जिस टाइगर ने महिला को मारा, 3 घायल किए, वह अचानक कैसे मरा, रहस्य बरकरार!

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जिस टाइगर ने महिला को मारा, 3 घायल किए, वह अचानक कैसे मरा, रहस्य बरकरार!

भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 24 मई को मृत नर बाघ के संबंध में जारी दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने नए सवालों को जन्म दिया है। पोस्टमॉर्टम में जहां डार्ट लगी थी वहां आला खून का थक्का जमा नहीं पाया, यह स्पष्ट होता है कि डार्ट टाइगर की मौत के बाद लगाई गई।

तमाम सीनियर और रिटायर्ड वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अधिकारियों का मानना है कि मृत बाघ को डार्ट करना डॉक्टर की ना समझी और बेवकूफी भरा कदम है। इसमे डॉक्टर को थोड़ा देखना था। पहले बांस या लकड़ी से हिलाना था या कुछ फेंक कर देखना था कि टाइगर मूवमेंट क्यों नहीं कर रहा है?

एक्सपर्ट अफसरों का यह भी सवाल है कि जिस टाइगर ने महिला को मारा, तीन घायल किये, फिर अचानक कैसे मर गया? बांधवगढ़ टाइगर की मौत पर मुख्य सचिव अनुराग जैन भी नाराजगी जता चुके हैं।

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28 मई को प्रधान मुख्य वन संरक्षक समिता राजौरा के हस्ताक्षर से जारी प्रेस नोट में विरोधाभासी तथ्यों का उल्लेख किया गया है। प्रेस नोट में कई तथ्य मिसिंग है। मसलन टाइगर की मौत कैसे हुई, इसका उल्लेख नहीं है। डॉ. अग्रवाल द्वारा भी बताया गया कि पोस्टमॉर्टम में जहां डार्ट लगी थी वहां आला खून का थक्का जमा नहीं पाया, यह स्पष्ट होता है कि डार्ट टाइगर की मौत के बाद लगाई गई। इसमे डॉक्टर को थोड़ा देखना था पहले बांस या लकड़ी से हिलाना था या कुछ फेंक कर देखना था कि टाइगर मूवमेंट क्यों नहीं कर रहा है। मृत टाइगर का परीक्षण तो खाली निडिल से डार्टिंग कर पता लगाया जा सकता है।

मसलन, प्रेस नोट में कहा गया है कि नर बाघ के स्वास्थ्य की स्थिति खराब थी, मांसपेशियां पीली और सूखी हुई थी, पाचन तंत्र खाली था, त्वचा खुरदरी तथा बेजान थी। ऐसी अवस्था में टाइगर जंगल से निकाल कर गांव पहुंचा और एक महिला को मारने के बाद तीन अन्य को घायल कर दिया, यह कैसे संभव है? फिर सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर टाइगर बीमार था तो उसकी निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या अस्वस्थ टाइगर की पूर्व सूचना पर प्रबंधन को नहीं थी?

*फोटो पर टाइगर के गर्दन पर डॉट के निशान*

वन्य प्राणी शाखा द्वारा जारी मृत टाइगर के गर्दन पर डॉट के लाल निशान साफ दिखाई दे रहा है परन्तु पीसीसीएफ वन्य प्राणी द्वारा जारी पोस्टमार्टम विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि डार्ट दाहिने कंधे पर लगी, जहां रक्तस्राव नहीं पाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद दिया गया था। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में कंजेस्टिव और हेमरेजिक परिवर्तन देखे गये जो कमजोर रक्त संचार के परिचायक है। कंजेस्टिव जिसमें हृदय शरीर की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाता है। इसके कारण शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ठीक से नहीं पहुंच पाते।

हेमरेजिक एक गंभीर आपातकालीन स्थिति है, जो मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका के फटने से होती है। एक्सपर्ट का मानना है कि यह तब होता है। जब डार्टिंग में Meditomidine + Ketamine का उपयोग किया जाता है और जिसके 15-20 मिनट में एंटी डॉट नहीं दिया जाय।