा आती थी। अब तक कुल कर्मचारियों के 10 से 15 प्रतिशत तक तबादलों की अनुमति दी जाती थी। इसमें स्वैच्छिक और आपसी तबादले भी शामिल होते थे, जिससे जरूरी प्रशासनिक फेरबदल प्रभावित होता था।
स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अलग नीति जारी कर सकते हैं, लेकिन मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं कर सकेंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर के माध्यम से किए जाएंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए होंगे। इसके जरिये शायद सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता को प्राथमिकता देना है। सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से जारी किए जाएंगे। जिन विभागों में ऑनलाइन सिस्टम नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन भी तबादलों के लिए स्वीकार किए जाएंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में खाली पद पहले भरे जाएंगे। इसके बाद गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के रिक्त पद भरे जाएंगे। तबादले किसी जिले में तीन वर्ष पूरे करने के बाद ही होंगे, जिसमें वरिष्ठता का ध्यान रखा जाएगा। कर्मचारी संघ के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट दी जाएगी। चार साल से अधिक समय तक पद पर रहने पर प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तबादले किए जाएंगे। तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और विद्यालयों में कार्यरत अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाएगा। गंभीर रूप से बीमार या सेवानिवृत्ति के निकट शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।
वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रुपये के साथ ही विभिन्न आपदाओं में किसानों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11,608.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए 1,779.07 करोड़ रुपये की मंजूरी इन वर्गों को बड़ी राहत देने वाली है।
राहत भरी इस औपचारिक कैबिनेट में हुई अनौपचारिक चर्चा भी उससे ज्यादा राहत देने वाली मानी जा सकती है। बैठक की शुरूआत में मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की अगली 27वीं बैठक वर्ष-2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह इस बैठक के बाद सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण करेंगे।
हाल ही में बस्तर में हुई बैठक में शाह ने उज्जैन में बैठक की सहमति दी। यह सूचना अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति और सौहार्द का प्रदेश है और कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि करीब 750 वर्ष पुराने धार्मिक विवाद पर न्यायालय ने सकारात्मक और शांतिपूर्ण निर्णय दिया है। राज्य सरकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले का पालन सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री के इस संदेश में भी कठोर संकेत सभी को आगाह कर रहे हैं तो एक बड़े सनातनी हिंदू वर्ग को राहत भी प्रदान कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा को विदेश से वापस भारत लाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर हर संभव प्रयास करेगी। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से शांति, सौहार्द और सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
देखा जाए तो 20 मई 2026 कि कैबिनेट बैठक पूरे प्रदेश को बड़ी राहत देने वाली साबित हुई है। तबादला नीति के साथ किसानों और बड़ी जरूरतमंद वर्ग को राहत देकर मोहन ने सबका मन जीता है। तो मां वाग्देवी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विशेष तौर पर उपकृत किया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद शांतिपूर्ण तरीके से भोजशाला प्रकरण का वांछित समाधान मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। तो राहतों से भरी कैबिनेट में औपचारिक रूप से ज्यादा राहतों से भरी अनौपचारिक चर्चा है… दोनों ही राहत एक दूसरे पर भारी नजर आ रही हैं…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





