CEO Suspended: बीजेपी के नेता से सरेआम भिड़ने वाले जनपद CEO सस्पेंड

जानिए क्या है पूरा मामला

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CEO Suspended: बीजेपी के नेता से सरेआम भिड़ने वाले जनपद CEO सस्पेंड

 

दुर्ग: CEO Suspended: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में सुशासन तिहार के मंच पर सत्ताधारी दल बीजेपी के नेता से सरेआम भिड़ने वाले जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ (CEO) रूपेश पांडे को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के हाई-प्रोफाइल जिले दुर्ग से बड़ी खबर सामने आ रही है। सुशासन तिहार के मंच पर सत्ताधारी दल बीजेपी के नेता से सरेआम भिड़ने वाले जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ (CEO) रूपेश पांडे को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। दुर्ग संभागायुक्त ने कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही और अशिष्ट व्यवहार के चलते यह बड़ी कार्यवाही की है।

इस कार्रवाई के बाद से ही दुर्ग कलेक्ट्रेट से लेकर संभाग के तमाम प्रशासनिक महकमों में हड़कंप मच गया है।

दरअसल यह पूरी कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दुर्ग दौरे के ठीक बाद हुई है। बीती 31 मई को दुर्ग में आयोजित सुशासन कार्यक्रम के दौरान नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सीधे सीएम साय से सीईओ की शिकायत कर दी थी। कार्यकर्ताओं का गुस्सा देखकर प्रशासनिक अमला तुरंत अलर्ट हुआ। बता दें कि इससे पहले 30 मई को जिला कलेक्टर ने रूपेश पांडे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन उनकी तरफ से मिला जवाब संतोषजनक नहीं था, जिसके बाद कमिश्नर ने निलंबन का आदेश जारी कर दिया।

गौरतलब है कि यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा 29 मई को सुशासन तिहार के कार्यक्रम में शुरू हुआ था। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, जनपद सीईओ रूपेश पांडे और भाजपा मंडल महामंत्री के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि सीईओ साहब आपा खो बैठे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ता को सरेआम उंगली दिखाते हुए तल्ख लहजे में कह दिया, ‘तेरे को जो करना है कर ले।’ सबसे बड़ी बात यह है कि जब यह पूरा विवाद हो रहा था, तब स्थानीय विधायक ललित चंद्राकर भी वहीं मौजूद थे। *बीजेपी नेता का आरोप:* पूर्व सरपंच के कार्यकाल में बन रहे एक सामुदायिक भवन के निर्माण पर पहले स्टे (रोक) लगा था। बीजेपी नेता का आरोप था कि स्टे होने के बावजूद सीईओ ने वर्तमान कार्यकाल में भवन के लिए मोटी राशि जारी कर दी।

*सीईओ की दलील:* वहीं दूसरी ओर, निलंबित सीईओ रूपेश पांडे का कहना था कि संबंधित स्टे पहले ही हट चुका था, इसलिए नियमों के तहत ही राशि जारी की गई है। इसी बात पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे।