लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है… पश्चिम बंगाल सरकार का विस्तार यह भी सुनिश्चित करे…

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लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है… पश्चिम बंगाल सरकार का विस्तार यह भी सुनिश्चित करे…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

बात चाहे जम्मू कश्मीर की हो या तमिलनाडु की, बात चाहे पश्चिम बंगाल की हो या फिर गुजरात की… बात जब लोकतंत्र की होगी तब यही सच है कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। पश्चिम बंगाल में सांसद अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर भीड़ द्वारा पथराव करने से उनके घायल होने की खबरें प्रसारित हो रही हैं। अभिषेक पर हमले के आरोपियों में टीएमसी के एक नेता से जुड़े कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात बात भी सामने आ रही है। कल्याण बनर्जी के मामले में भी ऐसा संभव हो सकता है। मामला पश्चिम बंगाल में हाल ही में सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेताओं का है। इसलिए मामले में पश्चिम बंगाल में हाल ही में बनी भाजपा की सरकार की तरफ आम आदमी की निगाहें जाना स्वाभाविक है। लेकिन भाजपा द्वारा ऐसे हमलों की निंदा करने को लोकतांत्रिक दृष्टि से सही माना जा सकता है। लेकिन जनप्रतिनिधियों पर हो रहे इस तरह के हमलों को लोकतांत्रिक दृष्टि से कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता है। लोकतंत्र का मतलब ही यही है कि भीड़ तंत्र की मनोवृत्तियों से देश को छुटकारा मिल सके। लेकिन सत्ता में लम्बे समय तक रहे नेताओं पर यदि हमला हो रहा है, तो पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले टीएमसी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर की बात पर भी गौर करना ज़रूरी है। हुमायूं कबीर ने कहा कि टीएमसी अब सत्ता में नहीं है, इसलिए लोग जवाब दे रहे हैं और विरोध कर रहे हैं। यह टीएमसी सरकार की वजह से लोगों को हुई तकलीफ़ और परेशानियों की प्रतिक्रिया है। बात चाहे कुछ भी हो, लेकिन मूल बात यही है कि

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है।प्रतिक्रिया जताने के लिए भी

यह तरीके मान्य नहीं किये जा सकते हैं। और चूंकि सत्ता में भाजपा है तो कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी अब भाजपा सरकार की है। ऐसे में शुभेंदु सरकार की जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। ताकि ममता की पार्टी के जनप्रतिनिधि खुद की पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी सुरक्षित महसूस कर सकें। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी सरकार पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का अधिकार भी है कि वह राज्य में सुरक्षित महसूस कर सकें।

आज यानि 1 जून 2026 का दिन पश्चिम बंगाल के लिए खास बनने जा रहा है क्योंकि राज्य में पहली बार बनी भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार आकार ले रहा है। पश्चिम बंगाल में बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि राज्य सरकार में 35 नए मंत्रियों को शामिल किया जाएगा। सभी मंत्री सोमवार, 1 जून को शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि राजभवन की ओर से आयोजित शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे नबन्ना में होगा। राज्यपाल आर. एन. रवि नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया, ‘पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश से चुनी गई राष्ट्रवादी सरकार का पूर्ण मंत्रिपरिषद 1 जून 2026 को गठित किया जाएगा। मंत्रिपरिषद के विस्तार के तहत 35 मंत्री नबन्ना में सुबह 11 बजे शपथ लेंगे। राज्यपाल आर. एन. रवि उन्हें शपथ दिलाएंगे।’ भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को सरकार में अहम जिम्मेदारियां और प्रमुख विभाग दिए जा सकते हैं। इससे पहले 18 मई को पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों की जांच के लिए दो आयोगों के गठन को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री ने बताया था कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस बिस्वजीत बसु करेंगे। वहीं महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े मामलों के लिए बनाए गए आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस समप्ति चटर्जी करेंगी। दोनों आयोग 1 जून से काम शुरू करेंगे।

 

तो पश्चिम बंगाल बदल रहा है। सत्ता के लिहाज से काया बदल रहा है। ऐसे में जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से बिखरने और जनाधार खोने की राह पर आगे बढ़ गई है, तब नई सरकार से यह अपेक्षा पूर्ण स्वाभाविक है, कि सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस के

चुने हुए जनप्रतिनिधि तो कम से कम खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। भले ही उनकी असुरक्षा में उनके द्वारा किए गए कर्मों के फल को मुख्य वजह माना जा रहा हो। अभिषेक बनर्जी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के तृणमूल कांग्रेस के नेता से जुड़े होने

और सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही को लोकतांत्रिक दृष्टि से बेहतर और सही माना जा सकता है। पर मंत्रिमंडल विस्तार के साथ शुभेंदु, सरकार की जिम्मेदारियां, लोकतांत्रिक

भावनाओं को अधिक सुदृढ़ करने के लिए और ज्यादा अपेक्षित हैं। और उम्मीद यही है कि पश्चिम बंगाल से बेहतर संदेश पूरे देश में जाएंगे। यही अपेक्षाकृत की जा सकती है कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है… पश्चिम बंगाल सरकार का विस्तार यह भी सुनिश्चित करे…।

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।