Twisha Death Mystery: CBI ने सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार !

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Twisha Death Mystery: CBI ने सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार !

भोपाल। हाई-प्रोफाइल त्विषा शर्मा की ससुराल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। गुरुवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम ने भारी पुलिस बल और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच त्विषा की सास व पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

त्विषा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। सीबीआई की टीम सुबह करीब 9 बजे गिरिबाला के बंगले पर पहुंची थी। अधिकारियों ने बंगले के भीतर पहुंचकर घटनाक्रम से जुड़े संभावित साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की और पूरे परिसर की विस्तृत मैपिंग कराई। कार्रवाई के दौरान बंगले के बाहर सुरक्षा घेरा इतना सख्त रखा गया कि किसी भी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। शाम पांच बजे के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किए जाने की सूचना आई.इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गए ।

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यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद किए जाने और 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई राहत को खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई है। बता दें आज ही सिंह को कोर्ट ने सामने पेश किया जाएगा। .

सीबीआई की मुख्य सूचना अधिकारी  ने पत्रकारों को बताया कि भोपाल स्थित घर में छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ और जांच के बाद सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया.मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम ज़मानत बुधवार 27 मई को रद्द कर दी थी.अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए उन्हें राहत देना उचित नहीं था.

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हाई कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के अलावा शरीर पर कई एंटी मॉर्टम चोटों का भी उल्लेख है.हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद “गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट्स समेत अन्य सामग्री का ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त रूप से परीक्षण नहीं किया.”कोर्ट के अनुसार, “जांच एजेंसियों के मुताबिक़ गिरिबाला सिंह को कई नोटिस भेजे गए थे लेकिन उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया. ज़मानत मिलने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया इंटरव्यू दिए, जिनमें मृतका के ख़िलाफ़ आरोप लगाए गए.”

इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने उन आरोपों का भी गंभीरता से संज्ञान लिया कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए किया हो सकता है। CBI की FIR के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने विदाई के समय त्विषा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे पीड़िता के परिवार ने उनके जोर देने पर दे दिया था।