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मध्य प्रदेश में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज! हो सकते है बड़े बदलाव!

मध्य प्रदेश में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज! हो सकते है बड़े बदलाव!

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की कैबिनेट में बदलाव की फाइल फिर खुलने वाली है। यह बदलाव मार्च में होने वाला था लेकिन बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनाव के ऐलान के चलते हाईकमान ने यह काम टाल दिया था। इसके अलावा मुख्य विषय यह भी माना जा रहा था कि तब मध्य प्रदेश में कुछ बड़े भाजपा नेताओं के बीच तनाव ज्यादा था ऐसे में बदलाव होता तो इसके संदेश और संकेत भी गलत हो सकते थे।

अब पांच राज्यों के चुनाव निपटते ही भोपाल से दिल्ली तक इसके सिरे फिर पकडे जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री यादव की दिल्ली यात्रा पर इस विषय पर चर्चा फिर होने वाली है।

सूत्रों का कहना है कि मप्र में भी भाजपा हाईकमान नया प्रयोग करना चाहता है। इसके तहत कई विकल्प रखे हैं। इसमें पूरी कैबिनेट का इस्तीफा लेकर गुजरात की तरह नये सिरे से टीम बनाने के अलावा कम से कम आधा दर्जन मौजूदा मंत्रियों को बदलकर इनकी जगह नये चेहरे लाने का भी विकल्प है। संगठन से भी दावेदारों के नाम लिये जा चुके हैं। मप्र में काफी समय से कुछ सीनियर मंत्रियों की बाडी लैंग्वेज कुछ अलग नजर आ रही है। इस मामले में फरवरी और मार्च का महीना बहुत चर्चा मे रहा है। तब कई बयान व मतभेद साफ उभरते नजर आने लगे थे। इसी बीच मुख्यमंत्री यादव,प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की लगातार दिल्ली यात्रा के भी कई निहितार्थ थे। इस दौरान डा यादव की केंद्रीय मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा पीएम से भी मुलाकात हुई थी।

जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर मंत्रियों का जो परर्फामेंस आडिट कराया था, उसकी रिपोर्ट भी हाईकमान के पास है। इसमें कम से कम छह मंत्रियों का कामकाज ’लाल घेरे‘ में आया था। इसके अलावा कुछ अन्य पैरामीटर्स पर भी डा यादव ने मंत्रियों के कामकाज को आंका था।

सूत्रों की मानें तो बीते दो महीने में भी मंत्रियों के कामकाज का नये सिरे से आंकलन कराया गया है,इसमें खुफिया तंत्र से भी इनपुट लिया गया है। दूसरी तरफ भाजपा हाईकमान ने मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं को आपसी समन्वय बढाने की जो हिदायत दी थी,उसका असर भी परखा जाएगा। लिहाजा यह तय है कि मप्र में कैबिनेट फेरबदल अब काफी निर्णायक होगा, क्योंकि यह उस वक्त होगा, जब मप्र की मौजूदा सरकार अपना आधा कार्यकाल पूरा कर रही है और अगले ढाई साल चुनावी चुनौतियो वाले होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निवास पर गत सप्ताह समन्वय समिति की बैठक में अंदर खाने की खबर पर अगर भरोसा किया जाए तो मंत्रिमंडल विस्तार भी चर्चा का विषय था। बता दे कि इस बैठक में पार्टी और संघ के दिग्गज नेता मौजूद थे। मध्य प्रदेश में वर्तमान में 31 मंत्री हैं और 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी चार पद भरे जा सकते हैं। चर्चा है कि कुछ हैवी वेट मंत्रियों को हटाया जा सकता है और कुछ पुराने हैवीवेट को लाया जा सकता है।

इनमें प्रमुख रूप से गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनिस, बृजेंद्र सिंह यादव, रीति पाठक, मालिनी गौड़ आदि के नाम शामिल है। माना जा रहा है कि 4 मई को पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल के विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है।