
Inspiration From Film ’12th Fail’: 12वीं में फेल होने का दर्द बना सफलता की सीढ़ी, आदिवासी छात्र ने हासिल किया IIT खड़गपुर का सफर
बड़वानी। कहते हैं कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की नई शुरुआत का संकेत होती है। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के एक दूरस्थ आदिवासी गांव के युवक ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। कभी 12वीं कक्षा में असफल होने के कारण निराशा और हताशा में डूबा यह छात्र आज देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश पाने में सफल हुआ है। उसकी कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और अटूट संकल्प की ऐसी मिसाल है, जो हजारों युवाओं को प्रेरित कर सकती है।
बड़वानी जिले की वरला तहसील के सुदूर गांव खुटवाड़ी के रहने वाले चेतन सोलंकी के लिए वर्ष 2022 जीवन का सबसे कठिन दौर लेकर आया था। 12वीं कक्षा के परिणाम में असफल होने के बाद वह गहरे मानसिक आघात में चला गया। गांव के लोगों की बातें, रिश्तेदारों के ताने और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने उसे भीतर तक तोड़ दिया था। लेकिन यही वह समय था जब उसने हार मानने के बजाय खुद को बदलने का फैसला किया।

चेतन ने खुद को एक कमरे में सीमित कर लिया। बाहर की दुनिया से लगभग दूरी बनाकर उसने इंटरनेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री को अपना साथी बना लिया। घंटों तक पढ़ाई करना उसकी दिनचर्या बन गई। परिवार को भी यह अंदाजा नहीं था कि भीतर ही भीतर वह अपने जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहा है।

सबसे खास बात यह रही कि उसने किसी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बीच उसने यूट्यूब लेक्चर, ऑनलाइन नोट्स और डिजिटल अध्ययन सामग्री के माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास लौटने लगा और उसने न केवल 12वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की, बल्कि देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक जेईई एडवांस्ड में भी सफलता हासिल कर ली।
चेतन ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग में 1309वीं रैंक प्राप्त की, जिसके आधार पर उसे आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश मिला है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीण और आदिवासी छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

चेतन बताता है कि संघर्ष के दिनों में उसे वर्ष 2023 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म “12th Fail” ने भी काफी प्रेरित किया। आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के जीवन पर आधारित इस फिल्म में दिखाई गई कठिनाइयों और संघर्षों ने उसे यह विश्वास दिलाया कि असफलता कभी भी किसी व्यक्ति की अंतिम पहचान नहीं हो सकती। फिल्म की कहानी में उसने अपने जीवन की झलक देखी और उसी से आगे बढ़ने की ताकत प्राप्त की।
आज जब चेतन की सफलता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है, तब उसका परिवार भी भावुक है। परिवार के सदस्य कहते हैं कि अब वे 12वीं में उसके फेल होने को दुर्भाग्य नहीं मानते। उनका मानना है कि यदि वह उस समय असफल नहीं होता, तो शायद उसकी असाधारण दृढ़ता, मेहनत और क्षमता कभी सामने नहीं आती।

परिवार को विश्वास है कि चेतन भविष्य में केवल एक सफल इंजीनियर ही नहीं बनेगा, बल्कि यदि वह चाहे तो देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा यूपीएससी में भी सफलता प्राप्त कर सकता है। हालांकि चेतन फिलहाल भविष्य की बड़ी योजनाओं के बजाय अपने अगले पड़ाव पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अगले महीने वह आईआईटी खड़गपुर में अपनी नई शैक्षणिक यात्रा शुरू करेगा। एक छोटे से आदिवासी गांव के बंद कमरे से शुरू हुई यह कहानी अब देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान तक पहुंच चुकी है। चेतन की यह सफलता बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इरादे मजबूत हों तो असफलता भी सफलता की सबसे मजबूत नींव बन सकती है।





