ज्योतिष के आईने में पंच गृही योग से बनी महायुद्ध की विभीषिका पर एक चिंतन- क्यों और कब तक रहेगी यह त्रासदी!

बता रहे हैं विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक शर्मा

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ज्योतिष के आईने में पंच गृही योग से बनी महायुद्ध की विभीषिका पर एक चिंतन- क्यों और कब तक रहेगी यह त्रासदी!

संभागीय ब्यूरो चीफ चंद्रकांत अग्रवाल की विशेष प्रस्तुति

वर्तमान में इजराइल और अमेरिका,ईरान के साथ युद्ध कर रहे हैं। आइए जानते है की ऐसी भीषण स्थिति क्यों कर उत्पन्न हुई। इसके लिए हम थोड़ा ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।

इस समय कुंभ राशि में पंच ग्रही योग बना हुआ है। ये योग सूर्य,बुध, राहु, मंगल और शुक्र मिलकर बना रहे हैं। अब इन पांच में से यदि देखा जाए तो सूर्य और मंगल, अग्नि तत्व के गृह हैं जो युद्ध और प्राकृतिक आपदा के लिए कारक बनते हैं। इसके साथ ही सूर्य,राहु का ग्रहण योग, मंगल राहु का अंगारक योग वर्तमान में कई देशों के आपसी युद्ध को दर्शाता है। तालिबान,अफगान, बंगलादेश और नेपाल में सत्ता पलट और अभी बिलकुल लेटेस्ट ईरान और इजराइल युद्ध जिसमें अमेरिका भी मुख्य भूमिका निभा रहा है।

अब हम बात करते है इजराइल,ईरान युद्ध की तो इस समय इजराइल की कुंडली में राहु की महादशा चल रही है। स्थापना के आधार पर इंटरनेट पर प्रचलित कुंडली के विश्लेषण से ये ज्ञात है ( 14/15 मई 1948)। राहु को विनाशकारी गृह माना जाता है। लेकिन इस समय इजराइल, ईरान पर भारी पड़ता दिख रहा है। ईरान की स्थापना कुंडली(1 अप्रैल,1976) के अनुसार इस देश की सिंह लग्न और वृष राशि है। इस हिसाब से वृष राशि के अनुसार इनके कर्म भाव पर ये पंच ग्रही योग बन रहा है। जिसके हिसाब से ईरान बहुत अभिमानी, स्वाभिमानी और क्रूर देश है। इस हिसाब से ईरान अपनी पूरी ताकत झोंक देगा इस युद्ध में। मार्च के मध्य तक ये युद्ध अपने चरम पर होगा और काफी विनाशकारी भी सिद्ध हो सकता है। ईरान को ज्यादा नुकसान की संभावना दिख रही है।

दूसरा कारण ग्रहण हैं। यदि दो ग्रहण जल्दी जल्दी एक ही महीने में हो तो ये भीषण प्राकृतिक आपदा, भीषण युद्ध या किसी बीमारी से जन जीवन के बुरी तरह प्रभावित होने के संकेत रहते हैं। इस वर्ष 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण था जो कुंभ राशि में था। कुंभ शनि की राशि है और अब 3 मार्च को सिंह लग्न में पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। सिंह सूर्य की राशि है।सूर्य और शनि की शत्रुता और राहु से दृष्ट होना भी इस युद्ध को भीषणता की ओर ले जा सकता है।मंगल जो अपने आप में एक अत्यधिक उत्तेजक ऊर्जा है, वो राहु के साथ मिलकर विस्फोटक योग बना रहा है। पर यदि इस ऊर्जा को हम सकारात्मक रूप से उपयोग करें तो बेहद कारगर सिद्ध होती है अन्यथा झगड़े, आगजनी, युद्ध, तनाव की चरम सीमा तक यह युति ले जा सकती है ,जो कि दिख भी रहा है।

मार्च के बाद जब सूर्य, मंगल अपनी राशि बदलेंगे तब इस युद्ध के धीमे पड़ने या खत्म होने की संभावना है। चूंकि कुंभ राशि पश्चिम में उदय होती है। इसीलिए अभी पश्चिमी देशों में युद्ध हो रहा है,पर जैसे ही मंगल, कुंभ राशि से निकल कर मीन राशि में आयेंगे तो उत्तर दिशा के देशों में भी तनाव या युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। अप्रैल मध्य तक दोनों देशों में शांति हो सकती है। लेकिन अत्यधिक विनाश के बाद। बात भारत की करें तो इस युद्ध का भारत पर भी व्यापक असर होगा। क्रूड आइल,पेट्रोलियम के साथ महंगाई चरम पर होगी। सोना,चांदी भी ऊंचाई पर पहुंचेंगे। आयात,निर्यात पर भी असर होगा। यहां यह देखना जरूरी है कि भारत का सत्ता पक्ष इस युद्ध में क्या भूमिका निभाएगा।भारत की ओर से शांति प्रस्ताव रखे जाने की बात की जाएगी यानि भारत मध्यस्थता कर सकता है।

जल्दी जल्दी दो ग्रहण होने से भूकंप के कारक भी बनते हैं। अतः मिडिल ईस्ट में भूकंप की संभावना भी बनेगी। कुंभ राशि में बना ये बेहद खतरनाक योग वैसे तो सभी राशियों पर असर डालेगा किंतु कर्क, धनु, और कुंभ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, खास तौर पर वैवाहिक जीवन के लिए।