
मन्दसौर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक का नवाचार – प्रदेश में पहली बार रोजड़ों (नीलगाय) से फसल बचाने के लिए किसानों को मिलेगा कर्ज
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर । संसदीय क्षेत्र के मंदसौर नीमच जिले के सैकड़ों ग्रामीण क्षेत्रों के किसान नीलगायों जंगली पशुओं और अन्य जानवरों से परेशान हैं और इस कारण प्रति वर्ष खरीफ़ और रबी की हजारों हेक्टेयर खड़ी फसलें रौंद कर बरबाद हो रही है ।
यह समस्या गम्भीर हो गई है और विधानसभा में भी इस मामले में प्रश्न उठाए गए हैं। बोमा पद्धति से नियंत्रण करने के प्रयास हुए पर समस्या हल नहीं हो पाई और इन नीलगायों जंगली पशुओं से किसानों ग्रामीणों ओर महिलाओं की जान तक चली गई है ऐसे में जिला केंद्रीय सहकारी बैंक प्रशासक एवं कलेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग के निर्देश पर समस्या नियंत्रण करने हेतु नवाचार लागू किया है और किसानों ग्रामीणों ने इसे उपयोगी बताया है और ऋण प्रस्तावों के आवेदन भी प्रस्तुत किए हैं ।
नई कार्य योजना से खेतों में रातभर जागकर फसलों की रखवाली करना और नीलगाय व रोजड़ों के झुंड से बचाने की चिंता अब कुछ हद तक कम हो सकेगी। प्रदेश में पहली बार मंदसौर जिला सहकारी बैंक ने ऐसी विशेष ऋण योजना शुरू की है। इसके तहत किसान फसल सुरक्षा के लिए आर्थिक सहायता लेकर तार फेंसिंग और फसलों की सुरक्षा उपाय कर सकेंगे कर सकेंगे।
योजना का लाभ मंदसौर और नीमच जिले के 2 लाख 92 हजार से अधिक सहकारी सदस्य किसानों को मिलेगा। किसानों के लिए रोजड़े नीलगाय और अन्य जंगली जानवर लंबे समय से बड़ी समस्या बने हैं। कई बार किसानों को खेतों के चारों ओर तारबंदी, सुरक्षा जाली या अन्य उपायों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन और जिला सहकारी बैंक ने विशेष ऋण योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीईओ सुनील कच्छारा ने बताया कि प्रशासक एवं कलेक्टर श्रीमती अदिति गर्ग के मार्गदर्शन में योजना के तहत प्रारंभिक चरण में मंदसौर नीमच दोनों जिलों में किसानों के लिए आरंभिक रूप से 50 करोड़ रुपए के
ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है। इस योजना में किसानों को प्रति बीघा 30 हजार रुपए के मान से तथा अधिकतम 3 लाख रुपए तक का ऋण मिल सकेगा। यह राशि खेतों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में उपयोग की जा सकेगी। ऋण की अवधि 5 वर्ष रखी है। किसान इसे जून और दिसंबर में देय 10 अर्धवार्षिक किस्तों के माध्यम से चुका सकेंगे। योजना मध्यावधि ऋण श्रेणी में होगी और इस पर अधिकतम 11 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू रहेगी।
सीईओ श्री कच्छारा ने इस प्रतिनिधि को बताया कि योजना का लाभ केवल बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के नियमित सदस्य किसानों को मिलेगा। जो किसान सहकारी संस्थाओं के डिफाल्टर हैं, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगे। जिले में सहकारी संस्थाओं के 2 लाख से अधिक सदस्य किसान हैं, जिनमें करीब 98 हजार किसान नियमित लेन-देन कर रहे हैं। वहीं नीमच जिले में 91 हजार से अधिक सदस्य किसानों में से 53 हजार नियमित श्रेणी में हैं।
कृषि क्षेत्र की इस बड़ी समस्या के समाधान की दिशा में किसानों के हित में जिला केंद्रीय सहकारी बैंक प्रशासक एवं कलेक्टर की पहल पर प्रदेश में पहली बार यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इससे दोनों जिलों के हजारों किसानों को फसल बचाने में मदद मिलेगी।

*लाखों खर्च करने के बाद भी कोई निराकरण नहीं निकला*
उल्लेखनीय है कि मंदसौर नीमच जिलों सहित पूरे मालवांचल के रतलाम शाजापुर उज्जैन झाबुआ आगर मालवा आदि जिलों में रोजड़ों नीलगायों का आतंक है। ये किसानों की सभी फसलों को रौंद देते हैं। नीलगाय एक नहीं झुंड में साथ चलते हैं इन्हें रोकपाना कठिन हो जाता है प्रभावित और पीड़ित किसानों का कहना है कि कई फसलें इन रोजड़ों की समस्याओं के चलते बुवाई करना ही बंद कर दी है।
बता दें कि पूर्व में इनको पकड़ने के लिए बोमा पद्धति का उपयोग किया था। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी 10 से 12 रोजड़े ही पकड़े जा सके थे। वह प्रक्रिया महंगी होने के चलते सफल नहीं हो पाई। इसके बाद से इसको लेकर किसान परेशान हैं लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया।
सहकारी सोसायटियों एवं सहकारी बैंक से संबद्ध किसानों को नई ऋण योजना से लाभ मिलेगा और अपनी उपज की सुरक्षा उपाय कर सकेंगे ।





