अब एमपी ही नहीं, गुजरात भी बनेगा चीता प्रदेश, बोत्सवाना से आए 3 चीता को कच्छ के बन्नी ग्रासलैंड भेजने की तैयारी

79

अब एमपी ही नहीं, गुजरात भी बनेगा चीता प्रदेश, बोत्सवाना से आए 3 चीता को कच्छ के बन्नी ग्रासलैंड भेजने की तैयारी

भोपाल। ‘प्रोजेक्ट चीता’ से मध्य प्रदेश को मिला चीता स्टेट का दर्जा कुछ महिनों बाद धूमिल होता नजर आएगा, क्योंकि चीता को मध्य प्रदेश के कूनो से बाहर विस्तार देने के लिए एक विशेष एक्सपर्ट टीम ने गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी ग्रासलैंड पर अपनी अंतिम असेसमेंट रिपोर्ट सौंप दी है।

सूत्रों के मुताबिक, कूनो से बोत्स्वाना बैच के तीन चीतों को गुजरात भेजने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। प्रोजेक्ट चीता के तहत गठित एक विशेष विशेषज्ञ दल ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित बन्नी ग्रासलैंड का गहन स्थलीय मूल्यांकन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हाई-लेवल असेसमेंट टीम की अगुवाई ‘प्रोजेक्ट चीता’ के डायरेक्टर उत्तम शर्मा कर रहे थे। यह रिपोर्ट कार्यक्रम की देखरेख कर रही हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी को भेजी गई है, जिसके बाद कूनो से बाहर चीतों के पहले ट्रांसलोकेशन का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट के निष्कर्षों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मामले से जुड़े इनसाइडर्स का कहना है कि सिफारिशें पूरी तरह से गुजरात के पक्ष में हैं।

सब कुछ ठीक रहा तो कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में रह रहे बोत्स्वाना बैच के तीन चीतों को सबसे पहले गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड भेजा जाएगा। इनमें दो मादा और एक नर हैं। गुजरात वन विभाग ने कुछ महीने पहले ही केंद्र सरकार से इसके लिए औपचारिक अनुरोध किया था।

*7 बड़े पैरामीटर पर हुई गहन जांच* 

इस टीम में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारी और कूनो नेशनल पार्क के मुख्य वाइल्डलाइफ वेटरनरी डॉक्टर शामिल थे। टीम ने बन्नी ग्रासलैंड में चीतों के जीवित रहने के लिए बेहद जरूरी 7 पैरामीटर्स की जांच की। इनमें शिकार का घनत्व, रहने योग्य इलाका, इलाज की तैयारी, बाड़ों की मजबूती, इंसानी दखल, लैंडस्केप कनेक्टिविटी और लॉन्ग-टर्म मैनेजमेंट जैसे क्रिटिकल पॉइंट शामिल थे।

*चार चीता शावकों को मौत का रहस्य बरकरार*

इस साल फरवरी में बोत्सवाना से चीतों के नवीनतम जत्थे के आने के बाद, भारत की चीता परियोजना ने अप्रैल में जंगली में पहले शावकों के जन्म के साथ एक और मील का पत्थर हासिल किया। हालांकि, एक महीने के भीतर ही, कुनो राष्ट्रीय उद्यान के पास इन चारों चीता शावकों को मृत पाया गया, माना जाता है कि उन्हें किसी जंगली जानवर ने खा लिया था। वन विभाग ने अभी तक उनकी मृत्यु के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस ताज़ा झटके के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या 53 रह गई है।

*भारत में चीता संरक्षण का नया अध्याय*

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की वापसी ने भारतीय वन्यजीव इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा था। अब यदि बन्नी घासभूमि में भी चीतों का सफल पुनर्वास होता है, तो यह परियोजना केवल एक संरक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि देश में विलुप्त प्रजातियों के पुनर्स्थापन का वैश्विक उदाहरण बन सकती है। आने वाले समय में विशेषज्ञों और वन विभाग की निगाहें इस महत्वाकांक्षी योजना के अगले चरण पर टिकी रहेंगी।