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सुन्दर वृद्धावस्था (Graceful Ageing)  -जीवविज्ञान के साथ जीवन

सुन्दर वृद्धावस्था (Graceful Ageing)  -जीवविज्ञान के साथ जीवन

    — एन. के. त्रिपाठी

अब्राहम लिंकन ने एक बार कहा था, “अंत में यह महत्व नहीं रखता है कि आपके जीवन में कितने वर्ष हैं, बल्कि महत्व यह रखता है कि उन वर्षों में कितना जीवन है।” जीवन जीवन्तता से भरपूर होना चाहिए। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि जीवन वे क्षण हैं जब व्यक्ति अनुभव करता है कि वह वास्तव में जीवित है।

मनुष्य एक जीवित प्राणी है, जो जन्म लेता है, विकसित होता है और अंततः समाप्त हो जाता है। लेकिन वह प्रकृति में अन्य जीवों में अद्वितीय है क्योंकि उसमें अत्यधिक विकसित मानसिक क्षमताएँ होती हैं। मनुष्य ने पर्यवेक्षण और उनके विश्लेषण के माध्यम से वैज्ञानिक सोच भी विकसित की है। चिकित्सा विज्ञान हमें जीवन में होने वाले जैविक परिवर्तनों की यात्रा के बारे में बताता है।

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बढ़ती आयु के साथ आठ महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। 1- एक स्पष्ट परिवर्तन मांसपेशियों का कम होना (सारकोपेनिया) है। मांसपेशी तंतु सिकुड़ते हैं और नए कम बनते हैं। मांसपेशियों तक कम तंत्रिका (नर्व) संकेत पहुँचने से समन्वय भी प्रभावित होता है। 2- हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है (ऑस्टियोपोरोसिस), क्योंकि उनमें कैल्शियम की कमी हो जाती है। हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं। 3- हृदय एवं रक्तवाहिकाओं में परिवर्तन होते हैं—रक्तवाहिकाएँ कठोर और संकीर्ण हो जाती हैं। हृदय की पंप करने की क्षमता घटती है, जिससे थकान और रक्तचाप की समस्या होती है।4- तंत्रिका तंत्र में परिवर्तन आते हैं तथा धीरे-धीरे न्यूरॉन्स की कमी और तंत्रिका संकेतों की गति कम हो जाती है, जिससे विभिन्न अंगों का समन्वय प्रभावित होता है। 5- फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है क्योंकि उनकी लचक घटती है, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान प्रभावित होता है। इससे सांस फूलती है और सहनशक्ति कम हो जाती है। 6- कोशिकीय वृद्धावस्था प्रारम्भ हो जाती है, क्योंकि नई कोशिकाओं (सेल) का निर्माण सीमित हो जाता है। इससे प्रोटीन को भी क्षति पहुँचती है। 7- प्रतिरक्षा ( इम्यून) तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। 8- महत्वपूर्ण हार्मोनों का स्तर घटता है, जिससे ऊर्जा कम होती है, मांसपेशियाँ घटती हैं और वसा ( फैट) बढ़ती है।

इस सब के लिये हम क्या कर सकते हैं?

शारीरिक और मानसिक व्यायाम इसका समुचित उपाय हैं। यद्यपि ये जैविक परिवर्तन स्वाभाविक हैं, फिर भी नियमित चलना ( वॉक) और व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, मानसिक (बहुत महत्वपूर्ण) और सामाजिक सक्रियता—इन सभी से इन परिवर्तनों के प्रभाव को कम किया जा सकता है और इन्हें काफी सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि कोई इनका पालन करता है तो वह केवल आयु में नहीं बढ़ता है, अपितु जीवन की गुणवत्ता के साथ आयु का सामना करते हुए उसका आनंद ले सकता है। जीवन को वर्षों से नहीं मित्रों से गिनिये, आँसुओं से नहीं, मुस्कानों से मापिए।

( चित्र: एआई द्वारा निर्मित)