
कार्यवाहक निरीक्षक बनाने से पहले हो रही रिकॉर्ड की जांच,
PHQ ने मंगाया ट्रैनिंग और उसका रिजल्ट
भोपाल : पुलिस महकमें में उपनिरीक्षकों (एसआई) को कार्यवाहक निरीक्षक का प्रभार देने से पहले अब उनकी बुनियादी प्रशिक्षण और परीक्षा उत्तीर्ण करने की स्थिति की विशेष रूप से जांच की जा रही है। । पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी इकाइयों से विस्तृत जानकारी मांगी है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक त्रुटि या कानूनी विवाद की स्थिति न बने।
जानकारी के अनुसार पुलिस मुख्यालय जल्द ही योग्य उपनिरीक्षकों को उच्च पद का प्रभार देकर कार्यवाहक निरीक्षक नियुक्त करने जा रहा है। इससे पहले मुख्यालय ने जिला पुलिस बल, विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ), विशेष शाखा, पुलिस रेडियो और अन्य इकाइयों से ऐसे सभी उपनिरीक्षकों का रिकॉर्ड तलब किया, जिन्होंने निरीक्षक पद के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके साथ ही प्रशिक्षण के बाद आयोजित परीक्षा का परिणाम भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कपूर त्रिपाठी मामले के बाद लिया सबक
दरअसल यह कदम एक पुराने विवाद के बाद उठाया गया है। कार्यवाहक निरीक्षक कपूर त्रिपाठी के मामले में यह तथ्य सामने आया था कि उन्होंने प्रशिक्षण के बाद होने वाली अनिवार्य परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी, इसके बावजूद उन्हें उच्च पद का प्रभार देकर कार्यवाहक निरीक्षक बना दिया गया था। बाद में सिंगरौली जिले के मोरवा थाने से हटाए जाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस दौरान ऐसे कई अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे जिन्हें परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना ही निरीक्षक का कार्यवाहक प्रभार दिया गया था। इसके चलते इस बार पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा कार्यवाहक निरीक्षक बनाने को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
ट्रैनिंग सेंटर से नहीं मिल पाता अपडेट रिकॉर्ड
नियमों के अनुसार किसी उपनिरीक्षक को निरीक्षक पद के लिए विचार किए जाने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करना और उससे संबंधित परीक्षा में सफल होना आवश्यक है। यह प्रशिक्षण पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में आयोजित किया जाता है।पुलिस में इस तरह की ट्रैनिंग में रिकॉर्ड प्रबंधन की खामियों के कारण भ्रम की स्थिति बन जाती है। कई बार कोई अधिकारी पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर पाता, लेकिन बाद के वर्षो में परीक्षा उत्तीर्ण कर लेता है। इसके बाद भी रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण पुराने आंकड़ों के आधार पर ही जानकारी वहां से भेज दी जाती है। इससे ऐसे अधिकारियों के नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो पाते, जबकि वे बाद में परीक्षा पास कर चुके होते हैं।इसी प्रकार की गफलत से बचने के लिए इस बार पुलिस मुख्यालय सभी इकाइयों से प्रशिक्षण और परीक्षा परिणाम दोनों का सत्यापित डेटा एकत्र कर रहा है। इस डेटा के आधार पर जो पात्रता में आएगा उसे ही इस बार कार्यवाहक निरीक्षक बनाया जाएगा।





