
मां की तलाश में नन्हीं तेंदुआ शावक, बड़वानी के खेत में चल रहा भावुक रेस्क्यू ‘ऑपरेशन मॉम’
बड़वानी : मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के गोलाटा गांव में इन दिनों एक अनोखा और इमोशनल अभियान चल रहा है। यह अभियान किसी शिकारी को पकड़ने या किसी जंगली जानवर को बचाने का नहीं, बल्कि एक मासूम तेंदुआ शावक को उसकी मां से मिलाने का है।
करीब दो माह की मादा तेंदुआ शावक सोमवार को गांव के एक खेत में बेहद कमजोर और बदहाल हालत में मिली थी। वह इतनी कमजोर थी कि ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। ग्रामीणों ने उसका वीडियो बनाकर वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग और वन्यजीव बचाव दल मौके पर पहुंचा।
वन अधिकारियों ने पहले काफी देर तक इंतजार किया कि शायद मां तेंदुआ लौट आए, लेकिन शावक की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। ऐसे में उसे उपचार के लिए वन विभाग के इको सेंटर ले जाया गया। जांच में पता चला कि शावक डिहाइड्रेशन और कई दिनों से भोजन-पानी नहीं मिलने के कारण कमजोर हो गई थी। उपचार और ड्रिप लगाने के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।

वनमंडलाधिकारी आशीष बांसोड़ के अनुसार, इस शावक को उसकी मां से मिलाना ही सबसे बेहतर विकल्प है। क्योंकि मां के संरक्षण में उसका नेचुरल डेवलपमेंट संभव हो सकेगा।
स्थानीय किसानों ने भी बताया कि पिछले करीब एक महीने से एक मादा तेंदुआ अपने तीन शावकों के साथ इस इलाके में दिखाई दे रही थी।
सूरज ढलते ही वन विभाग शावक को उसी स्थान के पास ले जाकर एक विशेष पिंजरे में रख देता है, जहां वह मिली थी। इसके बाद शुरू होता है इंतजार का सबसे अहम दौर।
शावक के पिंजरे के आस पास तीन नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं, जो हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। कुछ दूरी पर वनकर्मी पूरी रात थर्मल विजन उपकरणों के साथ निगरानी करते हैं। जैसे ही मां तेंदुआ के आसपास आने के संकेत मिलेंगे, पिंजरे का दरवाजा रस्सी के माध्यम से दूर से ही खोल दिया जाएगा, ताकि मां और शावक बिना किसी ह्यूमन इंटरफेरेंस के एक-दूसरे से मिल सकें
वन अधिकारियों का कहना है कि मादा तेंदुए अक्सर अपने शावकों को सुरक्षित स्थान पर छोड़कर भोजन की तलाश में जाती हैं और बाद में वापस लौटती हैं। इसी नेचुरल बिहेवियर को ध्यान में रखते हुए यह प्रयास किया जा रहा है।
पहली रात मां तेंदुआ वापस नहीं लौटी, लेकिन वन विभाग ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। अगले चार से पांच दिनों तक हर रात यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। दिन में शावक का उपचार होगा और रात में उसे फिर उसी स्थान पर रखा जाएगा।
वन विभाग का कहना है कि यदि सभी प्रयासों के बावजूद मां तेंदुआ नहीं लौटती है, तो शावक को लंबे समय तक देखभाल के लिए किसी मान्यता प्राप्त प्राणी उद्यान या वन्यजीव बचाव केंद्र में भेजा जाएगा।





