लाभ तो दूर , लागत के लिए तरसता किसान

लाभ तो दूर , लागत के लिए तरसता किसान

मीडियावाला.इन।

किसान की जिंदगी आधी से ज्यादा खेत में और आधी मंडी में अपना अनाज बेचने के लिए  लाइन में लग कर खप जाती है। इसलिए कि  देश में अनाज और अन्य कृषि उत्पादन की कमी ना हों। उसकी जिंदगी यही है।इन दिनों वह सर्कार को केवल  6 रुपए किलो में  प्याज बेच बेचने को विवश है,जो कि उसकी लागत है। खुले बाजार में प्याज़ २० रूपये किलो बिक रहा है. बताइए इसमें क्या कमा पायेगा किसान । जबकि  बिचौलिए मजा लेते हैं।जिस प्रदेश में मुख्यमंत्री बार-बार कहते हों कि हम खेती-किसांनी को लाभ का धंधा बनाएंगे , वहां किसान लगत के लिए भी तरसे तो समझा जा सकता है कि सरकार की कथनी और करनी में कितना अन्तर है ?

       एक आद्ध्यत्मिक गुरु होने के कारण और किसान का  होने के कारण यह वेदना लिख रहा हूं। हजारों किसानों से जुड़ा हूं। बहुत निराशा का दौर है किसानों में। प्याज के भाव मिल नहीं रहे, रखाव का खर्च अलग। किसान गेहूं लेकर मंडी जाता है सरकारी खरीदी केंद्र से निश्चित समय के  मेसेज मोबाइल पर  आने के बाद भी 3 दिन मंडी में पड़े रहना पड़ता है। बताइये कि लगत निकल नहीं रही, बिक्री के लिए तीन दिन अपनी जेब से खाना-पीना करते हुए मंडी के बाहर खड़े  रहो , ऐसी खेती कौन करना चाहेगा ?चलो इस साल मान  लेते हैं कि कोरोना संकट है सो नंबर आने में इतना समय लग रहा है मगर हर साल यही होता  है। 

     किसानों के लिए जो कांग्रेसी मुख्यमंत्री  कमलनाथ जी ने वादे किए थे वो भी पूरे नहीं हो पाए।  और अब किसानों का कहना है कि  शिवराज जी के समय भी बोनस राशि सभी को समान रूप से नहीं बांटी गई। किसान कहते हैं चुनाव होने वाले  क्षेत्र में बोनस वितरण हो चुका है। यदि यह सही है तो बहुत ही दुखद है।  इतने सालों में सरकार मंडियों में या खुले क्षेत्र में इतने तौल कांटे भी नहीं लगा पाई कि किसान चार घंटे में अपना उत्पादन बेचकर घर चला जाए। बेचारा किसान  भूखा प्यासा अपने ट्रैक्टर पर सिर्फ इस आस में बैठा रहे कि  मेरा नंबर कब आएगा। दुर्भाग्य है अभी तक किसानों की कोई सुनने वाला नहीं। 

 मालवा के किसान की गेहूं के बाद लहसुन प्याज की फसल  बिकने को  तैयार है। मगर दोनों के भाव  नदारद हैं। प्याज का रख रखाव इतना मुश्किल है कि किसान को सड़े प्याज घुडे पर फेंकना पड़ते हैं। उम्मीद है किसान का असंतोष फुट ना पड़े उसके पहले राहत की बारिश सरकार कर दे। सरकार को किसानों के लिए हर उत्पाद की बिक्री और मूल्य निर्धारण की नीति बनानी चाहिए। अभी जैसे गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपए तय किया है एंसा ही प्याज का समर्थन मूल्य 11से 12 रुपए के बीच तय कर देना चाहिए। 

      बहुत ज्यादा मात्रा में खरीदी केंद्र स्थापित करना चाहिए। बहुत दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति है कि कृषि प्रदान देश का किसान अपने उत्पादन को बेचने के लिए मंडियों में लंम्बी लाइनों के बीच तीन तीन दिन प्रतीक्षा में गर्मी ,धूप में परेशान हो रहा है।  किसान सभी सरकारों से नाराज़ है ,लेकिन प्रदेश सरकार हर निर्णय विलंब से लेती है जब तक किसान की  फसल खराब होने लगती है।

      अभी केंद्र सरकार ने घोषणा की कि किसान अपना माल प्रदेश से बाहर बेचने को ले जा सकता है ,! इसमें नया क्या है ,ये तो हर साल किसान दिल्ली की  मंडी की ओर  रुख करता है। अभी बहुत शीघ्र ही प्याज को लेकर नई नीति बनाकर किसानों को राहत देने की सख्त आवश्यकता है।

(लेखक ज्योतिषाचार्य व् आध्यात्मिक सलाहकार हैं)

 

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कैलाश नागर

जीवन परिचय 


* जन्म : 6 सितम्बर 1960 ,आरोलिया (आष्टा ) मप्र 

* शिक्षा : कला स्नातक 1981 

* इंदौर आगमन : 1978 में 

* स्नातक के बाद अखबारों में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन 

* ज्योतिष व् आध्यात्मिक सलाहकार : 1991 से प्रारम्भ 

* आज तक टीवी चैनल पर 5 वर्ष तक ज्योतिष सलाह का प्रसारण 

* हिमालय में 16 हजार फ़ीट की ऊंचाई पर एकांतवास में कठोर साधना की।  भृगु संहिता, रावण काली संहिता , होरा पाराशर शास्त्र का अध्ययन।  

* ज्योतिष सलाह के लिए मुंबई, दुबई, मॉरीशस , लंदन आदि जगह का प्रवास।