
दूरदर्शी सोच, तकनीकी नवाचार और जनसेवा को समर्पित नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण — डीजीपी कैलाश मकवाणा
*वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर*
*( मीडियावाला विशेष)*
जब देश के पहले आईपीएस बैच 1948 के अधिकारी और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे श्री एच एम जोशी के 100 वर्ष होने पर शताब्दी समारोह आयोजित हुआ जो भारतीय पुलिस इतिहास का दुर्लभ और अभूतपूर्व अवसर रहा। डीजीपी श्री मकवाणा सहित प्रदेश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी साक्षी रहे तब स्वागत सम्मान करते हुए श्री मकवाणा ने श्री जोशी के नेतृत्व और सेवाओं को याद कर प्रेरणास्पद बताया।
यह उनकी गरिमा और बड़प्पन को दर्शाता है।
भारतीय पुलिस सेवा में अनेक अधिकारी आते हैं, अपनी सेवाएँ देते हैं और सेवानिवृत्त हो जाते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल पद से नहीं, बल्कि अपनी कार्यशैली, दूरदर्शिता और नवाचारों से एक अलग पहचान बना लेते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री कैलाश मकवाणा उन्हीं चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों में शामिल हैं। इन्हीं गुणों और विशेषताओं के चलते श्री मकवाणा को राष्ट्रपति पदक प्रदान किया गया है ।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि *”आईपीएस बनना आसान है, मगर कैलाश मकवाणा बनना कठिन।”* क्योंकि उन्होंने पुलिसिंग को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनभागीदारी, तकनीक, संवेदनशीलता और आधुनिक सोच के साथ जोड़ा है।
यही नहीं प्रदेश के नागरिकों को बेहतर पुलिस प्रशासन कैसे मिले इसके बारे में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया और पॉजिटिव रिस्पांस के साथ परिणाम भी मिले हैं । इसके साथ ही प्रदेश भर के पुलिस बल की बेहतरी के लिए भी काम किया। पुलिस ड्यूटी 24 × 7 हर समय रहती है ऐसे में पुलिस बल को योग ध्यान हार्टफुलनेस क्रियाओं से जोड़ा स्वास्थ्य ठीक हो यह उपक्रम कराया।

इसके साथ ही अपने दायित्वों के साथ पेशेवर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन के लिए पहली बार व्यवस्थित प्रशिक्षण नीति तैयार कर लागू की गई है , इसके तहत आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर तक के पुलिस बल शामिल किए गए हैं।
*नशे के खिलाफ जनआंदोलन का निर्माण*
डीजीपी कैलाश मकवाणा के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस ने “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चलाकर नशा विरोधी लड़ाई को जनआंदोलन का स्वरूप दिया। यह अभियान प्रदेश के हजारों पुलिस थानों तक पहुँचा और लाखों लोगों को सीधे जोड़ने में सफल रहा। इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और इसे विश्व रिकॉर्ड स्तर की उपलब्धि माना गया।

श्री मकवाणा का मानना है कि केवल अपराधियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है। यही सोच उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है।
*साइबर अपराधों के विरुद्ध “सेफ क्लिक” जैसी अभिनव पहल*
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डीजीपी मकवाणा ने “Safe Click” और “Safe Click 2.0” जैसे व्यापक जागरूकता अभियानों की शुरुआत की। इन अभियानों के माध्यम से लाखों नागरिकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक और साइबर धोखाधड़ी से बचने की जानकारी दी जा रही है। यह अभियान के रूप में सारे प्रदेश में चलाया जा रहा है ।
यह पहल उनकी दूरदर्शी सोच का प्रमाण है, क्योंकि वे भविष्य की चुनौतियों को पहले से पहचानकर समाधान तैयार करने में विश्वास रखते हैं।

*पेपरलेस और डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम*
कैलाश मकवाणा के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पुलिस तेजी से डिजिटल पुलिसिंग की ओर बढ़ रही है। पुलिस कार्यप्रणाली को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने के लिए रिकॉर्ड प्रबंधन, जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। उनका लक्ष्य पुलिस व्यवस्था को पूर्णतः पेपरलेस बनाना है।
*न्याय प्रणाली को तकनीक से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल*
डीजीपी मकवाणा ने पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, फॉरेंसिक, चिकित्सा और जेल विभागों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल को बढ़ावा दिया। इस व्यवस्था से केसों की सुनवाई और जांच प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनने की दिशा में आगे बढ़ी है।
*पुलिस कल्याण और संगठनात्मक सुधारों पर विशेष ध्यान*
एक सफल पुलिस प्रमुख केवल जनता की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अपने जवानों के कल्याण की भी चिंता करता है। डीजीपी मकवाणा ने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य, फिटनेस, पदोन्नति, पुरस्कार प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष बल दिया। हजारों कर्मचारियों के स्थानांतरण, ई-एचआरएमएस सुधार और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने के प्रयास उनके नेतृत्व की विशेष पहचान बने हैं।
फरवरी 2025 से ही योग ध्यान हार्टफुलनेस शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और छोटे अधिकारी से बड़े अधिकारी भी शामिल हो लाभान्वित हो रहे हैं ।
*आधुनिक और उत्तरदायी पुलिसिंग का विजन*
श्री मकवाणा लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर पुलिस कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हैं। उनका उद्देश्य केवल आदेश देना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर की समस्याओं को समझकर समाधान प्रदान करना है। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, संवाद और जवाबदेही का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।
उनके नेतृत्व में पुलिस बल ने प्रदेश में नक्सली उन्मूलन में बड़ा काम किया है और केंद्रीय गृह मंत्री ने सराहना करते हुए सम्मानित किया।
वर्तमान में
आज जब पुलिसिंग की चुनौतियाँ लगातार बदल रही हैं, तब डीजीपी कैलाश मकवाणा ने यह साबित किया है कि एक सशक्त नेतृत्व केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज को दिशा देने का भी कार्य करता है। सबसे अहम पहलू उनकी कार्यशैली में समन्वय होना है। मुख्यमंत्री जी हो या मंत्री मंडल सहयोगी, जनप्रतिनिधियों की बात हो या मुख्य सचिव ओर वरिष्ठ अधिकारी सभी स्तरों पर सुनना समझना और आवश्यक विचार साझा करना परस्पर विश्वास क़ायम करना यह खूबी है और इसके फलस्वरूप परिणाम सामने आए हैं ।
उनकी सोच में तकनीक है, उनकी कार्यशैली में नवाचार है, उनके नेतृत्व में संवेदनशीलता है और उनके विजन में सुरक्षित, सशक्त एवं आधुनिक मध्यप्रदेश की परिकल्पना है।
लेखक पत्रकार संपादक डीजीपी श्री मकवाणा से विगत 1996 – 97 तीन दशकों से जुड़े हैं जब वे मंदसौर जिले में एस पी पदस्थ रहे और कार्यशैली, विभिन्न दायित्वों को बराबर देखा है ।
श्री मकवाणा का तो स्पष्ट कहना है कि सेवा समर्पण और उत्कृष्टता इन्हीं मूल्यों से पुलिस की पहचान निर्मित होती है वे स्वयं इस पर कार्य कर रहे हैं और प्रदेश भर के पुलिस बल से ऐसी ही आशा करते हैं ।
वास्तव में, आईपीएस अधिकारी तो अनेक बनते हैं ओर हर साल बनते हैं, लेकिन अपनी कार्यशैली, ईमानदारी, दूरदर्शिता और जनहितकारी सोच से इतिहास में स्थान बनाने वाले अधिकारी बहुत कम होते हैं। कैलाश मकवाणा उन्हीं विरले अधिकारियों में से एक हैं।
उनके नेतृत्व में पुलिस बल सक्षम बनकर अपराधों और अपराधियों पर नियंत्रण कर आठ करोड़ से अधिक प्रदेशवासियों को सुकून मिलता रहे ।
अभी उन्होंने चैलेंज लिया हुआ है उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ पर्व 28 की तैयारी का स्वयं उज्जैन में मीटिंग में शामिल हुए और व्यापक रूप इस विशाल और भव्य आयोजन शानदार ढंग से सम्पन्न होने के लिए जुटे हुए हैं। विभिन्न संस्थाओं एजेंसियों से कोऑर्डिनेट कर सुरक्षित प्लान के लिए सक्रिय हैं ।
श्री मकवाणा की सफ़लता के पीछे श्रीमती सीमा मकवाणा की अहम भूमिका रही है । दो बेटों और एक बेटी के पिता डीजीपी श्री मकवाणा मूलतः उज्जैन जिले के छोटे गांव से निकली प्रतिभा है जो प्रदेश पुलिस बल का नेतृत्व कर कीर्तिमान स्थापित कर रही है । महाकाल के भक्त श्री मकवाणा सहज,सरल , शिष्ट और सम्मोहक व्यक्तित्व के धनी हैं। यही नहीं वे अच्छे गायक भी हैं मंचों पर भी कई बार जलवे बिखेर चुके हैं । उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं । जय हिन्द।





