नीरज करेंगे साइकिल से पहली नर्मदा परिक्रमा

नीरज करेंगे साइकिल से पहली नर्मदा परिक्रमा

मीडियावाला.इन।

साहस,सकंल्प और समर्पण के धनी नीरज याग्निक 17 अक्टूबर से नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ करेंगे। ऐसा पहली बार होगा जब कोई साइकिल से इस परिक्रमा पथ को नापेगा। अभी तक पैदल परिक्रमा ही की जाती रही है और एक बार भाजपा नेता अनिल दवे ने विमान से इस परिक्रमा को पूरा किया था। इस लिहाज से नीरज का यह फैसला जीवटता भरा व काफी हद तक दुस्साहस भरा भी है। इसके लिये वे सडक़ मार्ग का उपयोग उतना ही करेंगे, जितना वह सीधे तौर पर नर्मदा के किनारे-किनारे है। जैसे ही सडक़ नर्मदा से दूर होगी वे नर्मदा के तट का रूख कर लेंगे। फिर चाहे वह उबड़-खाबड़ हो, दुर्गम हो, रेतीला हो,पथरीला हो या जंगल हो।
    इंदौर के नीरज याग्निक का नाम अब देश के प्रमुख साइक्लिस्ट में शुमार है। वे हजारों किलोमीटर की साहसिक,दुर्गम और चुनौतीपूर्ण यात्रायें कर चुके हैं। कह सकते हैं कि अनेक मर्तबा जान पर खेलकर ये यात्रायें की गईं और सफलता का परचम फहराकर लौटे। साइकिल से नर्मदा परिक्रमा का फैसला भी उनके जिद्दी स्वभाव को ही दर्शाता है, जिसमें खतरे ही अधिक है। मशक्कत तो जबरदस्त है ही। वे 17 अक्टूबर को महेश्वर से यात्रा शुरू कर करीब तीन हफ्ते में नर्मदा के दोनों तटो को नापकर लौटेंगे। इसके लिये उन्होंने खास तौर से चौड़े टायरों वाली साइकिल खरीदी है।
    इससे पहले नीरज तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मे आये थे, जब उन्होंने 2019 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक साइकिल यात्रा की घोषणा की । तब मित्र,शुभचिन्तकों  ने उन्हें रोका-टोका भी कि वे कश्मीर की बजाय जम्मू से इसे शुरू करें, लेकिन नीरज का ऐसा है कि कह दिया सो कह दिया। इंदौर में पिछले 34 साल से उनकी पहचान साकेत ना गरबा के आयोजक के तौर पर है । एक समय था जब साकेत में ठेठ गुजराती तौर-तरीकों से गरबे होते थे, जिन्हें निहारने शहर उमड़ता था। धीरे-धीरे अन्य स्थानों पर भी उसी अंदाज में ये होने लगे, तब भी साकेत का आकर्षण बरकरार रहा। साइक्लिस्ट  भी वे रहे ही हैं। पिछले साल गरबों से निवृत्त होकर वे पहुंच गये कश्मीर और लाल चौक में तिरंगा फहराकर 13 अक्टूबर को यात्रा प्रारंभ कर दी । तब चार हजार किलोमीटर यात्रा पूरी कर वे 21वें दिन 2 नवंबर को कन्याकुमारी पहुंचे । इस बीच पंजाब में वे दुर्घटनाग्रस्त हो गये और अस्पताल में दाखिल भी होना पड़ा, लेकिन डॉक्टर के मना करने के बावजूद बंदे ने यात्रा जारी रखी। तब दीवाली भी रास्ते में ही मनाई। इस बार भी नर्मदा किनारे ही दीवाली मनना तय है।
    इस यात्रा की खुमारी पूरी तरह उतरी भी नहीं होगी कि वे 7 मार्च को द्वारका  से निकलकर 23 मार्च को असम के डिब्रूगढ़ पहुंच गये। याने 3500 किलोमीटर 15 दिन में नाप दिये। इसके बाद 25 मार्च से देश भर में कोरोना के मद्देनजर तालाबंदी घोषित कर दी गई तो नीरज को घर में कैद होना पड़ा। फिर जैसे ही मौका मिला, बंदा उड़ चला अयोध्या की ओर। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा स्थापित पितरेश्वर हनुमान मंदिर की ओर से अयोध्या 11 किलो चांदी की शिला ले जाना था। तब कैलाशजी की प्रेरणा से नीरज ने यह बीड़ा उठाया और 2 अगस्त को साइकिल से चलकर 4 अगस्त की शाम 931 कि.मी. की यात्रा पूरी कर वे अयोध्या पहुंच गये। इसमें खास बात यह रही कि नीरज ने इंदौर से कानपुर तक सतत् 36 घंटे बिना रुके साइकिल चलाई ।
    और अब वे तैयार हो रहे हैं नर्मदा परिक्रमा के लिये। वे बताते हैं कि साइकिल यात्रा के लिये उनका मन छोटे बच्चे की तरह मचलता है। पत्नी,बच्चों से भी लगातार प्रोत्साहन मिलने से उनका काम आसान हो जाता है। वे इससे पहले डेढ़ साल के भीतर चार बार 200,300,400 व 600 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर चुके हैं। इसके चलते उन्हें फ्रांस की संस्था ओडेक्स क्लब की ओर से चार बार सुपर रेंडेनियर का खिताब मिल चुका है।नीरज इस तरह से अभी तक करीब चौदह महीने में 12135 किलोमीटर  साइक्लिंग और 1350 किलोमीटर रनिंग कर चुके हैं। इसे कोई भी उनके स्ट्रावा अकाऊंट पर देख सकता है , जो खास तौर से साइक्लिंग , मैराथॉन दौड़ने वालों का एप्प है। इसे गारमिन घडी से भी जोड़ रखा है। 
   नर्मदा यात्रा की विशेषता के बारे में नीरज ने बताया कि  ऐसा पहली बार होगा, जब पूरी दुनिया में मुझे कोई भी कहीं से भी ट्रेक कर सकेगा। यह संभव होता है गारमिन घड़ी की वजह से,जिसे पहनकर यात्रा करूंगा। इससे पूरा डाटा बेस तैयार होगा। कश्मीर और द्वारका यात्रा का डाटा बेस भी बना था।  आज तक किसी ने भी नर्मदा परिक्रमा का डाटा बेस तैयार नहीं किया है, जो नीरज की यात्रा से होने वाला है।
     नीरज के नाम एक और कीर्तिमान है। पचास वर्ष की उम्र में वे 98 मिनट में 21.097 किलोमीटर दूरी तय कर चुके हैं, जिसे हाफ मैराथॉन कहा जाता है। वे 50 और 100 किमी की नाइट मैराथॉन साइक्लिंग और रैनाथॉन भी आयोजित कर चुके हैं, जिसमें प्रत्येक में करीब ढाई हजार लोग शरीक हुए थे। ऐसे जुनूनी और दृढ़ इच्छा शक्ति से लबरेज नीरज की नर्मदा परिक्रमा यकीनन नये आयाम कायम करेगी।  

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

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साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।