
25 हजार की रिश्वत में पकड़े नायब तहसीलदार सहित दो को 5-5 साल की सजा, 25 हजार का जुर्माना
पन्ना: पन्ना अदालत ने रेत से भरा ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 25 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गुनौर के तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला और उनके सहयोगी चौकीदार देवीदयाल दहायत को दोषी ठहराते हुए 5-5 साल के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए के जुर्माने से दण्डित किया है।
जिला लोक अभियोजन के सहायक मीडिया प्रभारी रोहित गुप्ता के मुताबिक 24 जनवरी 2020 को गुनौर तहसील के ग्राम सिली निवासी ब्रजबिहारी प्रजापति पिता स्व. फागू प्रसाद प्रजापति (49) ने गुनौर के नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला के विरूद्ध रिश्वत मांगने संबंधी एक शिकायत लोकायुक्त सागर से करते हुए बताया था कि वह खेत से ईटा निर्माण में उपयोग होने बाली रेत को भरकर जा रहा था तभी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला शासकीय गाड़ी से आये और मेरा ट्रैक्टर अवैध उत्खन्न में जप्त कर गुनौर थाने ले गए और छुडवाने के लिए 40 हजार रुपये की रिश्वत की माँग की। वह 24 जनवरी 2020 को ही नायब तहसीलदार से मिला तो उन्होंने उससे बातचीत के दौरान 10 हजार रूपये ले लिये और शेष 25 हजार रूपये की मांग की गयीं।
पीड़ित ब्रजबिहारी प्रजापति 25 जनवरी 2020 को नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला के गुनौर स्थित शासकीय आवास पर पहुंचा और नायब तहसीलदार को 25 हजार रूपये निकाल कर दिये गये तो उन्होंने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को देने को कहा। तभी लोकायुक्त की टीम ने नायब तहसीलदार एवं देवीदयाल से पूछताछ कर उसके पास से नोट जप्त कर लिए। फरियादी द्वारा भेजे आवेदन पत्रो एवं ट्रांसस्क्रिप्ट से अभियुक्त नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला द्वारा अपने पदीय दायित्व का निर्वाहन न कर वैध पारिश्रमिक से भिन्न अवैध पारितोषण प्राप्त करने के लिये प्रथम दृष्टया सहमत होकर रिश्वत मांग करना पाये जाने से अभियुक्त नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला एवं देवीदयाल दहायत के विरूद्ध धारा 7 पीसी एक्ट संशोधित अधिनियम 2018 का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना उपरांत अभियुक्तगण के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
विशेष न्यायाधीश(भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पन्ना सुरेन्द्र मेश्राम के न्यायालय मे शासन की ओर से पैरवी करते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने अभियोजन के साक्ष्य को क्रमबद्ध तरीके से लिपिबद्ध कराकर न्यायालय के समक्ष आरोपीगण के विरूद्ध आरोप को संदेह से परे प्रमाणित किया तथा आरोपी का कृत्य गंभीरतम होने के कारण उन्हे कठोरतम सजा देने का अनुरोध किया। अभिलेख पर आई साक्ष्य, अभियोजन के तर्को एवं न्यायिक दृष्टांतो से संतुष्ट होते हुए न्यायालय ने आरोपी नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को क्रमशः धारा 7 एवं 13 (1) बी सहपठित धारा 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोप में क्रमशः 3 वर्ष, 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रूपये, 15 हजार रूपये के अर्थदण्ड एवं चौकीदार देवीदयाल दहायत को क्रमशः धारा 13 (1) बी सहपठित धारा 13 (2) एवं धारा 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 5 वर्ष, 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 15 हजार रूपये, 10 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।





