
बोर तो नहीं हो रहे हो ना ? बिलासपुर के घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुपति आलोक कुमार चक्रवाल याद हैं आपको ?
– डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
बोर तो नहीं हो रहे हो ना ?
अपने ‘ज्ञान’ और उसके अभिमान से लबालब बिलासपुर के घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुपति आलोक कुमार चक्रवाल याद हैं आपको ?
हां, वही जो साहित्य अकादमी के सहयोग से चल रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे और ‘चुटकुले’ सुना रहे थे। बाद में जिन्होंने कहानीकार मनोज रूपड़ा से भी बदसलूकी की थी और उन्हें अपमानित करने की कोशिश की थी।
उन्हीं महोदय के बारे मैं नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं।
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बोर तो नहीं हो रहे हो ना?
आरएसएस से जुड़े संगठन ‘भारतीय शिक्षा मंडल’ (यही संघ का शिक्षा विंग है) की सिफारिश पर वे इस पद पर पहुंचे थे, अब न केवल मंडल उनसे ख़फ़ा है, बल्कि संघ के पदाधिकारी भी नाराज़ हैं।
इस घटना के बाद शिक्षा और साहित्य जगत में अकादमिक स्वतंत्रता और सम्मान की कमी पर बड़ी बहस छिड़ गई है।
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने तो यहाँ तक कह दिया कि कुलपति का व्यवहार निंदनीय था और कि यह कुलपति पद को कलंकित करता है।
जन संस्कृति मंच और अन्य साहित्यिक संगठन भी हुआ था रायपुर में, इसे साहित्य, कला और संस्कृति के प्रति असम्मान बताया।

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बोर तो नहीं हो रहे हो ना ?
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह साहित्यकारों का अपमान है. लेखक ही ऐसे कार्यक्रमों में प्रमुख होते हैं। उन्होंने घोषणा की कि :
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय को आगे से कोई फंडिंग नहीं दी जाएगी।
विश्वविद्यालय में साहित्य अकादमी के कोई कार्यक्रम नहीं होंगे।
यह प्रतिक्रिया पिछले 11-12 सालों में अकादमी की तरफ से पहली बार इतनी सख्त बताई जा रही है, खासकर जब पहले के विवादों (जैसे पुरस्कार वापसी या सरकारी हस्तक्षेप) में अकादमी चुप रही थी।
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बोर तो नहीं हो रहे हो ना ?
वेबसाइट द लेंस में आलोक के कृत्यों पर आलोक डाला गया है कि कुपति जी पीएम मोदी के नाम पर चलाई जा रही एक कथित संस्था ‘सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज’ की गर्वनिंग काउंसिल के सदस्य हैं, उस संस्था के फर्जीवाड़े की जांच मोदी जी के पीएमओ के आदेश पर सीबीआई कर रही है।
बिना किसी परमिशन के यह नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र व नमो केंद्र चल रहा था। इस संस्था ने कंगना रनौत को भी झांसे में रखकर उनका इस्तेमाल किया था। इस फर्जी संस्था और घासीदास विश्वविद्यालय के बीच शैक्षिक आदान प्रदान के लिए एमओयू करा लिया।
साहब फर्जी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और एवार्ड्स को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने एशियन काउंसिल फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च से नेल्सन मंडेला एक्सीलेंस अवॉर्ड 2025 हासिल किया।
गजब यह है कि खुद को यूनाइटेड किंगडम से रजिस्टर्ड बताने वाली यह संस्था हरियाणा के हिसार में है और एजुकेशन काउंसलिंग करने का दावा करती है। पुरस्कारों और तस्वीरों के शौकीन साहब ने इस तरह के कई अवार्ड हासिल किए हैं।
अब तो आप निश्चित ही बोर हो गए होंगे!
(फेसबुक वाल से ]





