स्वच्छता के बाद अब जल सुरक्षा की बारी, ओडिशा के ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ मॉडल से इंदौर रचेगा जल क्रांति का नया इतिहास

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स्वच्छता के बाद अब जल सुरक्षा की बारी, ओडिशा के ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ मॉडल से इंदौर रचेगा जल क्रांति का नया इतिहास

क्या भागीरथपुरा जल प्रदूषण जैसी त्रासदियों पर लगेगी रोक?

के के झा की विशेष रिपोर्ट

इंदौर। देश की स्वच्छता राजधानी के रूप में पहचान बना चुके इंदौर ने अब सुरक्षित और निर्बाध पेयजल आपूर्ति की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। शहरवासियों को 24×7 सीधे नल से BIS मानक का शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है।

इसी क्रम में इंदौर नगर निगम की उच्चस्तरीय टीम ने ओडिशा के चर्चित ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ मॉडल का अध्ययन किया है, जिसे शहरी जल प्रबंधन की दिशा में देश का सबसे सफल प्रयोग माना जा रहा है।

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भुवनेश्वर और पुरी का दौरा कर WATCO (वाटर कॉर्पोरेशन ऑफ ओडिशा) द्वारा संचालित 24×7 जलापूर्ति प्रणाली, स्मार्ट मॉनिटरिंग तंत्र और जल गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था का गहन अध्ययन किया। टीम ने सलिया साही जैसी अनौपचारिक बस्तियों में समावेशी जल वितरण व्यवस्था का निरीक्षण कर यह समझने का प्रयास किया कि सीमित संसाधनों के बीच भी उच्च गुणवत्ता वाली जलापूर्ति कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी से विस्तृत चर्चा कर इस मॉडल की तकनीकी व्यवहारिकता, लागत और इंदौर में इसके संभावित क्रियान्वयन पर मंथन किया।

सूत्रों के अनुसार, अध्ययन यात्रा के बाद इंदौर में जल्द ही इस दिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है।

क्यों खास है ओडिशा मॉडल?

ओडिशा ने वर्ष 2019 में ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ मिशन की शुरुआत करते हुए पुरी को देश का पहला ऐसा शहर बनाया, जहां नागरिक सीधे नल से पानी पी सकते हैं। इस मॉडल की प्रमुख विशेषताएं हैं—

* IoT आधारित रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
* SCADA नियंत्रित स्मार्ट वितरण प्रणाली
* BIS मानकों के अनुरूप शुद्ध पेयजल
* 24×7 निरंतर जलापूर्ति
* गरीब परिवारों के लिए सुलभ कनेक्शन

क्या भागीरथपुरा जैसी त्रासदियों पर लगेगी रोक?

इंदौर के भागीरथपुरा जल प्रदूषण कांड, जिसने 30 से अधिक लोगों की जान ले ली थी, ने शहर की पेयजल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इंदौर में ओडिशा मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो ऐसी घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।

दरअसल, 24×7 जलापूर्ति व्यवस्था में पाइपलाइनों में लगातार पॉजिटिव प्रेशर बना रहता है, जिससे बाहरी गंदा पानी या सीवेज रिसाव पाइपलाइन में प्रवेश नहीं कर पाता। साथ ही सेंसर आधारित गुणवत्ता परीक्षण और रीयल-टाइम अलर्ट सिस्टम जल प्रदूषण की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ लेते हैं।

स्वच्छता के बाद अब जल सुरक्षा में नंबर-1 बनने की तैयारी

इंदौर ने स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और हरित नवाचारों के जरिए देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब यदि शहर ओडिशा के इस मॉडल को अपनी भौगोलिक और जनसांख्यिकीय जरूरतों के अनुरूप सफलतापूर्वक अपनाता है, तो वह जल सुरक्षा और स्मार्ट पेयजल प्रबंधन के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय मिसाल बन सकता है।

स्वच्छता में देश को दिशा दिखाने वाला इंदौर अब ‘नल से अमृत’ की ओर कदम बढ़ा चुका है। यदि यह पहल सफल हुई, तो यह न केवल शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल देगी, बल्कि भागीरथपुरा जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में भी ऐतिहासिक साबित होगी।