महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा के प्रकरण के बाद पॉक्सो मामलों में उम्र तय करने के PHQ ने जारी किए नए निर्देश

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महाकुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा के प्रकरण के बाद पॉक्सो मामलों में उम्र तय करने के PHQ ने जारी किए नए निर्देश

भोपाल: पॉक्सो एक्ट के मामलों में पीड़ित की उम्र तय करने को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने अब सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत जांच के दौरान आंगनवाड़ी रजिस्टर (रिकॉर्ड) और 10वीं की मार्कशीट को प्राथमिक आधार माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर इन्हें जब्त भी किया जाएगा। यह फैसला उस समय लिया गया है, जब खरगोन की कथित महाकुंभ गर्ल मोनालिसा की उम्र को लेकर विवाद सामने आया। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने इस मामले में खरगोन एसपी को जांच के निर्देश दिए थे।

इसके बाद पीएचक्यू ने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य के सभी जिलों में तैनात एसपी और भोपाल-इंदौर के पुलिस कमिश्नरों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।

महिला सुरक्षा शाखा की ओर से जारी इन निर्देश में जबलपुर हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला दिया गया है, ताकि पॉक्सो मामलों में उम्र तय करने की प्रक्रिया एक समान और कानूनी रूप से मजबूत हो सके।

नई एसओपी के अनुसार यदि पीड़ित ने 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी है, चाहे वह पास हो या फेल, तो उसकी मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि को ही प्रमाणिक माना जाएगा। यदि वह 11वीं या 12वीं में पढ़ रही है, तब भी 10वीं का रिकॉर्ड ही अंतिम आधार रहेगा और जरूरत पड़ने पर इस सर्टिफिकेट को जब्त किया जाएगा।

ऐसे मामलों में जहां पीड़ित ने स्कूल छोड़ दिया है, वहां उसकी पहली कक्षा में प्रवेश के समय दर्ज जन्मतिथि को आधार बनाया जाएगा। इसके लिए स्कूल के रजिस्टर को जब्त किया जाएगा। यदि अलग-अलग कक्षाओं में जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है, तो ऐसी स्थिति में माता-पिता द्वारा बताई गई तारीख को अंतिम माना जाएगा। साथ ही संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को दस्तावेजों की वैधता को लेकर अंडरटेकिंग देना अनिवार्य किया गया है।

इसके अलावा जांच में आंगनवाड़ी रिकॉर्ड को भी अहम माना गया है। साल 2000 से आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के जन्म का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। जांच अधिकारी को पीड़ित के माता-पिता से आंगनवाड़ी की जानकारी लेकर वहां से संबंधित रिकॉर्ड जब्त करने होंगे। गांव की पंचायत में उपलब्ध जन्म रिकॉर्ड भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

यदि बच्चा अस्पताल में जन्मा है, तो पिछले 15-20 वर्षों के भीतर के मामलों में संबंधित अस्पताल से रिकॉर्ड प्राप्त किया जा सकता है। वहीं एक अन्य विकल्प के रूप में माता-पिता की शादी की तारीख और उसके बाद हुई डिलीवरी के आधार पर भी उम्र का निर्धारण किया जा सकता है।

पीएचक्यू ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड, समग्र आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज उम्र निर्धारण के लिए अंतिम प्रमाण नहीं माने जाएंगे। इनकी तुलना में स्कूल के दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय माना गया है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनकी गहन जांच अनिवार्य होगी।

मोनालिसा मामले में उठे विवाद के बाद यह साफ हो गया कि उम्र तय करने में जरा सी चूक भी कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि पीएचक्यू ने अब पूरे प्रदेश में एक समान और सख्त प्रक्रिया लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पॉक्सो मामलों में जांच मजबूत हो और अदालत में साक्ष्य टिक सकें।