Bhopal News: मानसून की देरी से कहीं गहरा न जाए जल संकट, बड़ा तालाब डेड लेवल के नजदीक

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Bhopal News: मानसून की देरी से कहीं गहरा न जाए जल संकट, बड़ा तालाब डेड लेवल के नजदीक

भोपाल। राजधानी में इस साल मानसून की कशमकश ने नगर निगम और शहरवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भोपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले ऐतिहासिक बड़े तालाब का जलस्तर तेजी से लगातार गिर रहा है। पिछले महज 34 दिनों के भीतर तालाब का वॉटर लेवल 1.4 फीट नीचे खिसक चुका है, जिससे शहर पर एक बड़े जल संकट का साया मंडराने लगा है। बड़े तालाब का वर्तमान जलस्तर घटकर 1,659.20 फीट पर आ गया है।

चिंता की बात यह है कि बड़े तालाब का ‘डेड स्टोरेज लेवल’ (वह न्यूनतम स्तर जिसके नीचे से पानी सप्लाई नहीं किया जा सकता) 1652 फीट है। यानी अब तालाब में डेड स्टोरेज से महज 7.2 फीट पानी ही ऊपर बचा है।

जल विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 1654 तक लेवल आते ही इससे पानी लेना बंद कर दिया जाता है। इसका मतलब साफ है कि अगर अगले एक दो हफ्ते में मानसून की आवक नहीं हुई तो दिक्कत हो सकती है।

40 परसेंट आबादी पर सीधा असर

भोपाल की करीब 40 फीसदी आबादी आज भी अपने दैनिक कामकाज और पेयजल के लिए बड़े तालाब पर ही निर्भर है। पुराने शहर के बड़े हिस्से सहित कई प्रमुख रिहायशी इलाकों में यहीं से वाटर सप्लाई होती है। जल विशेषज्ञ मोहम्मद इस्माइल का कहना है कि यदि जून के आगामी सप्ताहों में अच्छी बारिश नहीं हुई और मानसून में और देरी हुई, तो नगर निगम को जल प्रदाय में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

नगर निगम का ‘प्लान-बी’ और मुस्तैदी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल नगर निगम अलर्ट मोड पर आ गया है। इसके पहले चरण में पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए निगम ने हाल ही में शहरभर में 6,000 से अधिक पाइपलाइन लीकेज को दुरुस्त किया है। जल विभाग के एसई उदित गर्ग का कहना हैकि इस समय पानी को लेकर निगम एक्सट्रा अलर्ट पर है। तालाब के अलावा वैकल्पिक स्रोतों पर नजर रखी जा रही है। यदि बड़े तालाब में जल संकट बढ़ता है, तो कोलार डैम और नर्मदा जल परियोजना से शहर के प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पानी की सप्लाय करने की रणनीति बनाई जा रही है।