
राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा ने रखे विकल्प खुले, प्रदेश संगठन टटोल रहा संभावनाएं
भोपाल: मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चल रही राजनीतिक कवायद के बीच भाजपा ने तीसरी सीट को लेकर अभी अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। केंद्रीय एवं प्रदेश संगठन लगातार राजनीतिक गणित का आकलन कर रहा है और तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने की संभावना तलाश रहा है। यदि संगठन को अपने पक्ष में ठोस और मजबूत कोई सकारात्मक संकेत या पर्याप्त समर्थन की संभावना दिखाई देती है तो इसकी विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय केंद्रीय संगठन ही करेगा कि भाजपा तीसरी सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं।
फिलहाल राज्यसभा की दो सीटों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है, जबकि तीसरी सीट को लेकर संगठन स्तर पर लगातार मंथन जारी है। कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा के नेताओं के संपर्क में हैं। पार्टी के रणनीतिकार विधानसभा के मौजूदा अंकगणित, संभावित क्रॉस वोटिंग और अन्य राजनीतिक समीकरणों का आकलन कर रहे हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रदेश संगठन अपनी रिपोर्ट देगा। इसके बाद तय होगा कि तीसरी सीट पर चुनाव लड़ना है या नहीं।
राष्ट्रीय या प्रदेश स्तरीय चेहरे के जगह जिला स्तर के नेता को अवसर
भाजपा के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि पार्टी तीसरी सीट पर चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय करती है तो उम्मीदवार के चयन में चौंकाने वाला फैसला सामने आ सकता है। पार्टी किसी राष्ट्रीय या प्रदेश स्तरीय चेहरे की बजाय संगठन में लंबे समय से सक्रिय किसी जिला स्तर के नेता को अवसर दे सकती है। इससे संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं को संदेश देने की रणनीति भी जुड़ी हुई मानी जा रही है।
सवर्ण में भारी पड़े रजनीश अग्रवाल
इधर राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में प्रदेश संगठन द्वारा केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए नामों में रजनीश अग्रवाल का नाम भी शामिल था। बताया जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने पहले ही यह तय कर लिया था कि इस बार राज्यसभा में सवर्ण वर्ग से किसी प्रतिनिधि को अवसर दिया जाएगा। इसी मापदंड के आधार पर चार नामों पर गंभीरता से विचार किया गया था। अंतिम चयन से पहले केंद्रीय नेतृत्व ने रजनीश अग्रवाल के संगठनात्मक कार्य, राजनीतिक सक्रियता और पिछले वर्षों के प्रदर्शन का विस्तृत ब्यौरा भी मंगवाया था। प्रदेश संगठन से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उनके कार्यों की समीक्षा की गई। विभिन्न स्तरों से प्राप्त फीडबैक और संगठन में उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए अंतत: उनके नाम पर सहमति बनी।a





