Relief to Nirmala Sapre: विधायक निर्मला सप्रे के दल बदल मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका खारिज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका खारिज कर दी है। गुरुवार को सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, ऐसे में इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।”मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA उमंग सिंघार की याचिका खारिज की। उन्होंने स्पीकर के पास एक अर्ज़ी दी थी, जिसमें बीना निर्वाचन क्षेत्र की MLA निर्मला सप्रे को दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने सप्रे (प्रतिवादी नंबर 4) की दलीलों पर ध्यान दिया। सप्रे ने कहा था कि न तो उन्होंने INC से इस्तीफ़ा दिया है और न ही BJP में शामिल हुई हैं, और उन्हें हाईकोर्ट और विधानसभा स्पीकर के सामने एक बेबुनियाद मुकदमे में घसीटा जा रहा है।
बेंच ने निर्देश दिया: “ऐसा कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि प्रतिवादी नंबर 4 को INC से निकाल दिया गया है और उन्हें BJP की सदस्यता दी गई है। इन ज़रूरी दस्तावेज़ों की कमी और प्रतिवादी नंबर 4 की ओर से पेश हुए सीनियर वकील के बयान को देखते हुए हमें इस मामले में कोई जल्दबाजी की ज़रूरत नहीं लगती। कार्यवाही चल रही है और इसमें काफी प्रगति हुई है। प्रतिवादी नंबर 4 के स्पष्ट बयान और मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी की ज़रूरत न होने को देखते हुए हाईकोर्ट को प्रतिवादी/माननीय स्पीकर को अर्ज़ी पर जल्द फैसला लेने के लिए कोई निर्देश या रिट जारी नहीं करनी चाहिए। इसलिए ये याचिकाएं खारिज की जाती हैं। खर्च के बारे में कोई आदेश नहीं।”
बेंच ने प्रदीप राय द्वारा इसी तरह के आधार पर दायर एक और रिट याचिका (नंबर 38278/2025) भी खारिज की। उमंग की याचिका के अनुसार, सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनावों में बीना निर्वाचन क्षेत्र से MLA चुने जाने के बाद स्वेच्छा से इंडियन कांग्रेस पार्टी की सदस्यता छोड़ दी थी। यह दावा किया गया कि सप्रे बाद में BJP में शामिल हो गईं, जिससे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल का मामला बनता है। उमंग ने स्पीकर के पास एक अर्ज़ी दी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया। नवंबर 2025 में तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने राज्य सरकार, विधानसभा के स्पीकर (प्रतिवादी नंबर 2) और निर्मला सप्रे (प्रतिवादी नंबर 4) को नोटिस जारी किया।
18 जून को हुई पिछली सुनवाई में सिंघार के वकील ने दलील दी कि वे बस इतनी ही मांग कर रहे हैं कि स्पीकर को उनकी अर्जी पर 90 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, राज्य की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ने तर्क दिया कि स्पीकर ने अर्जी पर संज्ञान ले लिया और उम्मीद है कि 30 जून, 2026 को सबूत दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि सिंघार इस मुद्दे को “बेवजह राजनीतिक रंग देने” की कोशिश कर रहे हैं।
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