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राजेंद्र कानूनगो

श्री राजेंद्र कानूनगो भोपाल में रहते हुए प्रशासन और शासन को बहुत करीब से देखते रहे है ,पोलिटिक्स और ब्युरोकेसी के सूक्ष्म विश्लेषक के रूप में  राजेन्द्रजी की एक ख़ास पहचान है यूँ वे स्वतंत्र पत्रकार, लेखक, कवि, समीक्षक और  मुख्यमंत्री निवास पर लम्बे समय तक सम्बद्ध अधिकारी रहे है . अपनी निर्विवाद कार्यशैली और ख़ास अंदाज उन्हें दूसरों से अलग खडा करता है .सोनकच्छ के मूल निवासी राजेंद्र मालवा के मालवी  अंदाज से लोगों में खासे लोकप्रिय है .

एक अपराजित योद्धा की चौथी बार शपथ

एक अपराजित योद्धा की चौथी बार शपथ

मीडियावाला.इन। आखिरकार एक अपराजित योद्धा की तरह चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ शिवराज सिंह चौहान ने  23 मार्च 2020 को ले ही ली। शिवराज सिंह जी ने प्रथम बार सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ 29 नवंबर 2005...

अगला मुख्यमंत्री कौन? शिवराज का नाम आगे, नरेंद्र तोमर भी है दावेदार

अगला मुख्यमंत्री कौन? शिवराज का नाम आगे, नरेंद्र तोमर भी है दावेदार

मीडियावाला.इन। मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों के साथ ही आम नागरिक के मन में एक ही सवाल चर्चा में चल रहा है, वह यह है कि एमपी का अगला मुख्यमंत्री कौन? वैसे तो इसका फैसला...

राज्यसभा चुनाव और विधायकों की अहमियत, एमपी की राजनीति में होली के रंग

राज्यसभा चुनाव और विधायकों की अहमियत, एमपी की राजनीति में होली के रंग

मीडियावाला.इन। मध्य प्रदेश की राजनीति में होली के रंग कुछ नए रूप लेकर सामने आ रहे हैं ।सबसे ज्यादा रंग काला ही सामने दिखाई दे रहा है जो कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के चेहरों पर...

कांग्रेस के लिए जरूरी है सिंधिया, दिग्विजय और कमलनाथ की तिकड़ी

कांग्रेस के लिए जरूरी है सिंधिया, दिग्विजय और कमलनाथ की तिकड़ी

मीडियावाला.इन। क्या कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाल ही के बयानों को उनकी हताशा का प्रतीक माना जाए ? राजनैतिक हलकों में इन बयानों को लेकर अनेक प्रकार की चर्चाएं कल पड़ी हैं। क्या ज्योतिरादित्य पार्टी से...

सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला, चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला, चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मीडियावाला.इन। चुनावों में दागी उम्मीदवारों को टिकट देकर मैदान में उतारने और उनकी जीत को सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों को जो स्वतंत्रता हासिल थी, उसे सुप्रीम कोर्ट के ताजे और नए फैसले से परेशानी होने वाली है,...

मुफ्त बांटने और कर्ज माफी जैसी राजनीतिक चालों से चुनावी तंत्र को मुक्त करने की जरूरत

मीडियावाला.इन। क्या मुफ्त बांटने और कर्ज माफ करने की राजनीतिक चालों से भारतवर्ष का चुनावी तंत्र कभी अपने आप को अलग कर पाएगा? देश में हर राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए जो हथकंडे अपनाता है, उनमें...

मॉब लिंचिंग: यह भीड़ तंत्र की भेड़चाल है

मॉब लिंचिंग: यह भीड़ तंत्र की भेड़चाल है

मीडियावाला.इन। मॉब लिंचिंग की घटनाओं में भारत में कोई नई बात नहीं है। मध्यप्रदेश में भी माब लीचिंग की घटना इसके पहले भी कई बार हो चुकी हैं।