
महज चिढ़ाने की बात से नाराज होकर 8 साल की बच्ची को कुएं में फेंककर मार डाला: कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा, लगाया 15 हजार रुपए जुर्माना
छतरपुर: महज चिढ़ाने की बात से नाराज होकर 8 वर्षीय बच्ची की हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश छतरपुर आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी को हत्या के अपराध में उम्रकैद और कुल 15 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है।
अभियोजन के अनुसार 10 अक्टूबर 2024 की शाम करीब 5:15 बजे 8 वर्षीय मोहनी, 9 वर्षीय हर्ष और 14 वर्षीय युवराज अर्द्धकुंवारी माता मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। रास्ते में कुएं के पास खड़े होने के दौरान ग्राम देवकुलिया निवासी आरोपी गोवर्धन पटेल ने मोहनी को देखकर कहा कि वह उसे ज्यादा चिढ़ाती है। इसके बाद उसने बच्ची को पैर से पकड़कर पानी से भरे कुएं में सिर के बल फेंक दिया।
*कुएं में गिरने के बाद भी नहीं रुका आरोपी..*
घटना के दौरान मोहनी की एक चांदी की पायल आरोपी के हाथ में आ गई। इसके बाद उसने कुएं की मुंडेर से ईंट निकालकर कुएं में गिरी बच्ची पर फेंकनी शुरू कर दी। एक ईंट मोहनी के सिर में लगी, जिससे वह चीखने लगी। उसके साथ मौजूद दोनों बच्चे भी घबरा गए और भागकर अपने नाना विष्णु श्रीवास को घटना की जानकारी दी।
ग्रामीणों की मदद से मोहनी को कुएं से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना में हर्ष श्रीवास को भी चोट आई थी।
*आरोपी के कब्जे से मिली मृतिका की पायल..*
मामले की नामजद रिपोर्ट उसी रात थाना राजनगर में दर्ज की गई। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर उसके पेंट से मृतिका की चांदी की पायल बरामद की गई, जिसकी पहचान परिजनों ने की। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए तथा मेडिकल और फॉरेंसिक जांच कराई। जांच पूरी होने के बाद 6 जनवरी 2025 को आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) और 115(2) के तहत चालान पेश किया गया।
*बचाव पक्ष ने मानसिक स्थिति का दिया हवाला..*
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी का मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उसने आवेश में आकर घटना को अंजाम दिया। साथ ही दोनों पक्षों के बीच पहले कोई दुश्मनी नहीं होने की बात कही गई तथा न्यूनतम सजा की मांग की गई।
वहीं अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता पंकज पाठक ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।
*कोर्ट बोला- विरल से विरलतम नहीं, लेकिन अपराध बेहद गंभीर..*
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध होता है कि आरोपी ने आवेश में आकर बच्ची की हत्या की। हालांकि यह मामला ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का नहीं है, इसलिए मृत्युदंड उपयुक्त नहीं माना गया।
कोर्ट ने आरोपी गोवर्धन पटेल को धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। कुल अर्थदंड 15 हजार रुपए निर्धारित किया गया है।





