
राज्यसभा चुनाव: तीसरी सीट पर नहीं होगी सियासी रार, जानिए संख्या बल का गणित- किसके पास कितने विधायक
भोपाल : मध्य प्रदेश की सियासी सरगर्मियों के बीच राज्यसभा की खाली हो रही तीन सीटों को लेकर निर्णायक तस्वीर साफ हो गई है। पिछले कुछ महीनों से चल रही सियासी खींचतान और शह-मात के खेल पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है। प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच कोई सीधी टकराहट नहीं होगी। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिले संकेतों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ताधारी दल इस बार चुनावी जोड़-तोड़ और दलबदल की राजनीति से दूरी बनाए रखेगा। ऐसे में पूर्व की स्थिति ही बनी रहेगी जिसमें भाजपा के खाते में दो और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाना तय माना जा रहा है।
इसलिए लग रहे थे तीसरी सीट पर दांव-पेच के कयास
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के विधायी गणित में आए अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के कारण तीसरी सीट पर भी चुनाव होने के कयास तेजी से लगाए जा रहे थे। इस सियासी हलचल के केंद्र में कांग्रेस के विधायकों की घटती संख्या और कानूनी विवाद थे। बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे तकनीकी रूप से कांग्रेस में होने के बावजूद वैचारिक रूप से पार्टी के साथ खड़ी नजर नहीं आ रही हैं। वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को हाई कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने और भाजपा के रामनिवास रावत को विधायक घोषित किए जाने से भी कयास तेज हुए, लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर है। इधर दिल्ली की एमपी- एमएलए कोर्ट द्वारा दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का निर्वाचन शून्य घोषित किए जाने के बाद भी तीसरी सीट के दांव-पेच के कयास और तेज हुए। इन न्यायिक फैसलों और आंतरिक कलह के कारण कांग्रेस के प्रभावी विधायकों की संख्या कम हुई। जिससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई थी कि भाजपा कुछ और विधायकों को तोड़कर तीसरी सीट पर भी अपना परचम लहराने की कोशिश कर सकती है।
संख्या बल का गणित: किसके पास कितने विधायक
वर्तमान विधायी परिदृश्य में राजेंद्र भारती का निर्वाचन शून्य होने के बाद विधानसभा में सदस्य संख्या 229 रह गई है। विधानसभा में भाजपा के पास 164, कांग्रेस के पास 64 और भारतीय आदिवासी पार्टी के पास एक विधायक है।
तोड़-फोड़ से बचेगी भाजपा
बुधवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री बी एल संतोष से दिल्ली में मुलाकात हुई। सूत्रों की मानी जाए तो इस चर्चा में संगठन के नेतृत्व ने यह संकेत प्रदेश अध्यक्ष को दे दिए हैं कि पार्टी तीसरी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी। हालांकि इस पर प्रदेश अध्यक्ष कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
इन नामों की चर्चा
भाजपा की ओर से कई नाम चर्चा में हैं। जिसमें अरविंद भदौरिया, कांतदेव सिंह, लाल सिंह आर्य, कैलाश विजयवर्गीय, नरोत्तम मिश्रा, सुमेर सिंह सोलंकी सहित अन्य नेताओं के नाम शामिल हैं। वहीं पूर्व मंत्री रामपाल सिंह भी राज्यसभा में जाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में सक्रिय हुए हैं। जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, उनके बेटे नकुलनाथ, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल के नाम चर्चा में हैं। यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेस प्रदेश के किसी नेता को ही राज्यसभा में भेजेगी। जबकि भाजपा एक प्रदेश से और एक दूसरे राज्य के नेता को राज्यसभा में भेज सकती है।





