Lord of the Earth Dr. T.K. Lahiri : सादगी, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण

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Lord of the Earth Dr. T.K. Lahiri : सादगी, सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण

Varanasi: देश में हजारों डॉक्टर हैं, लेकिन डॉ. टी.के. लहरी केवल नाम नहीं, एक विचार हैं। ऐसा विचार जिसने सैलरी छोड़ी, सुविधाएं ठुकराईं और जीवन भर गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज किया। पद्मश्री से सम्मानित यह चिकित्सक आज भी बीएचयू की ओपीडी में उसी निष्ठा से मौजूद है, जैसे दशकों पहले था। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सक, पद्मश्री डॉ. तपन कुमार लहरी आज भी चिकित्सा जगत में सेवा, त्याग और मानवता का प्रतीक बने हुए हैं।

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▪️निःस्वार्थ सेवा ही जीवन

▫️आधुनिक चिकित्सा के दौर में, जब इलाज अक्सर महंगे उपकरणों और बड़ी इमारतों तक सिमट गया है, डॉ. लहरी ने चिकित्सा को हमेशा एक निःस्वार्थ सेवा के रूप में जिया। डॉ. टी.के. लहरी देश के जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन रहे हैं। अमेरिका से उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने भारत, विशेषकर वाराणसी और बीएचयू को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। वर्ष 1974 में उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में सेवा प्रारंभ की और तीन दशकों से अधिक समय तक चिकित्सा शिक्षा और उपचार के क्षेत्र में योगदान दिया।

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▪️गरीब मरीजों के लिए जीवन समर्पित

▫️डॉ. लहरी की पहचान केवल एक कुशल सर्जन की नहीं, बल्कि ऐसे चिकित्सक की है जिन्होंने हजारों गरीब हृदय रोगियों का निःशुल्क इलाज किया। ओपन हार्ट सर्जरी जैसे जटिल उपचार भी उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बिना शुल्क किए। उनकी बदौलत असंख्य परिवारों को नया जीवन मिला।

सेवा के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा रहा कि उन्होंने वर्ष 1997 से अपना वेतन लेना बंद कर दिया। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में से भी वे केवल न्यूनतम राशि अपने दैनिक जीवन के लिए रखते हैं और शेष धन बीएचयू के कोष में छोड़ देते हैं, ताकि उससे जरूरतमंद मरीजों की सहायता हो सके।

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▪️सादगी ही पहचान

▫️डॉ. लहरी का जीवन अत्यंत सादा और अनुशासित है। उनके पास न कोई चारपहिया वाहन है और न ही किसी तरह का दिखावा। आज भी उन्हें एक हाथ में बैग और दूसरे में काली छतरी लिए पैदल बीएचयू अस्पताल आते-जाते देखा जा सकता है। साधारण भोजन, सीमित आवश्यकताएं और समय की कठोर पाबंदी उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। करीब आठ दशक की उम्र में भी वे नियमित रूप से अस्पताल पहुंचते हैं और मरीजों को निःशुल्क परामर्श देते हैं। बीएचयू से वर्ष 2003 में रिटायर होने के बाद उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया गया और वर्षों तक उनकी सेवाएं इस रूप में ली जाती रहीं।

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▪️राष्ट्रीय और सामाजिक सम्मान

▫️डॉ. टी.के. लहरी की असाधारण सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2016 में उन्हें पद्म श्री सम्मान से अलंकृत किया। यह सम्मान उनके चिकित्सा कौशल के साथ-साथ उनके मानवीय मूल्यों और निःस्वार्थ सेवा भावना की भी राष्ट्रीय स्वीकृति है।

वाराणसी में उन्हें लोग केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि धरती का भगवान मानते हैं। जिस उद्देश्य के साथ पंडित मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना की थी, डॉ. लहरी उस मूल भावना को आज भी जीवित रखे हुए हैं। आज भी उनकी वजह से हजारों गरीब मरीजों का दिल धड़क रहा है। डॉ. टी.के. लहरी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देता है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।