
Bhojshala, Dhar:ASI का नया आदेश, हिंदू समुदाय को यहां आने-जाने और पूजा की पूरी अनुमति!
मध्य प्रदेश में धार भोजशाला मामले में 15 मई को आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ASI ने नया आदेश जारी किया है. ASI ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अब हिंदू समुदाय को भोजशाला में आने-जाने की पूरी छूट होगी. वे यहां पुरानी परंपरा के अनुसार अध्ययन और सरस्वती पूजा कर सकेंगे.
ASI ने अपने आदेश में कहा है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को संस्कृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के शोध केंद्र तथा देवी वाग्देवी का मंदिर माना है. इसके मद्देनजर अब हिंदू समुदाय को यहां आने-जाने और पूजा की पूरी अनुमति होगी.ASI ने अपने आदेश में कहा है कि भोजशाला, AMASR Act 1958 के तहत संरक्षित स्मारक बनी रहेगी. इसलिए पर्यटकों और हिंदू श्रद्धालुओं के आने का समय अधीक्षण पुरातत्वविद् (Superintending Archaeologist) जिला प्रशासन से चर्चा कर तय करेंगे. हिंदू समुदाय अध्ययन और पूजा के लिए क्या-क्या कर सकेगा, यह भी अधीक्षण पुरातत्वविद् जिला प्रशासन से समन्वय कर तय करेंगे, ताकि स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि विवादित स्थल का मूल धार्मिक स्वरूप भोजशाला है और यहां देवी सरस्वती का मंदिर था.
कोर्ट ने 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदुओं को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा की अनुमति थी. वहीं, 2003 के आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने कहा था कि भारत सरकार और ASI यह तय करेंगे कि भोजशाला का संचालन और व्यवस्था कैसे होगी. ASI पूरे परिसर की देखरेख करता रहेगा.


मुस्लिम समुदाय के लंबे समय से चले आ रहे दावे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा था कि यदि मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार जिले में किसी अन्य स्थान पर मस्जिद के लिए जमीन मांग सकता है. सरकार कानून के अनुसार उस आवेदन पर विचार कर सकती है.





